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लोकतंत्र में सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ता है, युवाओं को बोलने दें: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट

जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एमएस कार्णिक की बेंच ने कहा कि किसी व्यक्ति को प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार (Freedom of speech and expression) का यह मतलब नहीं है कि वह दूसरे व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करे. कोर्ट सुनैना होले की याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 2, 2020, 8:55 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र के पालघर में हुई मॉब लिंचिंग (Palghar Mob Lynching Case) केस को लेकर राज्य सरकार और पुलिस के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में सुनवाई हुई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि लोकतंत्र में सरकार को जनता की आलोचना का सामना करना पड़ता है. कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) से पूछा कि क्या सरकार हर उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मंशा रखती है, जो ट्विटर पर आपत्तिजनक बात कहता है.

इसके साथ ही जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एमएस कार्णिक की बेंच ने कहा कि किसी व्यक्ति को प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार (Freedom of speech and expression) का यह मतलब नहीं है कि वह दूसरे व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करे. कोर्ट सुनैना होले की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. होले पर मुंबई पुलिस और पालघर पुलिस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और उनके बेटे आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) के खिलाफ ट्वीट करने के लिए मामला दर्ज किया गया है.

ये भी पढ़ें- बंबई HC का महाराष्ट्र सरकार से सवाल, क्या आपत्तिजनक ट्वीट करने वाले हर आदमी के खिलाफ एक्शन होगा?




बेंच ने कहा, 'समाज को समाज और व्यक्ति के अधिकारों के बीच संतुलन बिठाना पड़ेगा. क्या आप हर उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, जो ट्विटर पर कुछ कहेगा? आप कितने लोगों पर कार्रवाई करेंगे?'

हाईकोर्ट ने कहा कि अगर हम युवाओं को बोलने की स्वतंत्रता नहीं देंगे, तो वो कैसे समझेंगे कि जो बोला गया है वो सही या गलत. वो कैसे सही और गलत में फर्क करना सीखेंगे.


वकील अभिनव चंद्रचूड़ के जरिये दायर याचिका में सुनैना होले ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की अपील की है. चंद्रचूड़ ने मंगलवार को अदालत को बताया कि होले मात्र अपनी राय व्यक्त कर रही थीं. उन्होंने अपने ट्वीट के जरिये राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की.

हालांकि, सरकारी वकील वाई पी याज्ञनिक ने कहा कि सुनैना होले को सजा मिलनी ही चाहिए. आम तौर पर जनता को राजनीतिक दलों और नीतियों की आलोचना करने से बचना चाहिए.

कोर्ट ने होले के वकील चंद्रचूड़ से कहा कि बुधवार को इस पहलू पर वह अदालत का सहयोग करें.
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