देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद बोले संजय राउत- हम दुश्मन नहीं, पीएम मोदी हमारे भी नेता हैं

देवेंद्र फडणवीस के साथ मुलाकात पर संजय राउत ने दी प्रतिक्रिया.
देवेंद्र फडणवीस के साथ मुलाकात पर संजय राउत ने दी प्रतिक्रिया.

देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) से मुलाकात के बाद संजय राउत (Sanjay Raut) ने कहा, 'फडणवीस हमारे दुश्‍मन नहीं हैं, हमने उनके साथ काम किया है.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 27, 2020, 11:58 AM IST
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नई दिल्‍ली. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और शिवसेना सांसद संजय राउत (SanJay Raut) के बीच शनिवार को हुई मुलाकात के बाद महाराष्‍ट्र के राजनीतिक गलियारों में चर्चा छिड़ गई. वहीं अब संजय राउत ने फडण्‍वीस के साथ हुई उनकी मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि यह पहले से तय मुलाकात थी. शिवसेना के मुखपत्र सामना को लेकर उन्‍होंने फडणवीस से मुलाकात की. इसके बाद उन्‍होंने कहा, 'नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, ऐसे में वह उद्धव ठाकरे के नेता हैं. वह हमारे नेता भी हैं.'

देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा, 'फडणवीस हमारे दुश्‍मन नहीं हैं, हमने उनके साथ काम किया है. उनसे मेरी मुलाकात सामना को लेकर हुई. इस मुलाकात के बारे में उद्धव ठाकरे को जानकारी है. हमारी विचारधारा में अंतर है, लेकिन हम एक-दूसरे के दुश्‍मन नहीं हैं.' एनडीए से अकाली दल के अलग होने पर संजय राउत ने कहा कि यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका है. उन्‍होंने कहा कि शिवसेना और अकाली दल के बिना एनडीए अपूर्ण है. ये दोनों उसके मजबूत स्‍तंभ थे.

संजय राउत ने कहा, 'शिवसेना को मजबूरन एनडीए से बाहर निकलना पड़ा था. अब अकाली दल ने भी ऐसा ही किया. एनडीए को अब नए साथी मिल गए हैं. मैं उन्‍हें शुभकामनाएं देता हूं. जिस गठबंधन में शिवसेना और अकाली दल नहीं हैं, मैं उसे एनडीए नहीं मानता.' संजय राउत ने एक होटल में फडणवीस से मुलाकात की थी. राउत पिछले साल विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता बंटवारे के फार्मूले को लेकर भाजपा विरोधी रुख के लिए सुर्खियों में थे.

महाराष्ट्र भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने कहा कि इस मुलाकात के कोई राजनीतिक मायने नहीं है. शिवसेना और भाजपा ने पिछले साल विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा था, लेकिन चुनाव के बाद सत्ता में साझेदारी को लेकर उद्धव ठाकरे नीत पार्टी बीजेपी का साथ छोड़ गई थी और एनसीपी व कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बना ली थी.
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