महाराष्ट्र में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, 1 करोड़ परिवारों का अतरिक्त बिल भरेगी सरकार
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महाराष्ट्र में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, 1 करोड़ परिवारों का अतरिक्त बिल भरेगी सरकार
महाराष्ट्र में 1 करोड़ परिवारों का अतरिक्त बिजली बिल का भुगतान करेगी सरकार (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने कहा कि हर परिवार को 2019 में आए बिजली के बिल (Electricity Bill) के हिसाब से भुगतान करना होगा. इससे कोरोना काल में किसी का अधिक बिल आया होगा तो उसे ज्यादा रकम चुकाने से राहत मिल जाएगी.

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  • Last Updated: August 19, 2020, 4:19 PM IST
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मुंबई. कोरोना लॉकडाउन (Corona Lockdown) के दौरान बढ़े हुए बिजली के बिल (Electricity Bill) ने जहां आम आदमी की रात की नींद हराम कर दी, वहीं कई लोगों ने सदमे में अपनी जान गंवा दी. लेकिन अब बिजली बिल से परेशान उपभोक्ताओं के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बढ़ी राहत दी है. उद्धव ठाकरे सरकार (Uddhav Thackeray Government) ने राज्य में एक करोड़ से ज्यादा उपभोक्तओं के अतरिक्त बिजली बिल को भरने का फैसला किया है. सरकार का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान आए ज्यादा बिल की सरकार भरपाई करेगी और ऐसी शिकायतों का निपटारा किया जाएगा.

बता दें कि लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान सूबे में उपभोक्ताओं का बिजली बिल बहुत ज्यादा आया था. इसको लेकर पिछले महीने कुछ बड़े कारोबारियों और सिलेब्रिटीज ने भी शिकायत कि थी उनके बिजली का बिल दोगुना और तिगुना हो गया है. इसके बाद से ही राज्य सरकार बढ़े हुए बिजली बिलों से लोगों को राहत देने पर विचार कर रही थी. इसी के तहत सरकार ने यह फैसला लिया है. सरकार ने कहा कि हर परिवार को 2019 में आए बिल के हिसाब से भुगतान करना होगा. इससे कोरोना काल में किसी का अधिक बिल आया होगा तो उसे ज्यादा रकम चुकाने से राहत मिल जाएगी.

300 यूनिट तक सरकार 50% करेगी भुगतान



उद्धव सरकार ने कहा कि यदि अप्रैल, मई और जून के महीनों का बिल बीते साल की तुलना में 100 यूनिट तक ज्यादा आया है तो उसका भुगतान सरकारी खजाने से किया जाएगा. यदि उपभोक्ता का बिल 100 यूनिट से लेकर 300 यूनिट तक अधिक आया है तो सरकार अतिरिक्त बिल का 50 प्रतिशत हिस्सा वहन करेगी. इतना ही नहीं अगर किसी शख्स का बिल 300 यूनिट से ज्यादा आया है तो 25 फीसदी बिल का भुगतान सरकार करेगी.
सरकार पर आएगा 1000 करोड़ रुपये का बोझ

सूत्रों के मुताबिक, डिप्टी सीएम अजित पवार और ऊर्जा मंत्री नितिन राउत के बीच पिछले महीने हुई मीटिंग में इस पर सहमति बन गई थी. बताया जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से उसके खजाने पर 1,000 करोड़ रुपये का बोझ आएगा. दरअसल, लॉकडाउन के दौरान बिजली कंपनियां अपने कर्मचारियों को फिजिकल तौर पर बिल निकालने के लिए नहीं भेज पाई. ऐसे में ग्राहकों को प्रोवि़जनल बिल दिए गए थे, जिनमें बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है.
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