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लड़की से सिर्फ दोस्ती को लड़के के लिए शारीरिक संबंध की सहमति मानना गलत: बॉम्बे हाईकोर्ट

बंबई उच्च न्यायालय. (फाइल फोटो)

बंबई उच्च न्यायालय. (फाइल फोटो)

Bombay High Court: आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (2) (एन) (एक ही महिला से बार-बार बलात्कार) और 376 (2) (एच) (गर्भवती होने वाली महिला से बलात्कार) के साथ ही धोखाधड़ी के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी.

मुंबई. बंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि कोई लड़की किसी लड़के से दोस्ताना व्यवहार कर रही है, महज इसे यौन संबंध बनाने की लड़की की सहमति नहीं माना जा सकता. अदालत ने शादी का झांसा देकर एक महिला से संबंध बनाने के आरोपी व्यक्ति की गिरफ्तारी पूर्व जमानत याचिका खारिज कर दी. न्यायमूर्ति भारती डांगरे की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने 24 जून को पारित आदेश में यह बात कही. उन्होंने शादी का झांसा देकर एक महिला से दुष्कर्म करने के आरोपी शहर निवासी आशीष चकोर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी.

न्यायमूर्ति डांगरे ने कहा, “किसी लड़की के साथ महज दोस्ताना रिश्ता होने से किसी लड़के को उसे हल्के में लेने की और इसे उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की सहमति मानने की अनुमति नहीं मिल जाती.” आरोपी व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (2) (एन) (एक ही महिला से बार-बार बलात्कार) और 376 (2) (एच) (गर्भवती होने वाली महिला से बलात्कार) के साथ ही धोखाधड़ी के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी.

शिकायतकर्ता एक 22 वर्षीय महिला थी, जो आरोपी व्यक्ति से ज्यादा परिचित नहीं थी. 2019 में, महिला ने आरोप लगाया कि जब वह और एक दोस्त तीसरे दोस्त के घर गए, तो आरोपी ने कथित तौर पर “उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाया” और जब उसने विरोध किया तो व्यक्ति ने कहा कि वह उसे पसंद करता है और किसी भी सूरत में “वह उससे शादी करेगा”. इसके बाद शादी का भरोसा देकर आरोपी ने बार-बार महिला से शारीरिक संबंध बनाए. हालांकि आरोपी चकोर ने यह दलील देते हुए गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग की थी कि महिला ने सहमति से संबंध बनाये थे.

‘महिला ने शादी के वादे पर दी यौन संबंध की अनुमति’
लेकिन जब एक दिन महिला ने उसे बताया कि वह छह सप्ताह की गर्भवती है, तो आरोपी ने कोई भी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया और उस पर बेवफाई का आरोप लगाया. हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज किया गया कि महिला ने कथित तौर पर आरोपी व्यक्ति से शादी के लिए बार-बार अनुरोध किया, लेकिन उसने इनकार कर दिया. मई 2019 और 27 अप्रैल, 2022 के बीच की हरकतों का जिक्र करते हुए, जब महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने जबरन संभोग किया था… प्राथमिकी दर्ज की गई थी. हाईकोर्ट ने कहा कि महिला ने अपने बयान में कहा है कि उसने शादी के वादे पर यौन संबंध की अनुमति दी थी.

“हर महिला रिश्ते में ‘सम्मान’ की उम्मीद करती है”
न्यायमूर्ति डांगरे ने कहा, “जब एक पुरुष और महिला एक साथ काम कर रहे होते हैं, तो यह बहुत संभव है कि उनके बीच नजदीकियां विकसित हो, या तो मानसिक रूप से या एक-दूसरे के लिए दोस्त के रूप में विश्वास के तौर पर, वो भी लिंग की अनदेखी करते हुए क्योंकि दोस्ती लिंग-आधारित नहीं है. हालांकि, व्यक्ति के साथ महिला की दोस्ती, किसी पुरुष को उस पर खुद को मजबूर करने का लाइसेंस प्रदान नहीं करती है, जब वह विशेष रूप से संभोग से इनकार करती है.” हाईकोर्ट ने कहा, “हर महिला रिश्ते में ‘सम्मान’ की उम्मीद करती है, चाहे वह आपसी प्यार पर आधारित दोस्ती की शक्ल में क्यों ना हो.”

हाईकोर्ट ने खारिज की आरोपी व्यक्ति की याचिका
यह नोट किया गया, “जो आवेदक है, उस पर शादी के बहाने यौन संबंध बनाए रखने का आरोप है, लेकिन जब शिकायतकर्ता ने गर्भ धारण किया, तो उसने आरोप लगाया कि महिला की गर्भावस्था अन्य व्यक्तियों के साथ संबंधों के कारण है.” इसके बाद हाईकोर्ट ने व्यक्ति की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि चकोर के खिलाफ आरोपों की पुलिस द्वारा और पड़ताल की जरूरत है और पता लगाना होगा कि क्या महिला को संबंध बनाने के लिए सहमति देने को बाध्य किया गया.

(इनपुट भाषा से भी)

Tags: Bombay high court

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