मराठा आरक्षण पर BJP सांसद उदयन राजे बोले- जरूरत पड़ी तो इस्तीफा भी दे दूंगा

मराठा आरक्षण मुद्दे पर जरूरत पड़ी तो इस्तीफा दे दूंगा: उदयन राजे
मराठा आरक्षण मुद्दे पर जरूरत पड़ी तो इस्तीफा दे दूंगा: उदयन राजे

Maratha Reservation: बीजेपी (BJP) से राज्य सभा (Rajya Sabha) सदस्य उदयन राजे भोसले ने कहा, 'मैंने इस मुद्दे (मराठा आरक्षण) पर कोई राजनीति नहीं की. अगर मुझे इस मुद्दे पर इस्तीफा देना पड़ेगा तो मैं दे दूंगा.' उन्होंने कहा कि अगर किसी अन्य समुदाय के साथ अन्याय होगा तब भी वह इस्तीफा दे देंगे.

  • भाषा
  • Last Updated: September 18, 2020, 11:14 PM IST
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सतारा. भारतीय जनता पार्टी (BJP) से राज्य सभा (Rajya Sabha) सदस्य उदयन राजे भोसले ने शुक्रवार को कहा कि मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) के मुद्दे पर वह इस्तीफा तक देने को तैयार हैं. गत सप्ताह, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मराठा समुदाय को नौकरी और शिक्षा में आरक्षण देने वाले महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) के कानून पर रोक लगा दी थी और इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ को भेज दिया था. सतारा में भोसले ने संवाददाताओं से कहा, 'मैंने इस मुद्दे (मराठा आरक्षण) पर कोई राजनीति नहीं की. अगर मुझे इस मुद्दे पर इस्तीफा देना पड़ेगा तो मैं दे दूंगा.'

उन्होंने कहा कि अगर किसी अन्य समुदाय के साथ अन्याय होगा तब भी वह इस्तीफा दे देंगे. छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज भोसले ने कहा, 'जब कुछ होना नहीं है तो सत्ता में रहने का क्या अर्थ है?' उन्होंने कहा, 'मैं यह किसी भी समुदाय के लिए करूंगा, चाहे वह मराठा आरक्षण हो या धांगर आरक्षण.'

महाराष्ट्र में 30 फीसदी हैं मराठा, इन्हें हाशिए पर पड़ा समुदाय नहीं मान सकते: SC
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि महाराष्ट्र की 30 फीसदी आबादी मराठा है और इसकी तुलना सुदूर गांवों के हाशिए पर पड़े तबके के साथ नहीं की जा सकती. न्यायालय ने मराठा समुदाय के लिये राज्य में शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था करने संबंधी कानून के अमल पर रोक लगाते हुए यह टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने यह नहीं बताया कि शीर्ष अदालत द्वारा 1992 में मंडल प्रकरण में निर्धारित आरक्षण की अधिकतम 50 प्रतिशत की सीमा से बाहर मराठों को आरक्षण प्रदान करने के लिये कोई असाधारण स्थिति थी.
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2020-21 के सत्र में नहीं मिलेगा आरक्षण
न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट की पीठ ने कहा कि सार्वजनिक सेवाओं और सरकारी पदों पर नियुक्तियों और शैक्षणिक सत्र 2020-21 के दौरान शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश मराठा समुदाय के लिये आरक्षण प्रदान करने वाले कानून पर अमल किये बगैर ही किये जायेंगे.

सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को अपूर्णीय क्षति हो जायेगी
शीर्ष अदालत ने कहा कि इन अपील के लंबित होने के दौरान राज्य के 2018 के इस कानून पर अमल से सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को अपूर्णीय क्षति हो जायेगी. महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिये शिक्षा और रोजगार में आरक्षण कानून, 2018 में बनाया था.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठहराया था वैध
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले साल जून में इस कानून को वैध ठहराते हुये कहा था कि 16 प्रतिशत आरक्षण न्यायोचित नहीं है और इसकी जगह रोजगार में 12 और प्रवेश के मामलों में 13 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं होना चाहिए.
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