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OPINION: चाचा बाल ठाकरे की इस सीख के सहारे शिवसेना के हिंदू वोटर्स को रिझाना चाहते हैं राज

News18Hindi
Updated: February 9, 2020, 11:21 AM IST
OPINION: चाचा बाल ठाकरे की इस सीख के सहारे शिवसेना के हिंदू वोटर्स को रिझाना चाहते हैं राज
राज ने दावा किया कि CAA और NRC का विरोध करने वाले कई अवैध घुसपैठिए हैं

पिछले महीने 23 जवनरी को राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने पार्टी का नया झंडा लॉन्च किया. अब उनका झंडा भगवे रंग का हो गया है. इससे वो ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि एक बार फिर से वो हिंदुत्व की तरफ जा रहे हैं.

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  • Last Updated: February 9, 2020, 11:21 AM IST
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(धवल कुलकर्णी)
राज ठाकरे (Raj Thackeray) अपने बेबाक बयानों और हार्डलाइन राजनीति के लिए जाने जाते हैं. जब साल 2006 में राज ने बाल ठाकरे से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई तो लगा कि अब उनके सुर बदल गए हैं. मार्च 2009 की रैली में उन्होंने धर्मनिरपेक्षता की बात की.

हालांकि राज ठाकरे ने एक बार फिर से अपनी पार्टी को लॉन्च किया है. पिछले महीने 23 जवनरी को उन्होंने पार्टी का नया झंडा लॉन्च किया. अब उनका झंडा भगवे रंग का हो गया है. इससे वह ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि एक बार फिर से वो हिंदुत्व की तरफ जा रहे हैं. राज ठाकरे ने अपने भाषण की शुरुआत महाराष्ट्रियों के बजाय हिंदुओं के लिए अभिवादन के साथ की, जैसा कि वो पहले करते थे. उन्होंने 9 फरवरी को अवैध बांग्लादेशियों और पाकिस्तानी प्रवासियों के खिलाफ 'मोर्चा' खोलने का ऐलान किया.

मनसे प्रमुख ने कहा कि वह एक मराठी होने के साथ-साथ हिंदू भी हैं. उन्होंने विवादास्पद नागरिकता संशोधित कानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (NRC) के खिलाफ मुसलमानों के प्रदर्शन को अयोध्या से जोड़ दिया. उन्होंने कहा कि 'राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से वो नाराज़ हैं. साथ ही कश्मीर से आर्किटल 370 को खत्म करने से वो गुस्से में हैं और इसलिए वो सब प्रदर्शन कर रहे हैं.'

राज ठाकरे ने दावा किया कि CAA और NRC का विरोध करने वाले कई लोग अवैध घुसपैठिए हैं. उन्होंने कहा कि वह महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भ्रम फैलाने वाले मुस्लिम धर्मगुरुओं की जानकारी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को देंगे. MNS को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उन्हें हिंदुत्व की राजनीति करने का फायदा मिल सकता है. राज को लगता है कि महाराष्ट्र में कई लोग इस बात से नाराज़ है कि शिवसेना ने आखिर कांग्रेस और एनसीपी से हाथ क्यों मिला लिया.

1980 के दशक में जब संघ परिवार और भाजपा ने राम मंदिर आंदोलन शुरू किया, तो दिवंगत शिवसेना प्रमुख ने इसे ज़ोर-शोर से आगे बढ़ाया. बाल ठाकरे ने उस वक्त दावा किया था अगर उनके शिवसैनिकों ने बाबरी मस्जिद गिराए तो उन्हें इस पर गर्व है. इसी तर्ज पर एमएनएस को लगता है कि वो CAA और NRC के मुद्दे पर इतिहास को दोहरा सकते हैं. हालांकि इसमें संगठन, राजनीतिक एजेंडा और शिवसेना की निरंतरता का अभाव है.

पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें(लेखक मुंबई के पत्रकार है और उन्होंने 'द कजन्स ठाकरे: उद्धव, राज एंड द शैडो ऑफ देयर सेनाज़' नाम की किताब लिखी है. ये उनके निजी विचार है.)

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First published: February 9, 2020, 10:56 AM IST
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