NIA का दावा- सचिन वाजे ने पहचान छिपाने के लिए कुर्ता, रुमाल और बडे़ मास्क का किया इस्तेमाल

पुलिस अधिकारी सचिन वाजे

पुलिस अधिकारी सचिन वाजे

रिलायंस इंडस्‍ट्रीज (RIL) के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के आवास के पास से विस्फोटक लदे वाहन (एसयूवी) की बरामदगी मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार पुलिस अधिकारी सचिन वाजे (Sachin Waje) के दफ्तर की तलाशी ली.

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  • Last Updated: March 17, 2021, 10:40 AM IST
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मुंबई.  रिलायंस इंडस्‍ट्रीज (RIL) के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के आवास के पास से विस्फोटक लदे वाहन (एसयूवी) की बरामदगी मामले की जांच में अहम खुलासा हुआ है. इस केस की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार पुलिस अधिकारी सचिन वाजे (Sachin Waje) के दफ्तर की तलाशी ली. पुलिस के एक अधिकारी ने मंगलवार को इस आशय की जानकारी दी. इस मामले में 13 मार्च को गिरफ्तार किए गए पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को शहर पुलिस की अपराध शाखा के सीआईयू से संबंद्ध कर दिया गया था. शाखा का दफ्तर दक्षिण मुंबई में पुलिस आयुक्त कार्यालय के परिसर में स्थित है.

समाचार एजेंसी NIA ने दावा किया है कि सचिन वाजे ने घटना की जांच वाले दिन पीपीई किट नहीं पहनी थी. वह सफेद कुर्ते में थे. सीसीटीवी फुटेज की जांच पड़ताल में पता चला कि वाजे ने पीपीई किट नहीं पहनी थी. जांच में पता चला कि वाजे ने ढीला फुल स्लीव वाला कुर्ता-पायजमा पहने हुए थे. सीसीटीवी से बचने के लिए वाजे ने सिर को बड़े रुमाल से ढक रखा था. ताकि कोई अंदाजा ना लग सके. वाजे ने चेहरा छिपाने के लिए मुंह पर बड़ा मास्क लगाया था ताकि आंख के अलावा बाकी चेहरा छिपा रहे.

अधिकारी ने बताया कि एनआईए की टीम ने वाजे के दफ्तर की तलाशी के दौरान वहां से कुछ ‘आपत्तिजनक दस्तावेज’ और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जैसे लैपटॉप, आई-पैड और मोबाइल फोन बरामद किए हैं. उन्होंने कहा कि तलाशी सोमवार शाम करीब आठ बजे शुरू हुई और मंगलवार सुबह चार बजे तक चलती रही. अधिकारी ने बताया कि एनआईए ने अभी तक सहायक पुलिस आयुक्त सहित अपराध शाखा के सात अधिकारियों के बयान दर्ज किए हैं. उन्होंने बताया कि एजेंसी ने आज लगातार तीसरे दिन सीआईयू इकाई के सहायक पुलिस निरीक्षक रियाजुद्दीन काजी से पूछताछ की.



फुटेज साक्ष्य को नष्ट करने के लिए लिया गया!
गौरतलब है कि अंबानी के मकान के पास कार्मिचेल रोड पर विस्फोटक लदी एसयूवी बरामद होने के दो दिन बाद 27 फरवरी को काजी ने ठाणे जिले के साकेत इलाके में रहने वाले वाजे की हाउसिंग सोसायटी के सीसीटीवी की फुटेज ली थी. अधिकारी ने बताया कि इस वीडियो (डीवीआर) का जिक्र बरामद सामान की सूची में नहीं था और जांच एजेंसी को संदेह है कि यह फुटेज साक्ष्य को नष्ट करने के लिए लिया गया था जिससे वाजे मामले में फंस सकते थे.

व्यावसायी मनसुख हिरेन की पत्नी का आरोप है कि एसयूवी का कुछ समय तक वाजे ने इस्तेमाल किया था. वहीं हिरेन ने दावा किया था कि स्कॉर्पियो उनके पास से चोरी हुई थी. हिरेन की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई है. पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि काजी ने कथित रूप से फर्जी नंबर प्लेट खरीदी थी, जो एसयूवी से मिली.

अदालत ने गिरफ्तारी के खिलाफ अर्जी खारिज की
रविवार को एक विशेष अदालत ने वाजे को 25 मार्च तक केन्द्रीय एजेंसी की हिरासत में भेज दिया था. मंगलवार को अदालत ने गिरफ्तारी को अवैध बताने वाली वाजे की अर्जी खारिज कर दी. वाजे के वकीलों सजल यादव और सनी पुनमिया ने दलील दी कि नियमानुसार वाजे को गिरफ्तारी के 24 घंटों के भीतर अदालत में पेश नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि सीआरपीसी की धारा 45(1) के तहत राज्य सरकार से कोई अनुमति नहीं ली गई. धारा 45(1) के तहत अगर किसी सरकारी अधिकारी को उसके ड्यूटी के तहत किए गए कार्य के लिए गिरफ्तार करना हो तो सरकार की मंजूरी लेनी होती है.

विशेष लोक अभियोजक सुनील गोंसाल्वेस ने आरोपों का खंडन किया. उन्होंने कहा कि वाजे को शनिवार की रात 11 बजकर 50 मिनट पर गिरफ्तार किया गया और अगले दिन दोपहर 2:45 पर अदालत में पेश किया गया. अभियोजक ने दावा किया कि वाजे को जांच से जुड़े स्पष्टीकरण के लिए सुबह बुलाया गया था लेकिन वह देर रात आये. वहीं वाजे के वकीलों ने आरोप लगाया कि उन्हें शनिवार की सुबह 11 बजे गिरफ्तार किया गया.

एनआईए के वकील ने बताया कि सरकार से अनुमति की जरुरत नहीं थी क्योंकि वाजे ने अपनी आधिकारिक ड्यूटी के तहत यह काम नहीं किया था. न्यायाधीश पी. आर. सित्रे ने वाजे की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी होने के नाते उन्हें अपने अधिकार पता थे. (भाषा इनपुट के साथ)
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