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आरएसएस-तालिबान संबंधी टिप्पणी को लेकर दायर मुकदमे पर जावेद अख्तर को नोटिस, 12 नवंबर तक मांगा जवाब

जावेद अख्‍तर ने अपने बयान का बचाव किया है.  (File pic)

जावेद अख्‍तर ने अपने बयान का बचाव किया है. (File pic)

महाराष्ट्र (Maharashtra) में ठाणे (Thane) की अदालत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तुलना तालिबान (Taliabn) से कथित रूप से करने पर गीतकार जावेद अख्तर को कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया.

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     ठाणे. महाराष्ट्र (Maharashtra) में ठाणे (Thane) की एक अदालत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तुलना तालिबान  (Taliabn) से कथित रूप से करने पर गीतकार जावेद अख्तर को उनके खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे पर कारण बताओ नोटिस जारी करने का सोमवार को आदेश दिया. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और संयुक्त दीवानी जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में आरएसएस कार्यकर्ता विवेक चंपानेरकर ने मुकदमा दायर कर अख्तर से मुआवजे के रूप में एक रुपये की मांग की है. अदालत ने नोटिस जारी करने का आदेश दिया जिसका 12 नवंबर तक जवाब मांगा गया है.

    आरएसएस कार्यकर्ता द्वारा सिविल मानहानि का मुकदमा वकील के माध्यम से दायर किया गया था. वकील आदित्य आर. मिश्रा और वकील स्वप्निल आर काले ठाणे सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया.  सुनवाई के दौरान वकील आदित्य मिश्रा ने दलील दी जिसके बाद अदालत ने जावेद अख्तर को कारण बताओ नोटिस जारी किया.

    इससे पहले मुंबई के एक वकील ने उन्हें बुधवार को एक कानूनी नोटिस भेजा और इसे लेकर उन्हें माफी मांगने को कहा था. अख्तर ने कथित टिप्पणी एक समाचार चैनल को दिये साक्षात्कार में की थी. वकील, संतोष दुबे ने यह भी कहा था कि यदि गीतकार ‘बेशर्त लिखित माफी’ नहीं मांगते हैं और नोटिस प्राप्त करने के सात दिनों के अंदर अपने सभी बयानों को वापस नहीं लेते हैं, तो वह अख्तर से 100 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग करते हुए एक आपराधिक मामला भी दायर करेंगे.

    76 वर्षीय अख्तर ने एक इंटरव्यू में तालिबान और हिंदू अतिवादियों के कथित तौर पर एक समान होने का दावा किया था. वकील ने नोटिस में दावा किया है कि इस तरह के बयान देकर अख्तर ने भारतीय दंड संहिता की धारा 499(मानहानि) और 500 (मानहानि के लिए सजा) के तहत एक अपराध किया है.

    अख्तर ने इंटरव्यू का बचाव किया
    हालांकि अख्तर ने अपने इंटरव्यू का का बचाव किया. उन्होंने कहा कि हिंदू दुनिया में सबसे सभ्य और सहिष्णु लोग हैं, लेकिन जहां अफगानिस्तान में तालिबान को खुली छुट हासिल है, भारत में धर्मनिरपेक्षता उसके संविधान और अदालतों द्वारा संरक्षित है. उन्होंने गए बयान में कहा, ‘भारत कभी भी अफगानिस्तान जैसा नहीं बन सकता क्योंकि भारतीय, स्वभाव से चरमपंथी नहीं हैं, उदारवादी होना उनके डीएनए में है.’

    उन्होंने कहा, ‘हां, इस साक्षात्कार में मैंने संघ परिवार से जुड़े संगठनों के खिलाफ अपनी आपत्ति व्यक्त की थी. मैं ऐसे किसी भी विचारधारा का विरोध करता हूं जो लोगों को धर्म, जाति और पंथ के आधार पर बांटता है और मैं उन सभी लोगों के साथ खड़ा हूं जो इस तरह के किसी भी भेदभाव के खिलाफ हैं.’

     कट्टर मुसलमानों से मेरी जान को खतरा था- अख्तर
    उन्होंने कहा, ‘मेरे विरोधियों ने कहा है कि जहां एक ओर मैं हिंदू दक्षिणपंथ की आलोचना कर रहा हूं तो मैं मुस्लिम कट्टरपंथियों के खिलाफ कभी नहीं खड़ा हुआ हूं. उन्होंने मुझ पर तीन तलाक के बारे में कुछ नहीं कहने, पर्दा या मुस्लिम समुदाय के भीतर किसी अन्य प्रतिगामी प्रथा पर न बोलने का आरोप लगाया है. मुझे इस बात पर कोई आश्चर्य नहीं है कि वे वर्षों से मेरी गतिविधियों से पूरी तरह अनजान हैं.’

    उन्होंने कहा, ‘पिछले दो दशकों में, मुझे दो बार पुलिस सुरक्षा दी गई क्योंकि कट्टर मुसलमानों से मेरी जान को खतरा था: पहला, क्योंकि न केवल मैंने तीन तलाक का मुखर विरोध किया था, जब यह मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श पर नहीं था, बल्कि मैंने मुस्लिम फॉर सेक्युलर डेमोक्रेसी (एमएसडी) नामक एक संगठन के साथ, हैदराबाद, इलाहाबाद, कानपुर और अलीगढ़ जैसे भारत भर के कई शहरों का दौरा किया और विभिन्न सार्वजनिक प्लेटफार्मों से इस प्रतिगामी प्रथा के खिलाफ बोला.’

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