अपना शहर चुनें

States

महाराष्ट्र-तमिलनाडु सरकार को संसदीय पैनल की फटकार, पूछा- महिला सुरक्षा में क्यों हुए नाकाम

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की फाइल फोटो.
कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की फाइल फोटो.

'पैनल ने जानना चाहा कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तय में से अब तक थोड़ी रकम ही उपयोग क्यों की गई है.' रिपोर्ट के मुताबिक, जानकार बताते हैं कि महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) राज्य में महिलाओं के गुमशुदा होने के बढ़ते मामलों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 18, 2020, 11:38 AM IST
  • Share this:
मुंबई. गृहमंत्रालय पर बनी संसदीय पैनल (Parliamentary panel) इन दिनों महिला सुरक्षा के मामले में महाराष्ट्र (Maharashtra Government) और तमिलानाडु सरकार (Tamilnadu Government) से नाराज नजर आ रही है. गुरुवार को पैनल ने दोनों राज्यों की सरकारों के खिलाफ काफी सख्त रुख दिखाया है. वहीं, पैनल ने सरकारों से महिला सुरक्षा (Women Safety) को लेकर फंड से जुड़े मुद्दे पर भी बात की. खास बात है कि कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली यह पैनलशुक्रवार को कोविड-19 महामारी की तैयारियों पर चर्चा करेगी.

अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को दोनों राज्यों की सरकारों से सवाल किए गए कि क्यों महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अत्याचार के मामले कम नहीं हुए हैं. मामले से जुड़े जानकार बताते हैं 'पैनल ने यह भी जानना चाहा कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तय में से अब तक थोड़ी रकम ही उपयोग क्यों की गई है.' रिपोर्ट के मुताबिक, जानकार बताते हैं कि महाराष्ट्र सरकार राज्य में महिलाओं के गुमशुदा होने के बढ़ते मामलों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकी.

यह भी पढ़ें: ड्राई स्‍टेट बिहार के पुरुष छक कर पीते हैं शराब, महाराष्‍ट्र को भी छोड़ा पीछे- रिपोर्ट



जानकारों ने बताया कि यह सवाल बीजेपी सांसद राकेश सिन्हा की तरफ से उठाया गया था. रिपोर्ट बताती है 'सिन्हा ने सवाल किया क्यों महिलाओं के गुमशुदा होने के मामले 2016 में 27316 से बढ़कर 2017 में 33964 हो गए थे. यह दिखाता है कि पुलिस महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रही है. ये गायब महिलाएं कई बार विदेशों में मानव तस्करी के जरिए भेजी जाती हैं. इस प्रकोप को रोकना होगा.'

जानकारों के अनुसार, पैनल ने कहा कि तमिलनाडु में गैरकानूनी तरीके से करीब 1 लाख सेक्स वर्कर काम कर रही हैं. वहीं, अकेले चेन्नई में यह आंकड़ा 14 हजार है. पैनलने सवाल किया 'इसे लेकर अब तक कोई फैसला क्यों नहीं लिया गया है.' खास बात है कि कोरोना वायरस महामारी आने के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर सामने आने लगी हैं. देश में महामारी के दौरान घरेलू हिंसा के मामले बढ़े हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज