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वर्धा : PM को चिट्ठी लिखने पर हिंदी विश्वविद्यालय ने 6 छात्रों को किया निष्कासित

News18India
Updated: October 12, 2019, 10:38 AM IST
वर्धा : PM को चिट्ठी लिखने पर हिंदी विश्वविद्यालय ने 6 छात्रों को किया निष्कासित
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय,वर्धा का मेन गेट. (फाइल फोटो)

वर्धा (Wardha) स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV) उच्च स्तरीय शोध और पढ़ाई की बजाय विवादों के लिए जाना जाता है. फर्जी माइग्रेशन जारी करने के बाद कई नये विवाद विश्वविद्यालय (University) से पीछा नहीं छोड़ रहे हैं. इस बार विश्वविद्यालय ने छह छात्रों को निष्कासित(Expelled) किया है.

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  • Last Updated: October 12, 2019, 10:38 AM IST
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नई दिल्ली. महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV) पढ़ाई के लिए कम और विवादों के लिए ज्यादा जाना जाता है. इस विश्वविद्यालय की स्थापना जब से हुई है, यह विवादों में रहा है. कभी छात्रों को फर्जी माइग्रेशन (Fake migration) जारी करने के लिए तो कभी शोधार्थियों के निष्कासन के लिए.

इस बार महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में बीएसपी के संस्थापक कांशीराम (Kanshiram) के 13वें परिनिर्वाण दिवस मनाने और देश की समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखे जाने के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने छह शोधार्थियों को निष्कासित कर दिया है. विश्वविद्यालय ने बकायदा इसके लिए नोटिस जारी किया है, इसमें छात्रों के निष्कासन का कारण बताया गया है.

विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कहा
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हैं, जिसको लेकर आचार संहिता लागू है. ऐसे में इन छात्रों ने आचार संहिता का उल्लंघन किया और कैंपस के अंदर राजनीतिक धरना दिया. साथ ही न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया, जिस कारण विश्वविद्यालय से उन्हें निष्कासित किया जाता है. इसके बाद से विश्वविद्यालय परिषर में विभिन्न छात्र संगठन इसके विरोध में धरना दे रहे हैं. वर्धी से दिल्ली तक के बुद्धिजीवी छात्रों के समर्थम में उतर आये हैं और निष्कासन वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

Wardha University, expels six students, for violating code of conduct, NODPS, वर्धा विश्वविद्यालय ने, आचार संहिता उल्लंघन, का हवाला देकर, छह छात्रों को किया निष्काशित

पीड़ित छात्रों ने यह बात कही
छात्रों का आरोप है कि एससी-एसटी और ओबीसी के छात्रों को यहां जानबूझ कर निशाना बनाया जा रहा है और उनको पढ़ने नहीं दिया जा रहा. छात्रों का कहना है कि कैंपस के अंदर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को हर तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जाती है, लेकिन बहुजन छात्रों को कोई भी कार्यक्रम करने की विश्वविद्यालय प्रशासन अनुमति नहीं देता. इसके बाद अगर हम आवाज उठाते हैं तो हमारे साथ ऐसा जुल्म किया जाता है. कभी किसी की पीएचडी कैंसिल कर दी जाती है तो कभी छात्रों का निष्कासन कर दिया जाता है.
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First published: October 12, 2019, 8:51 AM IST
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