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BMC चुनाव: क्या भाई जगताप के नेतृत्व में मुंबई में खोया हुआ सुनहरा दौर पा सकेगी कांग्रेस?

भाई जगताप की फाइल फोटो
भाई जगताप की फाइल फोटो

कांग्रेस (Congress) ने आखिरी बार 1992 से लेकर 1997 के बीच बीएमसी (BMC) को संभाला था. अब बीएमसी में इसके केवल 31 कॉर्पोरेटर्स हैं. खास बात है कि कांग्रेस की गिरावट बीजेपी की बढ़त के साथ-साथ हुई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 24, 2020, 12:04 PM IST
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(धवल कुलकर्णी)

मुंबई. साल 2022 की शुरुआत में देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई में ब्रह्म मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन यानी बीएमसी के चुनाव हो सकते हैं. इस चुनाव के जरिए कांग्रेस मुंबई में खुद को फिर से तैयार करने की कोशिश में है. कांग्रेस ने इसकी जिम्मेदारी मुंबई रीजनल कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष अशोक उर्फ भाई जगताप (Bhai Jagtap) को सौंपी है. हालांकि, कांग्रेस के कुछ असंतुष्ट नेताओं के मन में सवाल है कि कांग्रेस ने क्यों इस पद के लिए किसी हिंदी भाषी उत्तर भारतीय, मुस्लिम या दलित को नहीं चुना.

पहले मुंबई कांग्रेस की कमान पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा के हाथ में थी, लेकिन उनके पद छोड़ने के बाद यह जिम्मेदारी लोकसभा सांसद एकनाथ गायकवाड़ ने उठाई. इसके बाद इस पद पर अब जगताप हैं. कांग्रेस ने उत्तर भारतीयों के बीच अपना अधिकांश जनाधार खो दिया है. यहां मराठाओं को मजबूती से शिवसेना के साथ खड़ा देखा जाता है. वहीं, ऊंची जाति और वर्ग के लोग भारतीय जनता पार्टी का समर्थन करते हैं. इसके अलावा गुजराती, मारवाड़ी और जैन जैसे व्यापारी वर्ग को बीजेपी के प्रमुख वोटर की तरह देखा जाता है.



यहां शिवसेना बनाम बीजेपी (BJP) की लड़ाई में भाषाई पहचान और प्रतिष्ठा के मुद्दे पर ध्रुवीकरण हो जाता है, जिससे मुकाबला मराठी बनाम गैर मराठी बन जाता है. खास बात है कि इससे कांग्रेस और दूसरी पार्टियां खासी प्रभावित होती हैं. इन हालात में कांग्रेस के पास मुस्लिम और दलित समुदाय का अच्छा समर्थन होता है. हालांकि, समाजवादी पार्टी और ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM की मौजूदगी का मतलब है कि कुछ वोटर्स अपना पाला बदल सकते हैं. कभी एसके पाटिल, रजनी पटेल, मुरली देवड़ा और गुरुदास कामत जैसे वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में काम करने वाली मुंबई कांग्रेस ने कई बुरे दौर देखे. 2019 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 36 सीटों में से 4 सीटें ही मिल सकीं.
गौरतलब है कि 2019 में जगताप कोलाबा से एमएलसी पद के लिए लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बीजेपी के राहुल नार्वेकर के हाथों हार गए. 2004 में वह मुंबई की खेतवाड़ी सीट से विधायक चुने गए. जबकि, 1999 के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इन्हीं हालातों को देखते हुए कई नेताओं के बीच पद पर जगताप को चुने जाने के लेकर चर्चाएं हैं.

जगताप अखिल भारतीय मराठा महासंघ से जुड़े हुए हैं, जिसकी मराठा समुदाय में खासी पकड़ है. वहीं, इस महासंघ ने लेबर यूनियन, अखिल भारतीय कामगर कर्मचारी महासंघ को स्थापित करने में भूमिका निभाई है. इस यूनियन पर जगताप का नियंत्रण है. कांग्रेस भी जगताप के लेबर यूनियन वाले बैकग्राउंड की मदद से पार्टी को चलाने की राह देख रही है. कहा जाता है कि जगताप को राज्य में बड़े कांग्रेस मंत्रियों का समर्थन है.

गौरतलब है कि जगताप इस चुनाव में कांग्रेस के अकेले लड़ने की बात कह रहे हैं. वहीं, एनसीपी गठबंधन के लिए तैयार है. हालांकि, इस दौरान कांग्रेस नेतृत्व में अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं. एक ओर कांग्रेस के राज्य प्रमुख और राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट गठबंधन की बात कह रहे हैं. वहीं, जगताप अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं. यह डर बना हुआ है कि अगर कांग्रेस अकेले लड़ती है, तो महाविकास अघाड़ी के संयुक्त वोटों की वजह से हार सकती है. हालांकि, अगर ऐसा हुआ, तो तीनों पार्टियों के बीच सीट बांटने मुश्किल होगा.

कांग्रेस ने आखिरी बार 1992 से लेकर 1997 के बीच बीएमसी को संभाला था. अब बीएमसी में इसके केवल 31 कॉर्पोरेटर्स हैं. खास बात है कि कांग्रेस की गिरावट बीजेपी की बढ़त के साथ-साथ हुई है. 2017 के चुनाव में बीजेपी ने बीएमसी में 82 सीटें हासिल की थीं. हालांकि, इस बार बीजेपी शिवसेना के हाथ से बीएमसी छीनने का फैसला कर चुकी है. जैसा कि वरिष्ठ नेता मानते हैं कि अगर पार्टी का पुराना वक्त वापस नहीं लौटा, तो कांग्रेस को मुंबई में फिर से जीवित होने के लिए बीएमसी में स्थिति अच्छी करनी होगी.
(यह लेखक के निजी विचार हैं)

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