राजस्थान संकट: शिवसेना ने बीजेपी पर साधा निशाना, चूहे से की सचिन पायलट की तुलना
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राजस्थान संकट: शिवसेना ने बीजेपी पर साधा निशाना, चूहे से की सचिन पायलट की तुलना
अशोक गहलोत बनाम सचिन पायलट की राजनीतिक लड़ाई में पार्टी और विधायक खेमेबाजी में बंट गई है (न्यूज़ 18 ग्राफिक्स)

राजस्थान में कांग्रेस की कलह को बीजेपी (BJP) से जोड़ते हुए शिवेसना (Shiv sena) के मुखपत्र सामना के अंक में कहा गया है कि एक ओर देश कोरोना (Coronavirus India) के संकट से जूझ रहा है और अभी चीन के साथ हिंसक झड़प में शहीद हुए सैनिकों का मामला ताजा है, फिर भी इस किस्म की राजनीति हो रही है.

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नई दिल्ली. राजस्थान (Rajasthan Congress Crisis) में कांग्रेस की अंतर्कलह को लेकर शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी ने निशाना साधा है. मंगलवार को प्रकाशित शिवेसना (Shiv sena) के मुखपत्र सामना के अंक में कांग्रेस की कलह को बीजेपी (BJP) से जोड़ते हुए कहा गया है कि एक ओर देश कोरोना के संकट से जूझ रहा है और अभी चीन के साथ हिंसक झड़प में शहीद हुए सैनिकों का मामला ताजा है, फिर भी इस किस्म की राजनीति हो रही है. सामना के संपादकीय में लिखा गया है कि -'एक ओर जहां देश कोरोना संकट से जूझ रहा है, भारतीय जनता पार्टी ने कुछ अलग ही उपद्रव मचाया हुआ है. इस दौरान भाजपा ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिराई. अपनी जीभ पर लगे खून के पचने के पहले ही राजस्थान में गहलोत सरकार को गिराकर डकार लेने की स्थिति में भाजपा दिख रही है, लेकिन यह संभव नहीं लगता.'

संपादकीय में लिखा गया है- 'भारतीय जनता पार्टी इसके लिए खुलकर कुछ नहीं कर रही है लेकिन सरकार को अस्थिर करने के लिए पर्दे के पीछे से उनका राष्ट्रीय कार्य चल ही रहा है.' राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) के बागी तेवर और उनकी मांग के संदर्भ में सामना की संपादकीय में उनकी तुलना चूहे से की गई है.

संपादकीय मे लिखा गया कि - 'पायलट की महत्वाकांक्षा राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने की है. फिलहाल वे उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं. वे युवा हैं और भविष्य में उनके लिए मौका है, लेकिन गहलोत द्वेष के कारण वे भविष्य में नहीं, बल्कि वर्तमान में ही एक बड़ी लड़ाई लड़कर मुख्यमंत्री पद हासिल करना चाहते हैं. यह कदम उनके लिए आत्मघाती साबित हो सकता है. मोदी और शाह द्वारा एक विशाल यंत्रणा लागू करने और एक तूफान खड़ा करने के बावजूद भाजपा को राजस्थान में सत्ता नहीं मिली. लोग कांग्रेस की तरफ थे. बेशक पायलट ने इस जीत के लिए कड़ी मेहनत की, लेकिन जब आज पार्टी मुश्किल में है, तो उन्हें नाव से कूदकर भागनेवाले चूहे की तरह का काम करके खुद को कलंकित नहीं करना चाहिए.'



सचिन पायलट को मिल रहा है केंद्र का साथ?
सामना में लिखा गया है - 'पायलट का अहंकार और व्यक्ति द्वेष राजस्थान जैसे राज्य को अस्थिर कर रहा है, लेकिन पायलट को केंद्रीय सत्ता का साथ मिले बिना ये सब संभव नहीं है. केंद्र सरकार विपक्षी सरकार को अस्थिर करने के सूत्र पर काम कर रही है.'

शिवसेना की संपादकीय के आखिर में लिखा गया है - देश के सामने कोरोना के कारण चरमराई अर्थव्यवस्था और लद्दाख में चीनी घुसपैठ सहित कई मुद्दे हैं. लद्दाख सीमा पर हमारे 20 सैनिकों का गिरा खून अभी भी ताजा है. इन सभी मुद्दों को सुलझाने की बजाय राजस्थान में कांग्रेस के भीतरी विवाद में टांग डालकर खरीद-फरोख्त को बढ़ावा देने का काम चल रहा है. रेगिस्तान में राजनीतिक उपद्रव का तूफान पैदा करके भाजपा क्या हासिल करना चाहती है? इससे संसदीय लोकतंत्र रेगिस्तान में बदल जाएगा. देश में भाजपा की पूरी सत्ता है. कुछ घरों को उन्हें विरोधियों के लिए छोड़ देना चाहिए. इसी में लोकतंत्र की शान है!'
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