Black Fungus: महाराष्ट्र में अब ब्लैक फंगस का बढ़ा खतरा, अलर्ट पर राज्य सरकार

चिकित्सकों के मुताबिक, म्यूकरमाइकोसिस जिसे ब्लैक फंगस के तौर पर भी जाना जाता है, यह सबसे ज्यादा उन कोविड-19 मरीजों में मिल रहा है जिन्हें मधुमेह है. फाइल फोटो

चिकित्सकों के मुताबिक, म्यूकरमाइकोसिस जिसे ब्लैक फंगस के तौर पर भी जाना जाता है, यह सबसे ज्यादा उन कोविड-19 मरीजों में मिल रहा है जिन्हें मधुमेह है. फाइल फोटो

ब्‍लैक फंगस मरीज के दिमाग, फेफड़े या फिर स्किन पर भी अटैक कर सकता है. इस बीमारी में कई मरीजों के आंखों की रोशनी जा चुकी है. वहीं कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी के गलने की भी शिकायतें हैं.

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मुंबई. महाराष्ट्र में म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. राज्य के भीतर इस बीमारी से संक्रमित होने के मामले दो हजार से ज्यादा हो चुके हैं. बढ़ते म्यूकरमाइकोसिस यानी आंख के फंगल इंफेक्शन के खतरे के बाद राज्य सरकार ने जिला स्तर पर टास्क फोर्स गठित करने का फैसला किया है. साथ ही इस बीमारी से निपटने के लिए जरूरी दवाइयों और दूसरे सुविधाओं के लिए भी आदेश जारी किया गया है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में अब तक म्यूकरमाइकोसिस के 2 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. इस खतरे से निपटने के लिए बैठकों का दौर जिला स्तर पर शुरू हो गया है. फंगल इंफेक्शन के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने हर जिले में इसको लेकर खास इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें अलग वार्ड तैयार करने के लिए कहा गया है. साथ ही साथ अलग ऑपरेशन थिएटर और इस बीमारी को रोकने के लिए दवाइयों और इंजेक्शन को तुरंत खरीदने के आदेश भी दिए गए हैं.

ब्लैक फंगस ने बढ़ाई स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें

कुछ वक्त पहले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा था कि म्यूकरमाइकोसिस के मरीजों के इलाज के लिए एक लाख एम्फोटेरिसिन-बी फंगस रोधी इंजेक्शन खरीदने के लिए निविदा निकालेगा. ब्लैक फंगस से मरने वाले लोगों की दर अधिक है और इसने स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं जिसने अपने सभी संसाधनों को कोविड-19 से लड़ने में लगा रखा है. अधिकारी ने बताया कि कोविड-19 के मामले बढ़ने और ब्लैक फंगस संक्रमण बढ़ने की रिपोर्टों के बाद राज्य ने आंकड़ें जुटाने तैयार कर दिए हैं. महाराष्ट्र सरकार ने माना है कि राज्य में म्यूकरमाइकोसिस के कारण कम से कम 8 मरीजों को एक आंख से दिखना बंद हो गया है.
क्या है ब्‍लैक फंगस ?

ब्‍लैक फंगस मरीज के दिमाग, फेफड़े या फिर स्किन पर भी अटैक कर सकता है. इस बीमारी में कई मरीजों के आंखों की रोशनी जा चुकी है. वहीं कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी के गलने की भी शिकायतें हैं. इसके अतिरिक्त भी तमाम दूसरी परेशानियां हैं. अगर समय रहते इसे कंट्रोल न किया गया तो इससे मरीज की मौत भी हो सकती है.

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किन्हें प्रभावित कर रहा है ब्लैक फंगस

ये बीमारी मुख्य रूप से उन लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है जो पहले से ही तमाम तरह की स्वास्थ्य समस्याएं झेल रहे हैं और उनकी दवाएं ले रहे हैं. ऐसी सिचुएशन में मरीज का शरीर कीटाणुओं और बीमारी से लड़ने की क्षमता खो देता है और फंगल इनफेक्शन ऐसे लोगों पर अपना प्रभाव डालना शुरू कर देता है.

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