विदर्भ में भारतीय वैरिएंट की जानकारी जुटा रहे शोधकर्ता, एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता

अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं का मानना है कि यह भारत में पैदा हुआ वैरिएंट है. (सांकेतिक तस्वीर)

अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं का मानना है कि यह भारत में पैदा हुआ वैरिएंट है. (सांकेतिक तस्वीर)

Coronavirus Variant in India: विदर्भ के यवतमाल जिले (Yavatmal District) के उमरखेड़ के डॉक्टर अतुल गवांडे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की कोविड-19 कंट्रोल एडवाइजरी टीम के सदस्य हैं. उन्होंने भी वायरस के इस वैरिएंट को लेकर खासी चिंता जाहिर की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 22, 2021, 2:08 PM IST
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नागपुर. भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर (Second Wave) का कहर जारी है. अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक देश में बढ़ते मामलों का कारण माने जा रहे कोविड वैरिएंट B.1.617 के बारे में जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं. कहा जा रहा है कि यह वैरिएंट अमरावती में मिला और फरवरी में इसी की वजह से आसपास के जिलों में संक्रमण के मामले बढ़ गए. हालांकि, अभी इस बात को पुख्ता करने के लिए और भी शोध की जरूरत है. फिलहाल वैज्ञानिकों ने इस वैरिएंट के बारे में जानकारी जुटाने के लिए विदर्भ का रुख किया है.

मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं का मानना है कि यह भारत में पैदा हुआ वैरिएंट है. इसी के चलते रिसर्च और मीडिया हाउस अब विदर्भ पर अपना ध्यान लगा रहे हैं. इस दौरान कई लोगों नए 'भारतीय वैरिएंट' की जानकारी जुटाते हुए नागपुर क पहुंचे. संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नितिन शिंदे बताते हैं 'यह ब्रिटेन या अफ्रीका या ब्राजील के वैरिएंट की तुलना में अलग है, जिसके बारे में इस लहर की शुरुआत में चर्चा हुई थी.'

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डॉक्टर शिंदे कहते हैं 'ब्रिटेन समेत कई देशों ने भारत पर ट्रेवल बैन लगा दिया है. ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि वायरस का यह खास वैरिएंट B.1.617 तेजी से आम होता जा रहा है.' इसके अलावा वे अमरावती में हुई मामलों में बढ़त का कारण भी इसी वैरिएंट को मानते हैं. हालांकि, इस मामले में अभी और रिसर्च की जानी बाकी है. रिपोर्ट्स में ईग्लोल इनीशिएटिव ऑन शेयरिंग ऑल इंफ्लुएंजा डेटा के हवाले से कहा जा रहा है कि B.1.617 पहली बार दिसंबर 2020 में एकत्र हुए सैंपल्स में पाया गया था.
विदर्भ के यवतमाल जिले के उमरखेड़ के डॉक्टर अतुल गवांडे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की कोविड-19 कंट्रोल एडवाइजरी टीम के सदस्य हैं. उन्होंने भी वायरस के इस वैरिएंट को लेकर खासी चिंता जाहिर की है. उन्होंने पाया है कि यह वैरिएंट पूरे परिवार को अपना शिकार बना रहा है. खासतौर से ऐसा विदर्भ में है. वे कहते हैं कि इसका मतलब यह है कि यह वायरस विशेष रूप से ज्यादा संक्रामक है. हालांकि, यह घातक है या नहीं, इसके बारे में स्टडी की जानी बाकी है. वायरोलॉजी शोधकर्ता ग्रेस रॉबर्ट्स की शुरुाआती स्टडी बताती है कि यह वैरिएंट पिछले वाले रूप से 20 प्रतिशत ज्यादा संक्रामक है.



हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि मामलों में बढ़त के तार B.1.617 से नहीं जुड़े हैं. वहीं, एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा डेटा की कमी की वजह से हो सकता है और कई जानकार वायरस सीक्वेंसिंग पर जोर दे रहे हैं.
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