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बाघिन अवनी को बेहोश कर पकड़ने की कोशिश ही नहीं हुई, वन्य जीव प्रेमी जाएंगे सुप्रीम कोर्ट

बाघिन अवनी को बेहोश कर पकड़ने की कोशिश ही नहीं हुई, वन्य जीव प्रेमी जाएंगे सुप्रीम कोर्ट

अपने बच्चों के साथ अवनी, फाइल फोटो

अपने बच्चों के साथ अवनी, फाइल फोटो

अवनी के बच्चों के पंजों के निशान देखे गए, गोली मारने के विरोध में दुनिया भर की 168 संस्थाओं का कैडिल मार्च रविवार को

    (प्रवीण मुधोलकर)
    महाराष्ट्र में नरभक्षी बता कर मारी गई अवनी नाम के बाघिन का मामला तूल पकड़ता दिख रहा है. अवनी को मारे जाने के विरोध में दुनिया भर की 168 संस्थाओं ने रविवार को कैंडल मार्च निकलन कर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है. अवनी को 3 नवंबर को गोली मार दी गई थी.

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    बताया गया था कि यवतमाल के रालेगांव इलाके में टी-1 के तौर पर पहचानी जाने वाली इस बाघिन ने 13 लोगों को अपना शिकार बना लिया है. वन्यजीव प्रेमी इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने का मन बना चुके हैं. उनका दावा है कि इसमें सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों की अनदेखी की गई है.

    अवनी के मारे जाने को लेकर केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी महाराष्ट्र सरकार पर तीखे हमले किए हैं. बाघिन की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट न्यूज 18 के पास है और उसमें भी संकेत किया गया है कि बाघिन को बचाने के प्रयास नहीं किए गए, बल्कि उसे गोली मारी गई.

    मारी गई बाघिन के बच्चे फाइल फोटो


    दरअसल, इस बाघिन को मारने के आदेश राज्य के मुख्य प्रधान वन संरक्षक ए के मिश्रा ने दिए थे. वन्य जीव संरक्षकों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि मारने के आदेश होने के बाद भी किसी बाघिन को मारा नहीं जाना चाहिए. बल्कि उसे बेहोश करके पकड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए और अगर वो बेहोश करने वाली टीम पर हमला कर रही हो तो उसे गोली मारा जा सकता है.

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    अवनी के मामले में ये सब किया ही नहीं गया. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक बाघिन को गोली पीछे के हिस्से में लगी है. अगर उसने पकड़ने गई टीम पर हमले का प्रयास किया होता तो उसे आगे के हिस्से में गोली लगनी चाहिए थी. इसके अलावा उसके शरीर से बेहोश करने का जो डॉट मिला है वो भी शरीर में बहुत हल्का सा ही लगा है, जो ठीक से अंदर तक नहीं गया है.

    बाघिन की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट


    इन तथ्यों को आधार बना कर वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी संस्थाएं अवनी को मारे जाने के मामलों को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की तैयारी में हैं. फिलहाल 11 नवंबर को इन संस्थाओं ने कैंडल मार्च और प्रदर्शन करने की घोषणा की है. इसमें विश्व भर की 168 संस्थाओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

    Tags: Forest department, Maharashtra, Supreme Court

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