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आखिर शरद पवार ने भतीजे अजित को पार्टी से क्यों नहीं किया बाहर, पढ़ें इनसाइड स्टोरी

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Updated: November 24, 2019, 11:44 AM IST
आखिर शरद पवार ने भतीजे अजित को पार्टी से क्यों नहीं किया बाहर, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
आखिर शरद पवार ने अजित को पार्टी से क्यों नहीं किया बाहर. (फाइल फोटो)

कानून के जानकार ऐसा मानते हैं कि विधानसभा (Assembly) के बाहर किए गए किसी भी कृत्य के लिए किसी विधायक की सदस्यता जाना मुश्किल है.

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  • Last Updated: November 24, 2019, 11:44 AM IST
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नई दिल्ली. सब लोग हैरान हैं कि आखिर महाराष्ट्र (Maharashtra) में इतनी सियासी उठापटक के बाद भी शरद पवार ने अजित पवार को पार्टी से बाहर का रास्ता क्यों नहीं दिखाया. क्या अभी भी शरद पवार अपने भतीजे अजित पवार (Ajit Pawar) के मोह में हैं. अगर इसको देखें तो मामला समझ में आ जाएगा. दरअसल शरद पवार (Sharad Pawar)राजनीति के खिलाड़ी हैं. जिन को समझना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है. शरद पवार जानते हैं कि अगर अजित पवार को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा देंगे तो अजित आजाद हो जाएंगे और उन पर दल बदल कानून लागू नहीं होगा.

इसलिए आज शरद पवार ने मीडिया के लाख दबाव और पार्टी के नेताओं के दबाव के बाद भी अजित पवार को अपने साथ बना रखा है. दरअसल दलबदल नियम के अनुसार यदि कोई विधायक या सांसद पार्टी से निकाल देता है तो उसके ऊपर दलबदल विधायक कानून लागू नहीं होता. इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश में देखने को मिला था, जहां मुलायम सिंह यादव ने अमर सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया और अब वो स्वतंत्र रूप से राज्यसभा में हैं.

कोई भी मौका नहीं देना चाहते हैं
इसीलिए शरद पवार अजित पवार को इस तरह का कोई भी मौका नहीं देना चाहते. विधानसभा के गठन, नए विधानमंडल दल के नए नेता का चुनाव और बहुमत साबित होने या विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव होने तक अजित पवार को पार्टी से बाहर नहीं करेंगे. किसी भी विधानसभा सदस्य की सदस्यता जाने के लिए जरूरी है वह विधानसभा में पार्टी के खिलाफ मतदान करें. अभी तक अजित पवार ने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिसके हिसाब से उनके ऊपर दल बदल कानून लागू होता है.

पार्टी से निकाल दिया जाता
ऐसे में अजित पवार को पार्टी से निकाल दिया जाता है तो वो स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के लिए आजाद हो जाएंगे. राजनीति के माहिर खिलाड़ी शरद पवार ऐसा कभी होने नहीं देंगे कानून के जानकार ऐसा मानते हैं कि विधानसभा के बाहर किए गए किसी भी कृत्य के लिए किसी विधायक की सदस्यता जाना मुश्किल है. ऐसे में अभी तक अजित पवार ने ऐसा कोई काम नहीं किया है जो दलबदल विधेयक कानून के दायरे में आता है. अजित पवार की सदस्यता जाने के लिए यह जरूरी है कि विधान सभा की बैठक हो और वह विधानसभा में पार्टी के चुने गए विधानमंडल दल के नए नेता द्वारा जारी किए गए व्हीप का उल्लंघन करें.

अजित पवार ने भले ही उप मुख्यमंत्री के शपथ ले ली हो लेकिन उन्होंने राज्यपाल को अपनी पार्टी में टूटकर नया ग्रुप बनाने की कोई चिट्ठी नहीं दी. अजित पवार ने जो चिट्ठी राज्यपाल को दी है उसमें वो एनसीपी विधानमंडल दल के नेता है और विधायकों द्वारा हस्ताक्षर किए गए पेपर पर उन्होंने सरकार का समर्थन किया है. ऐसे में उनके ऊपर इन परिस्थितियों में जब तक कि विधानसभा का गठन न हो जाए और विधानसभा में पार्टी लाइन के खिलाफ न जाएं दल बदल कानून लागू नहीं होता.
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शरद पवार राजनीति के इस खेल को ठीक से समझते हैं
शरद पवार राजनीति के इस खेल को ठीक से समझते हैं. इसलिए जानते हैं कि वार किस समय और कहां करना है. शायद यही कारण है कि शरद पवार अभी तक अजित पवार के खिलाफ कुछ नहीं बोल रहे हैं. कुछ लोगों का मानना है कि शरद पवार अजित पवार की वापसी कर रहे हैं लेकिन शरद पवार को जानने वाले जानते हैं वो तुरुप का इक्का बचाकर खेलते हैं. उसका कब और कहां इस्तेमाल करेंगे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन जैसा है.

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First published: November 24, 2019, 11:44 AM IST
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