अपना शहर चुनें

States

नए कृषि कानून के तहत पहली बार किसान ने दर्ज कराई शिकायत, मिला मुआवजा

किसान ने दर्ज कराई शिकायत.
किसान ने दर्ज कराई शिकायत.

Farm Laws: महाराष्‍ट्र के दो व्यापारियों पर पैसे का भुगतान नहीं करने और उसे उपज की बिक्री बकाया न देने का आरोप है. उनपर किसान का करीब 2,85,000 रुपये बचा हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 18, 2020, 7:42 AM IST
  • Share this:
नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार की ओर से सितंबर में लाए गए तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) का पंजाब और हरियाणा के इलाकों में भले ही विरोध हो रहा है, लेकिन इन्‍हीं कानूनों के तहत महाराष्‍ट्र में एक मक्‍का किसान ने दो व्‍यापारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और उसे इसमें मुआवज़ा भी मिल गया. कहा जा रहा है कि नया कृषि कानून अमल में आने के बाद दर्ज कराई गई यह पहली शिकायत है. महाराष्‍ट्र के दो व्यापारियों पर पैसे का भुगतान नहीं करने और उसे उपज की बिक्री बकाया न देने का आरोप है. उनपर किसान का करीब 2,85,000 रुपये बकाया था.

किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम 2020, देश में कृषि व्यापार को मुक्त करने के लिए सितंबर में पारित कानूनों में से एक है, जो खरीदारों को लेनदेन के तीन दिनों के भीतर किसानों को भुगतान करने के लिए अनिवार्य बनाता है. कुछ राज्यों विशेष रूप से पंजाब के किसान इन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं. उन्हें डर है कि ये उनकी सौदेबाजी की ताकत को नुकसान पहुंचाकर उसे खत्‍म कर देगा. हालांकि महाराष्ट्र के एक किसान जितेंद्र भोई के लिए तो यह कानून अच्‍छा साबित हुआ. पहले उन्‍हें भी व्‍यापारियों के पीछे पेमेंट के लिए भागना पड़ता था.

हिंदुस्‍तान टाइम्‍स के अनुसार किसान भोई ने गर्मी में धुले जिले के शिरपुर तहसील के भटाने गांव में अपने 18 एकड़ के खेत में मक्का की फसल उगाई थी. 19 जुलाई को किसान ने दो व्यापारियों, सुभाष वाणी और अरुण वाणी को 1,240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 270.95 क्विंटल (प्रत्येक 100 किलोग्राम) मकई बेचने के लिए तैयार किया. व्यापारी मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से हैं. भोई ने पानसेमल तहसील के उपखंड मजिस्ट्रेट के सामने अपनी शिकायत दी. भोई की शिकायत के अनुसार कुल लेनदेन 3,32,617 रुपये तय किया गया था.



दोनों व्यापारियों ने पूरी उपज को उठाया और 25,000 रुपये का टोकन राशि भुगतान किया. बाकी का भुगतान 15 दिनों के भीतर करने का वादा किया. अपनी शिकायत में किसान ने बकाया राशि दिखाते हुए लेन-देन की रसीदें संलग्न कीं. भोई ने कहा, 'लगभग चार महीने भुगतान में देरी होने के बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह में भोई ने अधिकारियों से संपर्क किया. स्थानीय बाजार में मुझे एक क्लर्क ने सरकार द्वारा लाए गए नए कानूनों में इस प्रावधान के बारे में समझाया. उन्होंने कहा कि व्यापारियों को अब तीन दिनों के भीतर भुगतान करना होगा. इसके बाद ही मैंने तब शिकायत दर्ज करने का फैसला किया.
किसान की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने व्यापारियों को ट्रेस किया है. उन्हें 6 अक्टूबर को बुलाया गया और गिरफ्तारी सहित अन्य संभावित आपराधिक कार्रवाई के बारे बताया गया. कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा ने 5 नवंबर को कहा था, 'मामले का अध्ययन करने के बाद किसान की बात सुनकर और दस्तावेजों के माध्यम से यह मेरे द्वारा आदेश दिया गया है कि खरीदार को किसान को तत्काल भुगतान करना होगा.'

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों में दस ने मंगलवार को कहा कि वे 26 नवंबर को अपनी राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल की घोषणा पर कायम हैं और साथ ही अगले हफ्ते होने वाले किसानों के दो दिन के विरोध प्रदर्शन को भी समर्थन देंगी. इस संबंध में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच और विभिन्न उद्योगों के स्वतंत्र मजदूर संघों ने 16 नवंबर 2020 को एक वर्चुअल बैठक भी की. संयुक्त मंच ने एक बयान में कहा कि यूनियनों को 26 नवंबर को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल के लिए श्रमिकों का जबरदस्त समर्थन मिला है.

इस अभियान में इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियप ट्रेड यूनियंस (सीटू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी), ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी), सेल्फ-एंप्यॉलयड वीमेंस एसोसिएशंस (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोगरेसिव फेडरेशन (एलपीएफ) और युनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) शामिल हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज