राज्यपाल कोश्यारी की भाषा पर शरद पवार को आपत्ति, PM मोदी को चिट्ठी लिख जताया दुख

शरद पवार ने राज्यपाल की भाषा पर आपत्ति जताते हुए पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है
शरद पवार ने राज्यपाल की भाषा पर आपत्ति जताते हुए पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है

Sharad Pawar Letter to PM Modi: राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Governor Bhagat Singh Koshiyari) ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) से कहा था, ‘‘क्या आप अचानक धर्मनिरपेक्ष हो गए हैं? जिस शब्द से आप हमेशा नफरत करते थे.’’

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 13, 2020, 8:10 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में धार्मिक स्थलों (Religious Places) को खोले जाने को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) को लिखे गए राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Governor Bhagat Singh Koshiyari) के पत्र की भाषा पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार (NCP Chief Sharad Pawar) ने आपत्ति जताई है और इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को चिट्ठी भी लिखी है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party) के सुप्रीमो शरद पवार ने अपने पत्र में लिखा है कि "संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की भाषा और लहजा उनके कद के अनुरूप होना चाहिए. पवार ने ठाकरे का समर्थन करते हुए कहा कि घटनाओं को देखते हुए, मुख्यमंत्री के पास मीडिया में अपना जवाब जारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था.

राज्यपाल कोश्यारी ने अपने पत्र में कहा था कि उनसे तीन प्रतिनिधिमंडलों ने धार्मिक स्थलों को पुन: खोले जाने की मांग की है. मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में राज्यपाल ने कहा था, ‘‘क्या आप अचानक धर्मनिरपेक्ष हो गए हैं? जिस शब्द से आप हमेशा नफरत करते थे.’’ शरद पवार ने अपने पत्र में लिखा कि "मैं यहां ये बताना चाहूंगा कि मैं इस बात से सहमत हूं कि माननीय राज्यपाल के इस विषय पर अपने स्वतंत्र विचार और राय हो सकती है. मैं इस बात की भी प्रशंसा करता हूं कि राज्यपाल के पास विशेषाधिकार हैं कि वह मुख्यमंत्री के सामने अपने विचार व्यक्त कर सकें. हालांकि मैं मीडिया में जारी हुए राज्यपाल को पत्र और उसमें इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर हैरान और आश्चर्यचकित हूं."


शरद पवार ने राज्यपाल के पत्र की बातें और उस पर उद्धव ठाकरे के जवाब को लिखते हुए कहा कि-



मुझे यकीन है कि आपने भी देखा होगा कि किस तरह की अनर्गल भाषा का इस्तेमाल किया गया है. संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष शब्द सभी धर्मों को समान मानने और उसकी रक्षा करने वालों के लिए जोड़ा गया है और ऐसे में मुख्यमंत्री का काम को संविधान के सिद्धांत को कायम रखने का है. दुर्भाग्य की बात है कि राज्यपाल के पत्र से ऐसा मालूम होता है कि वह किसी पार्टी के नेता के लिए लिखा गया है. मुझे निश्चित तौर पर ये लगता है कि किसी भी लोकतंत्र में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच विचारों का आदान-प्रदान आवश्यक है. हालांकि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की भाषा और लहजा उनके कद के अनुरूप होना चाहिए. घटनाओं को देखते हुए, मुख्यमंत्री के पास मीडिया में अपना जवाब जारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था. मैं मुद्दे पर सीएम के फैसले का समर्थन करता हूं.


पवार ने अंत में लिखा कि इस मुद्दे पर न तो मैंने राज्यपाल से बात की है न ही मुख्यमंत्री से, हालांकि मुझे लगा कि राज्यपाल के सर्वोच्च संवैधानिक कार्यालय द्वारा आचरण के मानकों के क्षरण पर अपना दर्द आपसे और जनता से साझा करना चाहिए.

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ठाकरे ने राज्यपाल से किया था ये सवाल
कोश्यारी के धर्मनिरपेक्षता को लेकर किए गए कटाक्ष के जवाब में ठाकरे ने सवाल किया था कि क्या कोश्यारी के लिए हिंदुत्व का मतलब केवल धार्मिक स्थलों को पुन: खोलने से है और क्या उन्हें नहीं खोलने का मतलब धर्मनिरपेक्ष होना है.

ठाकरे ने कहा, ‘‘क्या धर्मनिरपेक्षता संविधान का अहम हिस्सा नहीं है, जिसके नाम पर आपने राज्यपाल बनते समय शपथ ग्रहण की थी.’’
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