नासिक जेल के कैदी ने की आत्महत्या, पोस्टमार्टम में शरीर से मिला सुसाइड नोट

नासिक जेल के कैदी ने की आत्महत्या (तस्वीर- News18 लोकमत)
नासिक जेल के कैदी ने की आत्महत्या (तस्वीर- News18 लोकमत)

नासिक सेंट्रल जेल (Nashik Central Jail) में एक कैदी ने आत्महत्या कर ली. आरोप है कि वह जेलकर्मियों के रवैये से परेशान था.

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  • Last Updated: October 15, 2020, 12:17 PM IST
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नासिक. महाराष्ट्र (Maharashtra) स्थित नासिक सेंट्रल जेल (Nashik Central Jail) में एक कैदी ने आत्महत्या कर ली. आरोप है कि वह जेलकर्मियों के रवैये से परेशान था. शख्स के पास से एक सुसाइड नोट मिला है. जिसमें उसने अपनी सारी शिकायतों का जिक्र किया है. दिलचस्प बात यह है कि कैदी का सुसाइड नोट पोस्टमार्टम के दौरान उसके शरीर से मिला. कैदी की मौत के बाद  5 अन्य कैदियों और हाल ही में रिहा किए गए कैदी ने बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और अन्य अधिकारियों को पत्र लिखकर मांग की है कि  भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत एफआईआर दर्ज की जाए.

7 अक्टूबर को सुबह लगभग 6.30 बजे असगर मंसूरी नमाज़ के लिए उठे. इसके तुरंत बाद 32 वर्षीय व्यक्ति को जेल की कोठरी में लटका पाया गया. उसी दिन, जब पोस्टमार्टम के दौरान उस आदमी के पेट से एक सुसाइड नोट बरामद किया गया था.  मराठी में लिखा हुआ सुसाइड नोट प्लास्टिक में लिपटा हुआ था.

जेल के अन्य कैदियों ने लगाया आरोप
वहीं जेल के ही कैदियों द्वारा हाईकोर्ट और अन्य अधिकारियों को लिखी चिट्ठी के अनुसार 'उसे (आत्महत्या करने वाले कैदी को) पिछले कुछ हफ्तों से एक स्टाफ ने सजा के तौर पर अलग सेल में रखा गया था.' पत्र में कैदियों ने दावा किया कि स्टाफ  कैदियों के लिए मोबाइल फोन की व्यवस्था करने सरीखी जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल थे.
यह डरते हुए कि असगर उनकी अवैध गतिविधियों का खुलासा करेगा जेल का स्टाफ उसे परेशान करने लगा. कैदियों द्वारा लिखे पत्र में कहा गया है, 'उसे लगातार इस वजह से परेशान किया जा रहा था, और उसने मुझे बताया कि उसे धमकी दी जा रही थी कि उसके खिलाफ एक झूठा मुकदमा दर्ज किया जाएगा.'



अन्य कैदियों ने आरोप लगाया है कि 32 वर्षीय व्यक्ति को जानबूझकर एक ओपन जेल से दूर रखा गया था ताकि उसकी रिहाई जल्दी ना हो. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार  कुछ पत्रों में, कैदियों ने जेल स्टाफ पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया. कैदियों ने कहा कि वे मजिस्ट्रेट के सामने भी बयान दर्ज करने को तैयार हैं.

महाराष्ट्र के अतिरिक्त डीजीपी (जेल और सुधार सेवाएं) सुनील रामानंद ने मामले की जांच का आदेश दिया. उन्होंने कहा, 'वे पूछताछ के बाद फैसला किया जाएगा कि आरोप सही हैं या नहीं.'  मृतक की भतीजी ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में, उसने कहना शुरू कर दिया था कि अब वह जीना नहीं चाहता.
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