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  • RS 1 48 CRORE WAS SPENT IN THE TREATMENT OF A PERSON SUFFERING FROM THE BLACK FUNGUS IN VIDARBHA

विदर्भ में ब्लैग फंगस से पीड़ित शख्स के इलाज में खर्च हुए 1.48 करोड़ रुपये, निकालनी पड़ी एक आंख

हिमाचल प्रदेश: बढ़ रहे ब्लैक फंगस के मामले, पांच मरीजों की मौत.

Black Fungus In Maharashtra: विदर्भ में उस समय डॉक्टरों के लिए काला फंगस नया था. फरवरी में उनका ऑपरेशन किया गया और एक आंख को निकाल दिया गया.

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    विदर्भ. कोरोनावायरस संक्रमण (Coronavirus In India) से जूझ रहा महाराष्ट्र अब ब्लैक फंगस (Black Fungus) के भी कहर से हांफ रहा है. देश में ब्लैक फंगस के 28,252 मामले हैं. महाराष्ट्र में फंगस के 6,339 मामले सामने आए है. ऐसा ही एक मामला राज्य स्थित विदर्भ का है. यहां बीते साल सितंबर में कोविड से उबरे 46 वर्षीय सरकारी कर्मचारी नवीन पॉल को कुछ दिनों बाद दांत और आंखों में दिक्कत होने लगी. पॉल में ब्लैक फंगस के लक्षण अक्टूबर में पाए गए. उस समय डॉक्टरों के लिए काला फंगस नया था.

    फरवरी में उनका ऑपरेशन किया गया और एक आंख को निकाल दिया गया. कुल मिलाकर पॉल ने अपने इलाज पर 1.48 करोड़ रुपये खर्च किए. उनकी बाईं आंख को निकालने से पहले छह अस्पतालों में उनका इलाज किया गया और लगभग 13 सर्जरी हुई. जांच कराने पर पता चला कि वह म्यूकोर्मिकोसिस रोग (Mucormycosis) यानी ब्लैक फंगस से पीड़ित हैं.

    पॉल को रेलवे से 1 करोड़ रुपये मिले. यहां उनकी पत्नी कर्मचारी हैं. बाकी के 48 लाख रुपये का इंतजाम उन्हें करना था. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार पॉल ने कहा- 'मैं इसके लिए तैयार था. मैंने डॉक्टरों से कहा कि अगर इससे मेरी जान बच जाती है तो वे मेरी आंख निकाल सकते हैं. पॉल ने बताया कि कोविड से उबरने के बाद  उनके दांतों और आंखों में समस्या होने लगी.



    न्यूरोलॉजी अस्पताल में भर्ती कराया गया
    रिपोर्ट के अनुसार पॉल ने कहा 'मुझे पहले शहर के एक न्यूरोलॉजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वहां से मुझे हैदराबाद के एक आंख के अस्पताल में रेफर कर दिया गया. दोनों जगहों पर कुछ वक्त रुकने के बाद. मैं नागपुर के दूसरे अस्पताल में वापस आ गया. वहां से मुझे मुंबई के एक कॉर्पोरेट अस्पताल में जाने के लिए कहा गया.'

    मुंबई के अस्पताल में उनके पास पैसे खत्म हो गए, जहां उनसे 19 लाख रुपये लिए गए. वह उस अस्पताल से डिस्चार्ज हुए और नागपुर वापस आ गए. यहां  एक निजी अस्पताल में उनकी एक आंख निकाली गई.  पॉल ने कहा कि ऑपरेशन के चलते उनका चेहरा और आंख खोखला हो गया है. उन्होंने कहा कि कई बार खाते वक्त खाना आंख के पास चला जाता है. इस पर डॉक्टर ने कहा कि प्रास्थेटिक की मदद से इस समस्या से निपटा जा सकता है.

    डॉ विपिन देहाने ने कहा कि 'वह शायद इस क्षेत्र में म्यूकोर्मिकोसिस का पहला रोगी था और मैं उसका ऑपरेशन करने वाला आखिरी डॉक्टर था. पॉल के बाद कई सर्जरी करने वाले कहते हैं, 'रोगी पहले कई प्रक्रियाओं से गुज़र चुके थे.'