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    दिवाली के दिन शरद पवार ने लिखा भावुक पत्र- मां, आपकी कमी महसूस करता हूं

    शरद पवार ने अपनी मां के नाम मराठी में पत्र लिखा है.
    शरद पवार ने अपनी मां के नाम मराठी में पत्र लिखा है.

    मराठी भाषा में लिखे इस पत्र को शरद पवार (Sharad Pawar) ने ट्विटर पर पोस्ट किया. इस पत्र में पवार ने उनके राजनीतिक जीवन और कई घटनाओं को याद किया. उन्होंने लोगों के साथ भी संवाद बनाए रखने की क्षमता का पूरा श्रेय मां को दिया.

    • भाषा
    • Last Updated: November 15, 2020, 10:45 AM IST
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    पुणे. महाराष्ट्र देश का कोरोना वायरस (Corona Virus) से सबसे प्रभावित राज्य है. यही वजह रही कि इस साल दिवाली पर सरकार ने नागरिकों से पटाखा नहीं चलाने की अपील की. अब पटाखों के अभाव में रोशनी के त्योहार को सभी ने अपनी-अपनी तरह से मनाया. इस मौके पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने दिवाली (Diwali) के दिन अपनी दिवंगत मां के नाम पत्र लिखा. इस पत्र में पवार ने उनके राजनीतिक जीवन और कई घटनाओं को याद किया.

    मां के नाम संदेश मराठी में
    मराठी भाषा में लिखे इस पत्र को पवार ने ट्विटर पर पोस्ट किया. उन्होंने भिन्न विचारधारा के लोगों के साथ भी संवाद बनाए रखने की अपनी क्षमता का पूरा श्रेय अपनी मां को दिया. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मैं इस पत्र को लिखने में हुई देरी के लिए क्षमा मांगता हूं. परंतु चुनाव के कारण में मैं पिछले साल बहुत व्यस्त था. संप्रग की लोकसभा चुनाव में हार हुई और कई वरिष्ठ सहयोगियों ने पार्टी छोड़ दी. विधानसभा चुनाव जीतना मेरे लिए बहुत मुश्किल लक्ष्य था.’

    अपनी मां द्वारा दी गई शिक्षाओं में अटूट विश्वास रखने का उल्लेख करते हुए महाराष्ट्र की राजनीति के इस कद्दावर नेता नेता ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय पूरे प्रदेश में प्रचार करने के दौरन युवाओं का व्यापक समर्थन मिला जिसने उनका हौसला बढ़ाया.
    पवार ने उल्लेख किया, ‘मैंने सातारा की एक जनसभा में बारिश का सामना किया. इससे लोग लामबंद हुए और हमें वोट मिला. बाद में नए राजनीतिक समीकरण बने और शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस की सरकार बनी.’ उनके मुताबिक, जब नई सरकार की शपथ हो रही थी तो उन्हें उनकी मां की सलाह याद आई जो उन्होंने उनके पहले चुनाव के समय दी थी.



    उन्होंने कहा, ‘मां, आपकी विचारधारा साम्यवाद के लिए आदर्श थी, लेकिन मैं गांधी-नेहरू-यशवंत राव चव्हाण की कांग्रेस की ओर आकर्षित हुआ. आपने अपनी राजनीतिक मान्यता मेरे ऊपर कभी नहीं थोपा. मैंने आपसे सीखा कि भिन्न विचारधारा के लोगों के साथ भी स्वस्थ संवाद रखा जाना चाहिए.’
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