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महाराष्ट्र चुनाव 2019: कोंकण का किंग कौन? 21 अक्टूबर को तय करेगी यहां की जनता

महाराष्ट्र चुनाव 2019: कोंकण का किंग कौन? 21 अक्टूबर को तय करेगी यहां की जनता

साल 2005 में नारायण राणे को पार्टी से निकाल दिया गया. इसके बाद राणे ने कांग्रेस में प्रवेश कर अपने राजनीतिक सफर को आगे बढ़ाया. (फाइल फोटो)

साल 2005 में नारायण राणे को पार्टी से निकाल दिया गया. इसके बाद राणे ने कांग्रेस में प्रवेश कर अपने राजनीतिक सफर को आगे बढ़ाया. (फाइल फोटो)

नारायण राणे के मन में फिर एक बार महाराष्ट्र का सीएम बनने का सपना है. अपने इस अधूरे सपने को पूरा नहीं करने पर उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कह दिया था.

मुंबई. मुंबई (Mumbai) का किंग कौन? भीकू म्हात्रे... 1998 में आई फिल्म सत्या का यह डायलॉग याद होगा. कुछ इसी तरह इस बार के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election 2019) में सबकी नजर है कि कोंकण का किंग कौन? दो दिन बाद महाराष्ट्र में वोट डाले जाने हैं. शनिवार को चुनाव प्रचार का अंतिम दिन है. चंद दिन बाद यह फैसला हो जाएगा कि अगले पांच साल के लिए राज्य में किस पार्टी या गठबंधन की सरकार बनेगी. बीजेपी और शिवसेना ने गठबंधन कर कांग्रेस-एनसीपी की मुश्किलें जरूर बढ़ा दी हैं, पर सेना-बीजेपी युति (गठबंधन) में भी दरारें साफ देखी जा सकती हैं. इसका मुख्य कारण है महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए नेता नारायण राणे.

राणे का राजनीतिक सफर!
नारायण तातू राणे, महाराष्ट्र की राजनीति का एक ऐसा नाम जिसने फर्श से अर्श तक का सफर और उसके बाद एक अधूरा सपना दोनों को बहुत करीब से देखा है. चेंबूर की एक शिवसेना शाखा के शाखाप्रमुख, पार्षद, बेस्ट कमिटी के चेयरमैन, विधायक और उसके बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक का नारायण राणे का राजनीतिक सफर बहुत ही कम लोग पूरा कर पाते हैं, पर बाला साहेब ठाकरे की छत्रछाया में बड़े हुए राणे ने शिवसेना में रहते हुए यह सफर बखूबी निभाया. माना जाता है कि राणे बाला साहेब के सबसे निष्ठावान शिव सैनिक थे, जिन पर वो (बाला साहेब) आंख मूंदकर भरोसा करते थे.

राणे और शिवसेना में बढ़तीं दूरियां!
शिवसेना छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने के बाद राणे ने बाला साहेब ठाकरे और उनके बेटे उद्धव पर निशाना साधा. उन्होंने कहा था, जिस शिवसेना के लिए मैंने 39 साल दिए उस शिवसेना से बाला साहेब ने पुत्र प्रेम के चलते मुझे पार्टी से निकाल दिया. साथ ही मातोश्री (बाला साहेब का घर) को पैसे कमाने का जरिया होने तक का आरोप राणे ने ठाकरे परिवार पर लगाया था. राणे ने उद्धव पर भी वार करने का कोई मौका नहीं छोड़ा.

नारायण राणे और उद्धव ठाकरे अब आमने-सामने!
नारायण राणे द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद चुप रह जाए वो ठाकरे क्या? उद्धव ठाकरे ने भी राणे को शिवसेना छोड़ने के बाद से ही टारगेट करना शुरू कर दिया. यहां तक की शिवसेना ने 14 साल बाद भी राणे को माफ नहीं करने की बात अपने भाषणों में कह डाली. राणे ने फिर एक बार महाराष्ट्र का सीएम बनने के अपने अधूरे सपने को पूरा नहीं करने पर कांग्रेस को अलविदा कह दिया. राणे का कहना है कि कांग्रेस ने उन्हें पार्टी में आने के छह महीने के अंदर सीएम पोस्ट देने का वादा किया पर यह बस एक सपना ही बनकर रह गया. इसके बाद राणे ने अपनी अलग पार्टी बनाई और बीजेपी को समर्थन दिया. राणे बतौर सांसद राज्यसभा तक जा पहुंचे, पर राणे का मन अभी भी महाराष्ट्र की राजनीति में फंसा है.

2019 चुनाव राणे के अस्तित्व की लड़ाई!
बीजेपी के साथ गठबंधन कर शिवसेना ने विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया. बीजेपी और राणे के बीच का रोड़ा बनी, राणे के छोटे बेटे और अब बीजेपी उम्मीदवार के सामने उद्धव ने सतीश सावंत को टिकट देकर फिर एक बार राणे के पुराने जख्मों को फिर ताजा कर दिया है. उद्धव ठाकरे ने कणकवली जाकर शिवसेना उम्मीदवार के लिए प्रचार करते हुए राणे को मानवी राक्षस बता दिया. साथ ही बीजेपी को राणे को पार्टी में शामिल नहीं करने की सलाह दी.

आक्रामक राणे बैकफुट पर!
बढ़ती उम्र और मुश्किलों का सामना कर रहे नारायण राणे के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटों के राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए रखने को लेकर है. राणे परिवार के बीजेपी में शामिल होने के बाद नारायण राणे बैकफुट पर चले गए. जहां एक ओर छोटे बेटे नितेश ने आदित्य के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने की बात की तो वहीं बड़े भाई नीलेश ने ट्वीट कर इससे सहमत न होने की बात कर दी.

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Tags: BJP, Congress, Maharashtra Assembly Election 2019, Mumbai, Narayan Rane, Politics, Shiv sena, Uddhav thackeray

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