लाइव टीवी

ANALYSIS: महाराष्ट्र में सत्ता का संग्राम, BJP-शिवसेना के बीच लड़ाई की ये है असली वजह

News18India
Updated: November 11, 2019, 6:05 PM IST
ANALYSIS: महाराष्ट्र में सत्ता का संग्राम, BJP-शिवसेना के बीच लड़ाई की ये है असली वजह
बीजेपी-शिवसेना के बीच ये है लड़ाई की असली वजह. (फाइल फोटो)

बाला साहब ठाकरे (Bala Saheb Thakre) के निधन के बाद शिवसेना (Shiv Sena) लगातार बीजेपी के मुकाबले कमजोर होती जा रही है. वहीं, बीजेपी (BJP) अब बड़े भाई की भूमिका में आ गई है. उसकी शक्ति भी बढ़ गई है.

  • News18India
  • Last Updated: November 11, 2019, 6:05 PM IST
  • Share this:
मुंंबई. मोदी सरकार में शिवसेना (Shiv Sena) कोटे से एकमात्र केन्द्रीय मंत्री अरविंद सावंत (Arvind Sawant) के इस्तीफे के बाद अब बीजेपी-शिवसेना के दशकों पुराने गठजोड़ में दरार आ गई है. बस इस गठबंधन के टूटने का औपचारिक ऐलान होना बाकी है, लेकिन इस ऐलान से पहले दोनों राजनीतिक दल गठबंधन टूटने का दोष एक-दूसरे पर लगा रहे हैं. बीजेपी (BJP) के साथ शिवसेना (Shiv Sena) का गठबंधन एनडीए में सबसे पुराना है. इन दोनों दलों में रार तो रहा ही है, लेकिन गठबंधन टूट जाएगा इसकी उम्मीद शायद विपक्ष को भी नहीं थी. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ मुख्यमंत्री की कुर्सी और 50-50 फॉर्मूले के लिए ही गठबंधन (Alliance) टूटा है? अगर यही वजह है तो मोदी सरकार-2 में सिर्फ एक मंत्री पद मिलने पर शिवसेना को गठबंधन से बाहर हो जाना चाहिए था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ऐसे में अगर गठबंधन टूटने की समीक्षा करें तो मामला सिर्फ वही नहीं है, जिसके बारे में शिवसेना बता रही है.

वजूद बचाने के लिए शिवसेना ने चलाया ब्रह्मास्त्र
बाला साहब ठाकरे के निधन के बाद शिवसेना लगातार बीजेपी के मुकाबले कमजोर होती जा रही है. साल 2014 के लोकसभा, 2014 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव की गणित कुछ ऐसी बैठी कि बीजेपी के सामने शिवसेना की हैसियत कमतर होती गई. बीजेपी ने अपनी शर्तों पर शिवसेना को साथ रखा. ऐसे में इस विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार ऐसी राजनीतिक तस्वीर उभरी है, जिसमें शिवसेना लगातार शक्तिशाली हो रही बीजेपी से मोलभाव करने की स्थिति में है. यही वजह है कि शिवसेना इस मौके का फायदा उठाना चाहती है. शिवसेना के नेताओं का मानना है कि पार्टी भले ही विधानसभा चुनावों में सीटों के आधार पर नम्बर दो हो, लेकिन अगर गठबंधन में मुख्यमंत्री पद उसके पास आ जाता है तो वह एक बार फिर बड़े भाई की भूमिका में आ जाएगी. लेकिन, अब मामला काफी आगे बढ़ गया है. ऐसे में यदि शिवसेना सरकार नहीं बना पाती है तो उसका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा.
शिवसेना का समर्थन देना एनसीपी और कांग्रेस की मजबूरी

राज्य में सरकार न बनने पर जितना संकट शिवसेना के सामने है, उससे कम संकट एनसीपी और कांग्रेस के सामने भी नहीं है. दरअसल, विधानसभा निलंबित रख कर राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद गेंद बीजेपी के पाले में ही रहेगी और इन तीनों पार्टियों के पास विधायकों के टूटने का खतरा हमेशा बना रहेगा. विधायकों के टूटने के खतरे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिवसेना ने जहां अपने विधायकों को एक होटल में रखा है, वहीं कांग्रेस ने अपने विधायकों को जयपुर भेज दिया है. ऐसे में साफ है बीजेपी-शिवसेना की सरकार न बनने के बाद विधायक बचाने का सिर्फ एक ही रास्ता बचा था और वो है सरकार में शामिल होने का और तीनों राजनीतिक दल इसी रास्ते पर जाते दिख रहे हैं.



Loading...




ये भी पढ़ें- 



News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए Mumbai से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 11, 2019, 11:18 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...