शिवसेना ने मानी कांग्रेस की नाराजगी की बात, कहा- हम सब सुलझा लेंगे
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शिवसेना ने मानी कांग्रेस की नाराजगी की बात, कहा- हम सब सुलझा लेंगे
शरद पवार, सीएम उद्धव ठाकर और कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट की फाइल फोटो

महाराष्ट्र (Maharashtra ) में शिवसेना (Shivsena) की अगुवाई वाली महाराष्ट्र विकास अघाडी (MVA) की सरकार में गठबंधन के दलों में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. शिवसेना के मुखपत्र सामना में संपादकीय में भी यह बात मान ली गई है.

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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना (Shiv sena) की अगुवाई वाली महाराष्ट्र विकास अघाडी (MVA) की सरकार में गठबंधन के दलों में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. इसके संकेत बीते दिनों कांग्रेस नेता और राज्य सरकार में मंत्री अशोक चव्हाण (Ashok chavhan) के बयान से ही मिल गए थे. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस (Congress) के कार्यकर्ताओं को लग रहा है कि महत्वपूर्ण फैसलों और जरूरी मीटिंग्स में कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं को जगह नहीं दी जा रही है. अब इसी मुद्दे पर शिवसेना के मुखपत्र सामना (Saamna) में संपादकीय के जरिये पार्टी की बात रखी है. संपादकीय में यह माना गया है कि गठबंधन के घटकों दलों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि वह सब कुछ सुलझा लेंगे.

सामना के मंगलवार को प्रकाशित अंक की संपादकीय में लिखा गया है कि - 'जब उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) छह महीने पहले मुख्यमंत्री बने तो महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया. उस दौरान जिनके पेट में दर्द था, उन लोगों ने पूछा था कि क्या यह सरकार एक महीने भी चल पाएगी? लेकिन वैसा कुछ नहीं हुआ. होने की संभावना भी नहीं है. सरकार ने छह महीना पूरा कर लिया है. तीन अलग विचारधारा वाले दलों की सरकार बनी. उस सरकार की बागडोर सबके फैसले से  उद्धव ठाकरे को दी गई. राज्य के मामले में मुख्यमंत्री का निर्णय ही अंतिम होता है, ऐसा तय होने के बाद कोई और सवाल नहीं रह जाता. शरद पवार (Sharad Pawar) ने खुद इसका पालन किया है. वे समय-समय पर मुख्यमंत्री से मिलते रहते हैं उनका अनुभव शानदार है. वे राज्य के संबंध में कुछ सुझाव देते हैं. '

सरकार में सहयोगी कांग्रेस पर संपादकीय में लिखा गया है कि -  'कांग्रेस पार्टी भी अच्छा काम कर रही है, लेकिन समय-समय पर पुरानी खटिया रह-रह कर कुरकुर की आवाज करती है. खटिया पुरानी है लेकिन इसकी एक ऐतिहासिक विरासत है. इस पुरानी खाट पर करवट बदलने वाले लोग भी बहुत हैं. इसलिए यह कुरकुर महसूस होने लगी है.'



सीएम सुनेंगे कांग्रेस की बात'
सरकार में सहयोगी कांग्रेस के दो मंत्रियों के हालिया बयान पर संपादकीय में लिखा गया है कि - 'मुख्यमंत्री ठाकरे को आघाड़ी सरकार में ऐसी कुरकुराहट को सहन करने की तैयारी रखनी चाहिए. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बालासाहेब थोराट का कुरकुराना संयमित होता है. घर में भाई-भाई में झगड़ा होता है. यहां तो तीन दलों की सरकार है. थोड़ी बहुत कुरकुर तो होगी ही. थोराट ने कहा- ‘मुख्यमंत्री से मिलकर बात करेंगे.'

लिखा गया है कि - ' अशोक चव्हाण ने कहा ‘सरकार को कोई खतरा नहीं है, लेकिन सरकार में हमारी भी बात सुनी जाए. प्रशासन के अधिकारी नौकरशाही विवाद पैदा कर रहे हैं. हम मुख्यमंत्री से ही बात करेंगे!’ अब ऐसा तय हुआ है कि कुरकुर की आवाज वाली खाट के दोनों मंत्री मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात कहने वाले हैं. मुख्यमंत्री उनकी बातें सुनेंगे और निर्णय लेंगे. लेकिन कांग्रेस क्या कहना चाहती है?'

कांग्रेस की शिकायत और अधिकारियों के कथित खराब रवैये की शिकायत पर सामना में लिखा गया है - 'राजनीति की यह पुरानी खटिया क्यों कुरकुर की आवाज कर रही है? हमारी बात सुनो का मतलब क्या? यह भी सामने आ गया है. थोराट और चव्हाण दिग्गज कांग्रेसी नेता हैं, जिन्हें सरकार चलाने का बहुत बड़ा अनुभव है. हालांकि कुरकुर या कोई आहट होती नहीं दिख रही. '

क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस और एनसीपी पर संयुक्त टिप्पणी करते हुए सामना में लिखा गया है कि -' चाहे कांग्रेस हो या एनसीपी, राजनीति में मंझे लोगों की पार्टी है. उन्हें इस बात का अनुभव है कि कब और कितना कुरकुराना है, कब करवट को बदलना है. उद्धव ठाकरे को सत्ता का लोभ नहीं. राजनीति अंततः सत्ता के लिए ही है और किसी को सत्ता नहीं चाहिये ऐसा नहीं है लेकिन उद्धव ठाकरे ऐसे नेता नहीं हैं, जो सत्ता के लिए कुछ भी करेंगे. हर किसी के गले में मंत्री पद का हार है. यह नहीं भुलाया जा सकता कि इसमें शिवसेना का त्याग भी महत्वपूर्ण है. खाट कितनी भी क्यों न कुरकुराए, कोई चिंता न करे, बस इतना ही कहना है.'

बीते दिनों पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा था, 'कुछ मुद्दे हैं… हम अपने सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए सीएम से मिलने की कोशिश कर रहे हैं. हम उम्मीद करते हैं कि अगले दो दिन में उनके साथ बैठक होगी.'

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और राजस्व मंत्री बाला साहब थोराट (Balasaheb Thorat) की अगुआई में मंत्री सीएम ठाकरे से मुलाकात करेंगे. कांग्रेस को अहम बैठकों में ना बुलाए जाने और बड़े फैसलों में पार्टी की भूमिका कम होने की शिकायत के साथ पार्टी निसर्ग चक्रवात में स्थानीय लोगों के मुआवजे को लेकर भी मांग करेंगी.
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