मोहन भागवत और रतन टाटा ने साझा किया मंच, RSS प्रमुख बोले- धर्म का मतलब सिर्फ पूजा-पाठ नहीं

आरएसएस प्रमुख और रतन टाटा के एक साथ एक मंच पर आने से चर्चा हो रही थी कि रतन टाटा आरएसएस के बारे में क्या कहेंगे? लेकिन टाटा ने कोई भाषण नहीं दिया.

News18Hindi
Updated: August 25, 2018, 5:37 PM IST
मोहन भागवत और रतन टाटा ने साझा किया मंच, RSS प्रमुख बोले- धर्म का मतलब सिर्फ पूजा-पाठ नहीं
शुक्रवार को रतन टाटा और मोहन भागवत ने मुंबई के एक कार्यक्रम में मंच साझा किया.
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Updated: August 25, 2018, 5:37 PM IST
अमन सय्यद

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बाद उद्योगपति रतन टाटा ने भी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ मंच साझा किया. मुंबई में शुक्रवार की शाम टाटा और भागवत आरएसएस से जुड़े एक एनजीओ "नाना पालकर स्मृति समिति" के गोल्डन जुबली वर्ष के समापन समारोह में शामिल हुए.

दिवंगत आरएसएस प्रचारक और नाना पालकर स्मृति समिति के संस्थापक नाना पालकर को याद करते हुए मोहन भागवत ने कार्यक्रम में मंच से कई बातें कही. इनमें सबसे अहम भागवत का बंधुभाव पर बयान. उन्होंने कहा, "धर्मभाव का मतलब बंधुभाव होता है, धर्म का मतलब सिर्फ पूजा-पाठ करना नहीं बल्कि समाज के प्रति कर्त्वय निभाना भी है, धर्म का मतलब समाज को जोड़ना है न कि इसे बिखेरना, समाज को ऊपर उठाना ही असली धर्म है. वहीं लोगो के कल्याण के लिए किया गया काम राजधर्म कहलाता है."

मोहन भागवत ने इस दौरान करीब 35 मिनट का भाषण दिया जिसमे उन्होंने दिवंगत आरएसएस प्रचारक नाना पालकर की कई बातें साझा की. आरएसएस प्रमुख ने कहा, "संघ सबको जोड़ने का काम करती है, संघ ने स्वतंत्रा से पहले भी कई बलिदान दिए है, संघ देश के लिए प्राण भी दे सकता है."

आरएसएस प्रमुख और रतन टाटा के एक साथ एक मंच पर आने से चर्चा हो रही थी कि रतन टाटा आरएसएस के बारे में क्या कहेंगे? लेकिन टाटा ने कोई भाषण नहीं दिया, जबकि तय कार्यक्रम के अनुसार रतन टाटा को 15 मिनट का भाषण देना था. रतन टाटा के भाषाण न देने पर भागवत ने कहा, "रतन टाटा बोलने वाले थे लेकिन उन्होंने मना किया, यह अक्सर देखा गया है कि जो लोग काम करते हैं उन्हें बोलने में संकोच होता है पर उनका काम बोलता है."

इस बीच खुद पर ही चुटकी लेते हुए भागवत बोले, "लेकिन कुछ काम करने वालों को संगठन बोलने का भी काम देती है. यही स्थिति मेरी है इसलिए मुझे बोलना पड़ता है."
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