मजदूरों की घर वापसी से कई राज्य चिंतित, लेकिन पवार के पोते खुश, बोले-मराठी युवा उठाएं फायदा
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मजदूरों की घर वापसी से कई राज्य चिंतित, लेकिन पवार के पोते खुश, बोले-मराठी युवा उठाएं फायदा
शरद पवार के साथ रोहित पवार

महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra) ने प्रवासी मजदूरों को वापस भेजने और लॉकडाउन में फंसे छात्रों को वापस लाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे.

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मुंबई. देश भर में लागू लॉकडाउन (Lockdown) के बीच प्रवासी मजूदर अपने-अपने घरों को लौट रहे हैं. वे जिस राज्य में फंसे हुए हैं वहां की राज्य सरकार उनके लिए ट्रेनों का इंतजाम कर रही हैं. माना जा रहा है कि देश में सबसे ज्यादा प्रवासियों का मूवमेंट महाराष्ट्र से हुआ है. इस बीच राज्य की गठबंधन सरकार में शामिल नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया शरद पवार (Sharad Pawar) के पोते रोहित पवार (Rohit Pawar) ने ऐसा ट्वीट किया है जिस पर विवाद मच सकता है. बुधवार को एक ट्वीट में रोहित ने लिखा- 'लॉक डाउन में थोड़ा ढील देने के बाद पर प्रवासी वापस जा रहे हैं जिससे उद्योग धंधे बंद पड़ सकते हैं, इसलिए मराठी युवाओं को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए.'

बता दें गृह मंत्रालय ने कहा था कि फंसे हुए प्रवासी कामगारों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों को लॉकडाउन के दौरान शर्तों के साथ जाने की अनुमति दी जाएगी. केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि देशभर में लागू लॉकडाउन (बंद) के कारण कोविड-19 को काबू करने में ‘काफी सफलता’ मिली है, इसलिए चार मई से कई जिलों में ‘पर्याप्त ढील’ दी जाएगी.

इससे पहले, राष्ट्रव्यापी बंद के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए लाखों प्रवासी मजदूरों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य लोगों को बुधवार को कुछ शर्तों के साथ उनके गंतव्यों तक जाने की अनुमति दे दी गयी, जिससे एक बड़े वर्ग को राहत मिल सकती है. केंद्र ने यह स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि देशभर में जारी बंद की अवधि तो 17 मई तक चलेगी, लेकिन ‘कई जिलों’ में सेवाओं और लोगों को ‘पर्याप्त ढील’ दी जाएगी.





उद्धव सरकार ने जारी किये थे दिशानिर्देश
जिसके बाद महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra) ने प्रवासी मजदूरों को वापस भेजने और लॉकडाउन में फंसे छात्रों को वापस लाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार ने विभिन्न जिलों के प्रशासन के साथ समन्वय करने और लोगों के दूसरे राज्यों में लोगों को भेजने के लिए प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए थे.

उद्धव सरकार के दिशानिर्देशों में कहा गया था, 'जिन लोगों को भेजा जाना है, उनकी जांच की जाएगी. उन व्यक्तियों को जिनमें फ्लू जैसे कोई लक्षण नहीं दिखते हैं, उन्हें सरकारी पत्र के साथ वापस भेजा जाएगा कि वे स्वस्थ हैं. वहीं किसी लक्षण के पाये जाने पर उन्हें राज्य में ही रखा जाएगा.' नियमों में कहा गया था कि 'तय प्रारूप' में दूसरे राज्य से मंजूरी भी जरूरी है. इन लोगों को ले जाने वाली बसों को ट्रांजिट पास जारी किया जाएगा.

गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद भारतीय रेलवे ने विशेष श्रमिक ट्रेनें चलाईं. अब तक 67 ट्रेनें चल चुकी हैं जिनमें करीब 67 हजार श्रमिक यात्रा कर चुके हैं. रेलवे के अनुसार चार मई तक 55 ट्रेनें चलाई जा चुकी थीं.

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