• Home
  • »
  • News
  • »
  • maharashtra
  • »
  • नाबालिग का हाथ पकड़ना और प्यार का इजहार करना यौन उत्पीड़न नहीं- POCSO कोर्ट ने 28 वर्षीय आरोपी को किया बरी

नाबालिग का हाथ पकड़ना और प्यार का इजहार करना यौन उत्पीड़न नहीं- POCSO कोर्ट ने 28 वर्षीय आरोपी को किया बरी

अदालत ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे ये कहा जा सके कि आरोपी का कोई यौन उत्पीड़न का इरादा था.  (सांकेतिक तस्वीर)

अदालत ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे ये कहा जा सके कि आरोपी का कोई यौन उत्पीड़न का इरादा था. (सांकेतिक तस्वीर)

POCSO Act: पोक्सो अदालत ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं हैं कि आरोपी ने लड़की का लगातार पीछा किया था या उसे एक सुनसान जगह पर लेकर गया था.

  • Share this:

    मुंबई. महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में एक पॉक्सो कोर्ट (POCSO Court) ने कहा है कि किसी नाबालिग का हाथ पकड़ना और फिर उससे प्यार का इज़हार करना यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) नहीं माना जाएगा. कोर्ट ने इस मामले में 28 साल के एक शख्स को बरी भी कर दिया. साल 2017 में इस व्यक्ति ने एक नाबालिग लड़की को प्रपोज किया था. बता दें कि प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट को पॉक्सो कहा जाता है. पॉक्सो कोर्ट में 18 साल से कम उम्र के बच्चों पर होने वाले यौन शोषण अपराधों की सुनवाई की जाती है. 2012 में बने इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा का प्रावधान किया गया है. साल 2018 में सरकार ने इस कानून में बड़े बदलाव किए थे.

    अदालत ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे ये कहा जा सके कि आरोपी का कोई यौन उत्पीड़न का इरादा था. फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि इस बात का कोई अहम सबूत नहीं हैं कि आरोपी ने लगातार उसका पीछा किया था, उसे एक सुनसान जगह पर लेकर गया था. अदालत ने कहा, ‘मैंने पाया कि अभियोजन पक्ष सबूत लाने में सक्षम नहीं है कि आरोपी ने कथित रूप से यौन उत्पीड़न की कोशिश की. यानी आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी किया जाता है.’

    ये भी पढ़ें:- कोरोना के ‘सुपर म्यूटेंट वेरिएंट’ को लेकर ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने चेताया, कहा- हर तीन में से एक शख्स की लेगा जान

    पहले भी आए थे ऐसे फैसले
    बता दें कि ये कोई पहला मामला नहीं है जहां किसी बच्चे का हाथ पकड़ना यौन अपराध के रूप में खारिज किया गया हो. इससे पहले, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 5 साल की बच्ची के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ करने के लिए POCSO अधिनियम की धारा 8 और 10 के तहत एक 50 साल के व्यक्ति की सजा को पलट दिया था. फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा था कि पैंट खोलकर एक नाबालिग का हाथ पकड़ने को ‘यौन उत्पीड़न’ की परिभाषा में नहीं रखा जा सकता.

    तब कोर्ट ने क्या कहा था
    पीड़िता की मां द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था. दावा किया गया था कि आरोपी ने उसकी बड़ी बेटी का हाथ पकड़ लिया था, उसकी पैंट खोल दी थी और पीड़िता को उसके साथ बिस्तर पर जाने को कहा था. जबकि उस वक्त उसके माता-पिता घर से दूर थे. न्यायमूर्ति पुष्पा गनेडीवाला ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि बिना स्किन-टू-स्किन संपर्क के छूना पॉक्सो के तहत ‘यौन उत्पीड़न’ नहीं माना जाएगा.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज