शिवसेना का 'सामना' के जरिए मोदी सरकार पर हमला, कहा- भगोड़े विदेशों में आराम से घूम रहे

सामना के जरिए मोदी सरकार पर हमला

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सामना (Saamana) ने संपादकीय में कहा है की न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के अनुसार, हिंदस्‍तान में कोरोना (Corona) से अब तक 43 लाख लोगों की मौत हो चुकी है और 70 करोड़ लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. हिंदुस्‍तान में कोरोना से होनेवाली मौतों की सही संख्या के छिपाए जाने का शोर वैश्विक स्तर पर मचाया जा रहा है.

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मुंबई. शिवसेना (Shiv Sena) ने अपने मुखपत्र सामना (Saamana) के संपादकीय में कहा है की मेहुल चोकसी (Mehul Choksi) कौन है और उसका क्या हुआ, इससे हमारे देश की आम जनता को कुछ लेना-देना नहीं है. फिर भी किसी ‘डॉमिनिकन’ देश में पकड़े गए चोकसी की गिरफ्तारी का आनंदोत्सव हमारे देश में मनाया जाएगा. पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank) के 14 हजार करोड़ रुपए के घोटाले में मेहुल एक आरोपी है. मुख्य आरोपी नीरव मोदी (Nirav Modi) लंदन की जेल में है. उसे भी वापस लाने के लिए लंदन की जेल में कानूनी लड़ाई चल रही है.

सामना ने संपादकीय में कहा है की एक अन्य महाशय विजय माल्या ने भी स्टेट बैंक सहित अन्य वित्तीय संस्थान को आठ-दस हजार करोड़ रुपए का चूना लगाया है. श्रीमान माल्या भी लंदन की सड़कों पर घूम रहे हैं. माल्या को भी हिंदुस्‍तान में लाने के लिए लंदन की कोर्ट में लड़ाई चल रही है. मोदी, मेहुल चोकसी जैसे कई लोग बीते कुछ वर्षों में देश छोड़कर फरार हो गए हैं.

सामना ने संपादकीय में कहा है की न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के अनुसार, हिंदस्‍तान में कोरोना से अब तक 43 लाख लोगों की मौत हो चुकी है और 70 करोड़ लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. हिंदुस्‍तान में कोरोना से होनेवाली मौतों की सही संख्या के छिपाए जाने का शोर वैश्विक स्तर पर मचाया जा रहा है. ये शोर मचाने के लिए किसी ने ‘ट्विटर’ का इस्तेमाल किया इसलिए आधी रात को ‘ट्विटर’ के दिल्ली स्थित मुख्यालय में पुलिस ने छापेमारी की. अब इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को भी बैन करने का विचार चल रहा है. हमें लगता है कि, थोड़ा इंतजार करना चाहिए. जल्दबाजी में फेसबुक, ट्विटर, व्हॉट्सऐप आदि को बैन कर दिया गया तो मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी व हिंदुस्‍तान लाने का आनंदोत्सव कैसे मनाएंगे?


सामना ने संपादकीय में कहा है की आईपीएल क्रिकेट समारोह के कर्ता-धर्ता ललित मोदी भी भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण देश छोड़कर भाग गए हैं और यूरोपीय देशों में उनका जीवन मस्त कट रहा है. उनका कोई ‘बाल भी बांका’ नहीं कर सका है. नीरव मोदी, चोकसी, माल्या तो भाजपा सरकार के दौर में भागे हैं. किसी की अंदरूनी मदद के बगैर उनका इस तरह से फरार होना संभव है क्या? इनमें से हर कोई कहता है कि ‘हम प्रखर राष्ट्रभक्त होने के कारण कोई भी घोटाला जानबूझकर नहीं हुआ है. हम सिस्टम और राजनीति के शिकार हैं. सामना ने संपादकीय में कहा है की माल्या ने तो बैंकों का पैसा लौटाने का ‘प्लान’ भी बताया है. माल्या, मोदी आदि की संपत्ति जब्‍त की गई. माल्या का कहना है कि उनके द्वारा डुबाए गए कर्ज से उनकी जब्‍त की गई संपत्ति का मोल अधिक है.

फरार हुए तमाम उद्योगपतियों का ऐसा भी कहना है कि हिंदुस्‍तान का माहौल व्यापार और उद्योग करने लायक नहीं रह गया है. माल्या आदि लोग आज आरोपियों के कटघरे में खड़े हैं. इसलिए उनकी बात पर कौन विश्वास करेगा? परंतु एक समय इन सभी भगोड़ों का देश की ‘जीडीपी’ में अहम योगदान था ही.

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सामना ने संपादकीय में कहा है की हीरा कारोबार में नीरव मोदी का नाम बड़ा ही था. इसी तरह शराब, स्पिरिट और उड्डयन के क्षेत्र में माल्या ने ऊंची उड़ान भरकर नागरिक उड्डयन व्यवसाय को एक नई दिशा दी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें इस दौरान इतनी तेजी से बढ़ी कि विमान कंपनियां पूरी तरह धराशायी हो गर्इं. नरेश गोयल की ‘जेट’ एयरलाइन ने भी प्राण त्याग दिए. इनमें से कई एयरलाइंस को बचाया जा सकता था, लेकिन उन्हें समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने दी गई. क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि किसी के राजनीतिक संरक्षण में चलने वाली एयरलाइन कंपनी को मजबूती प्रदान करने के लिए मुसीबत में फंसी इन पुरानी विमान कंपनियों को नीचे लाकर कबाड़ में ढकेला गया था.

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सामना ने संपादकीय में कहा है की उड्डयन क्षेत्र को आर्थिक नुकसान तो हुआ ही, साथ-साथ बेरोजगारी का संकट भी खड़ा हुआ. माल्या, नीरव, चोकसी आदि को एक तरफ रखो, परंतु देश के करीब 10 हजार से अधिक करोड़पति उद्यमी और व्यापारी पिछले सात वर्षों में अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में बस गए हैं. उनमें से कई जाने-माने थे और उन्होंने कोई आर्थिक घोटाला नहीं किया है, बल्कि देश का आर्थिक और औद्योगिक वातावरण ठीक न होने की वजह बताते हुए वे चुपचाप चले गए. अगर यह सत्य होगा तो धूमधाम से शुरू किए गए ‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ आदि तमाशों का परिणाम क्या निकला?


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सामना ने संपादकीय में कहा है की नए उद्योग, कोई नया निवेश तो आया ही नहीं, बल्कि जो था वह भी चला गया. कई सार्वजनिक उद्यम, जो पंडित नेहरू के समय मेहनत से खड़े किए गए थे, वो सभी बेचे जा रहे हैं. अथवा नई ईस्ट इंडिया कंपनी को चलाने के लिए दे दिए गए हैं. एयर इंडिया का बाजार जानबूझकर उठाया गया. भारतीय रेलवे भविष्य में अपनी नहीं रहेगी. तेल कंपनियों का सौदा पर्दे के पीछे चल रहा है. चीन और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देश अपनी ‘जीडीपी’, प्रति व्यक्ति आय बढ़ा रहे हैं, परंतु हिंदुस्‍तान में कोरोना द्वारा ‘सिर’ कम करने का कत्लखाना खुल गया है.

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