कहां हैं राज ठाकरे, क्या उद्धव के शपथ ग्रहण में शामिल होंगे मनसे प्रमुख?

उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) 28 नवंबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले लेंगे, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि राज ठाकरे (Raj Thackeray) शिवाजी पार्क में होने वाले शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल होंगे या नहीं.

उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) 28 नवंबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले लेंगे, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि राज ठाकरे (Raj Thackeray) शिवाजी पार्क में होने वाले शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल होंगे या नहीं.

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मुंबई. महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (Shiv Sena) के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे (Balasaheb Thackeray) का हमेशा से प्रभावशाली दखल रहा है. एक दौर था, जब कहा जाता था कि ठाकरे परिवार मुख्यमंत्री बनाता है, बनता नहीं है. महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब ठाकरे परिवार का कोई सदस्य महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनेगा, लेकिन शिवसेना के 'स्वर्णिम दौर' में उद्धव ठाकरे के चचेरे भाई राज ठाकरे को बाला साहेब ठाकरे का उत्तराधिकारी माना जाता था.

क्या राज ठाकरे अपने चचेरे भाई के मुख्यमंत्री बनने के गवाह बनेंगे?
उद्धव ठाकरे का सीएम बनना लगभग तय है, 28 नवंबर को वह मुख्यमंत्री पद की शपथ ले लेंगे, लेकिन अभी तक राज ठाकरे के बारे में कोई खबर नहीं है कि वह हैं कहां? क्या वह ठाकरे परिवार के सदस्य और अपने चचेरे भाई के मुख्यमंत्री बनने का गवाह बनेंगे? क्या वह शिवाजी पार्क में चचेरे भाई को शपथ-ग्रहण करते हुए देखना पसंद करेंगे? इन सारे सवालों का जवाब राज ठाकरे ही दे सकते हैं, लेकिन अभी तक उनकी ओर से इस बाबत कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. महाराष्ट्र के सियासी घटनाक्रम पर राजठाकरे ने पिछले 4-5 दिन में कोई ट्वीट नहीं किया है. हालांकि अन्य मामलों पर ट्वीट किए हैं.

राज ठाकरे का ट्विटर पेज


शिवसैनिक राज ठाकरे में देखते थे बाल ठाकरे का अक्स
बाल ठाकरे ने महाराष्ट्र के लोगों के अधिकारों के संघर्ष के लिए 19 जून 1966 को शिवसेना की स्थापना की थी. ठाकरे मूलत: कार्टूनिस्ट थे और राजनीतिक मुद्दों पर ज्वलंत और तीखे कटाक्ष करते थे. बाल ठाकरे ने आजीवन कोई चुनाव नहीं लड़ा. साथ ही जीवनभर कोई राजनीतिक पद भी स्वीकार नहीं किया. इसके बाद भी वह महाराष्ट्र की राजनीति में प्रभावशाली हस्तक्षेप करते थे. शिवसैनिकों और लोगों के मन में हमेशा से एक प्रश्न उठता था कि बाल ठाकरे के बाद उनका उत्तराधिकारी कौन होगा? शिवसैनिक और आम लोग राज ठाकरे में बाल ठाकरे का अक्स, उनकी भाषण शैली और तेवर देखते थे और उन्हें ही बाल ठाकरे का स्वाभाविक दावेदार मानते थे, जबकि उद्धव ठाकरे राजनीति में बहुत दिलचस्पी नहीं लेते थे. वह फोटोग्राफी के शौकीन रहे हैं. राज ठाकरे अपने चाचा बाल ठाकरे की तरह अपनी बेबाक बयानबाजी को लेकर हमेशा चर्चाओं में रहे.

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के रास्ते 2006 से अलग हैं.


2004 में उद्धव ठाकरे को बनाया गया अध्यक्ष, राज ने छोड़ा मातोश्री
स्वभाव से दबंग, फायर ब्रांड नेता राज ठाकरे की शिवसैनिकों के बीच लोकप्रियता बढ़ती जा रही थी. बाल ठाकरे को बेटे और भतीजे में से किसी एक को चुनना था. उन्होंने अपने बेटे उद्धव ठाकरे को 2003 में शिवसेना का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया. एक साल बाद 2004 में उन्हें शिवसेना अध्यक्ष घोषित कर दिया गया.

राज ठाकरे ने मार्च 2006 में किया महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन
इसके बाद राज ठाकरे की शक्ति को कम करने के लिए चुनाव में बाल ठाकरे ने उनके प्रत्याशियों को टिकट नहीं दिया. 2006 में दोनों भाइयों का मनमुटाव तब मातोश्री से बाहर आ गया, जब राज ठाकरे ने अलग रहने का फैसला किया और मार्च 2006 में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नाम से एक अलग पार्टी भी बना ली.

 

राज ठाकरे की पार्टी मनसे का राजनीतिक सफर
2009 के विधानसभा चुनाव में मनसे ने महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से 19 सीटें जीती थीं. यह मनसे का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में मनसे ने 9 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन उसे एक भी सीट नहीं मिली. 2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मनसे ने 250 सीटों पर उम्मीदवार उतारे लेकिन एक ही सीट जीत पाए. राज ठाकरे की पार्टी ने EVM मुद्दे पर 2019 के आम चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है.

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