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महाराष्ट्र में सियासी भूचालः प्रोटेम स्पीकर के लिए सामने आए 17 नाम, यहां देखें पूरी लिस्ट

Abhishek Pandey | News18Hindi
Updated: November 26, 2019, 11:59 AM IST
महाराष्ट्र में सियासी भूचालः प्रोटेम स्पीकर के लिए सामने आए 17 नाम, यहां देखें पूरी लिस्ट
कोर्ट ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस सरकार को 27 नवंबर को ओपन बैलेट से फ्लोर टेस्ट देना होगा. इसकी वीडियोग्राफी भी होगी. फ्लोर टेस्ट प्रोटेम स्पीकर की देखरेख में ही होगा. (महाराष्ट्र विधानसभा का फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेशानुसार, महाराष्ट्र विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर बुधवार शाम 5 बजे तक विधायकों को शपथ दिलवाएंगे. इसके बाद उनकी अध्यक्षता में फ्लोर टेस्ट (Floor Test) होगा. इस पूरे कार्यक्रम की वीडियोग्राफी भी की जाएगी.

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  • Last Updated: November 26, 2019, 11:59 AM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में सियासी भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एनसीपी-कांग्रेस और शिवसेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार तक महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट करवाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस सरकार को 27 नवंबर को ओपन बैलेट से फ्लोर टेस्ट देना होगा. इसकी वीडियोग्राफी भी होगी. फ्लोर टेस्ट प्रोटेम स्पीकर (Protem Speaker) की देखरेख में ही होगा. अब ऐसे में 17 संभावित प्रोटेम स्पीकरों के नाम सचिवालय की तरफ से भेजे गए हैं.

सचिवालय की तरफ से भेजे गए नाम-

  1. हरिभाऊ बागडे


  2. बालासाहेब थोरात

  3. दिलीप वलसे पाटील

  4. बबनराव पाचपुते

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  6. जयंत पाटील

  7. छगन भुजबल

  8. राधाकृष्ण विखे पाटील

  9. के सी पाडवी

  10. कालिदास कोलंबकर

  11. सुधीर मुनगंटीवार

  12. विजय कुमार गावित

  13. गिरीष महाजन

  14. गोवर्धन शर्मा

  15. हितेंद्र ठाकूर

  16. प्रकाश भारसाखले

  17. मंगलप्रभात लोढा

  18. बबनराव शिंदे


प्रोटेम स्पीकर ही दिलवाएंगे शपथ
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बुधवार शाम 5 बजे तक महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट के साथ ही विधायकों को शपथ भी दिलवानी होगी. इस दौरान विधायकों को प्रोटेम स्पीकर ही शपथ दिलवाएंगे. इस पूरे कार्यक्रम की वीडियोग्राफी भी की जाएगी.

प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति क्यों?
प्रोटेम स्पीकर, चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के चुने जाने तक सदन का कामगाज स्पीकर के तौर पर चलाता है यानि सदन का संचालन करता है. सीधे कहें तो यह कामचलाऊ और अस्थायी स्पीकर होता है. बेहद कम वक्त के लिए इन्हें चुना जाता है. अभी तक ज्यादातर मामलों में परंपरा रही है कि सदन के वरिष्ठतम सदस्यों में से किसी को यह जिम्मेदारी दी जाती है. प्रोटेम स्पीकर तभी तक अपने पद पर रहते हैं जब तक स्थायी अध्यक्ष का चयन न हो जाए.

जब सदन में नहीं हों अध्यक्ष-उपाध्यक्ष
हालांकि केवल चुनावों के बाद ही प्रोटेम स्पीकर की जरूरत नहीं होती बल्कि उस हर परिस्थिति में प्रोटेम स्पीकर की जरूरत पड़ती है जब सदन में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद एक साथ खाली हो. यह उनकी मृत्यु की स्थिति के अलावा दोनों के साथ इस्तीफा देने की परिस्थितियों में हो सकता है.

क्या होती हैं शक्तियां?
संविधान में प्रोटेम स्पीकर की शक्तियों का जिक्र नहीं किया गया है. प्रोटेम शब्द की बात करें तो यह लैटिन शब्द प्रो टैम्पोर का संक्षिप्त रूप है. जिसका मतलब होता है- कुछ समय के लिए.


 

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First published: November 26, 2019, 11:09 AM IST
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