पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के समर्थन में शिवसेना, सामना में कहा- दिल्ली की खास लॉबी का हुए शिकार

 मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह

शिवसेना (Shiv sena) ने अपने मुखपत्र सामना (Saamna) में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह (Paramvir Singh) का बचाव किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 19, 2021, 12:43 PM IST
  • Share this:
मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में सत्ताधारी दल शिवसेना (Shiv sena) ने अपने मुखपत्र सामना (Saamna) में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह (Paramvir Singh) का बचाव किया है. शुक्रवार को सामना के अंक में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया है, 'परमबीर सिंह को बदल दिया गया इसका मतलब वो गुनहगार सिद्ध नहीं होते.' रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के घर के निकट 25 फरवरी को विस्फोटक से लदी स्कॉर्पियो कार मिलने के मामले में मुबंई पुलिस के एक अधिकारी सचिन वाजे की कथित संलिप्तता को लेकर परमबीर सिंह पर ट्रांसफर की गाज गिरी.

परमबीर सिंह के संदर्भ में सामना के संपादकीय में कहा गया है, 'मुंबई पुलिस आयुक्त के पद पर परमबीर सिंह को बदल दिया गया इसका मतलब वो गुनहगार सिद्ध नहीं होते. मुंबई पुलिस आयुक्त पद की कमान उन्होंने अत्यंत कठिन समय में संभाली थी. कोरोना संकट से लड़ने के लिए उन्होंने पुलिस में जोश निर्माण किया था. धारावी जैसे क्षेत्र में वो खुद जाते रहे. सुशांत, कंगना जैसे प्रकरणों में उन्होंने पुलिस का मनोबल टूटने नहीं दिया. इसलिए आगे इस प्रकरण में सीबीआई आई तो भी मुंबई पुलिस की जांच सीबीआई के पास नहीं जा सकी.'

'दिल्ली की एक विशिष्ट लॉबी का गुस्सा'
सामना में कहा गया है, 'टीआरपी घोटाले की फाइल उन्हीं के समय में खोली गई. परमबीर सिंह पर दिल्ली की एक विशिष्ट लॉबी का गुस्सा था, जो कि इसी वजह से था. उनके हाथ में जिलेटिन की 20 छड़ें पड़ गईं. उन छड़ों में धमाका हुए बगैर ही पुलिस दल में दहशत फैल गई. नए आयुक्त हेमंत नगराले को साहस व सावधानी से काम करना होगा.'
संपादकीय में मामले को एनआईए को भी दिये जाने पर टिप्पणी की गई है. संपादकीय में लिखा गया है, 'विपक्ष ने इस मामले में कुछ सवाल खड़े किए हैं ये सच है. परंतु राज्य का आतंक निरोधी दस्ता इस मामले में हत्या का मामला दर्ज करके जांच कर रहा था. इसी दौरान ‘एनआईए’ ने आनन-फानन में जांच की कमान अपने हाथ में ले ली. महाराष्ट्र सरकार को किसी तरह से बदनाम कर सकें तो देखें, इसके अलावा कोई और ‘नेक मकसद’ इसके पीछे नहीं हो सकता है.'



सामना में लिखा गया है, 'क्राइम ब्रांच के एक सहायक पुलिस निरीक्षक के इर्द-गिर्द यह मामला घूम रहा है और इसके पीछे का मकसद जल्द ही सामने आएगा. किसी भी हाल में इसके पीछे आतंकवाद के तार न जुड़ने के बावजूद इस अपराध की जांच में ‘एनआईए’ का घुसना, ये क्या मामला है?'

संपादकीय में लिखा गया है, 'आतंकवाद से संबंधित प्रकरणों की जांच ‘एनआईए’ करती है. परंतु जिलेटिन की छड़ों की जांच करनेवाली ‘एनआईए’ ने उरी हमला, पठानकोट हमला व पुलवामा हमले में क्या जांच की, कौन-सा सत्यशोधन किया, कितने गुनहगारों को गिरफ्तार किया? ये भी रहस्य ही है.'
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज