अपना शहर चुनें

States

Opinion: सोनिया गांधी की तरफ से उद्धव ठाकरे को लिखी गई चिट्ठी के क्या हैं मायने?

सोनिया गांधी (फ़ाइल फोटो)
सोनिया गांधी (फ़ाइल फोटो)

दरअसल ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस (Congress) बेहद नाराज़ है. उन्हें गुस्सा इस बात का है कि इस गठबंधन में उनकी कोई ज्यादा अहमियत नहीं है. ठाकरे सरकार का चेहरा हैं. जबकि शरद पवार को इस गठबंधन के वास्तुकार के रूप में देखा जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 21, 2020, 12:44 PM IST
  • Share this:
(धवल कुलकर्णी)

एक जहरीले नाग के बारे में एक कल्पित कहानी है जो अक्सर लोगों को परेशान करता है. वो अपने जहर से दूसरों के जीवन को बेकार कर देता है. एक ऋषि की सलाह के बाद उस सांप को पश्चाताप हुआ और उसने अपने हिंसक तरीकों का त्याग करने का फैसला किया. कुछ दिनों के बाद जब ऋषि उसी रास्ते से गुजर रहे थे, तो उन्होंने देखा कि सांप सड़क के किनारे चिड़चिड़ी अवस्था में पड़ा है. गंभीर रूप से घायल सांप ने बताया कि चूंकि उसने लोगों को काटना बंद कर दिया था, तो लोगों का डर भी कम हो गया. और उसे पत्थर से मारा. इसके बाद उस ऋषि ने सांप से पूछा क्या काटने के साथ-साथ तुमने फुफकार भी छोड़ दी.

दरअसल पिछले दिनों कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को लिखी गई चिट्ठी सांप की उसी पुरानी कहानी की याद दिलाता है. कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से कहा है कि प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के विकास के लिए आबादी के अनुपात में बजट का आवंटन करने समेत चार सूत्री पहल की जाए. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस पार्टी दलित, वंचित और पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार में शामिल होने के कारण हम इन वर्गों के प्रति अपनी जिम्मेदारी के लिए ज्यादा सजग हैं.'



दरअसल ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस बेहद नाराज़ है. उन्हें गुस्सा इस बात का है कि इस गठबंधन में उनकी कोई ज्यादा अहमियत नहीं है. ठाकरे सरकार का चेहरा हैं. जबकि शरद पवार को इस गठबंधन के वास्तुकार के रूप में देखा जा रहा है. कांग्रेसियों को लगता है कि पार्टी को महा विकास अघाड़ी (एमवीए) शासन के निर्णयों का उचित श्रेय नहीं दिया गया है.

कांग्रेस का दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों में सबसे अधिक जनाधार है. लेकिन एनसीपी इन्हें हटाने के लिए और राजनीतिक हिंदुत्व के उत्थान के खिलाफ इन वर्गों में बढ़ते असंतोष को रोकने के लिए व्यवस्थित रूप से काम कर रही है. हालांकि नंदुरबार जैसे जिलों में कुछ वृद्ध आदिवासी अभी भी स्वर्गीय इंदिरा गांधी के बारे में स्पष्ट रूप से बात करते हैं. लेकिन अब कांग्रेस के साथ इन आदिवासियों का समर्थन खत्म हो रहा है और ये सब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तरफ जा रहे हैं.

चूंकि राज्य में एक संसाधन संकट है, कांग्रेस विधायकों और मंत्रियों की शिकायत है कि वित्त विभाग, एनसीपी के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के पास है. लेकिन वो उनके क्षेत्रों में ज्यादा फंड रिलीज़ नहीं करते हैं. राज्य के ऊर्जा मंत्री और विदर्भ के महत्वाकांक्षी दलित नेता कांग्रेसी नितिन राउत ने इसकी शिकायत भी की है.


NCP के धनंजय मुंडे के पास सामाजिक न्याय का मंत्रालय है. एनसीपी को अक्सर दलितों और कमजोर वर्गों के लिए विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का श्रेय दिया जाता है. कांग्रेस को इस बात का भी डर है कि उन्हें सही डील नहीं मिली. पिछले दिनों इस बात की खबरें थी कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को कांग्रेस अध्यक्ष की जगह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के अध्यक्ष के रूप में चुना जाएगा. हालांकि इन अटकलों को पवार ने खुद नकार दिया था. लेकिन कांग्रेस और पवार के बीच इस बात को लेकर दूरियां बढ़ गई हैं.

कांग्रेस नेताओं की शिकायत है कि पार्टी को अभी भी टॉप-डाउन, हाई-कमांड कल्चर को दूर करना है, जहां दिल्ली में फैसले होते हैं. उदाहरण के लिए, कुछ दलित नेता राज्यपाल के कोटे से राज्य विधान परिषद के प्रत्याशियों की पार्टी की पसंद पर नाराज हैं. राज्य इकाई के पास राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट के पास पूर्णकालिक अध्यक्ष का भी अभाव है, जो लगातार कार्यभार संभाल रहे हैं. उनके विरोधियों का दावा है कि अहमदनगर जिले के संगमनेर से आठ बार के विधायक होने के बावजूद, थोराट के पास पूरे महाराष्ट्र के जनाधार का अभाव है. (ये लेखक की निजी राय है)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज