संजय राउत बोले- बेलगाम में मराठी बोलने वालों पर हो रहे हैं हमले, केंद्र को सिर्फ बंगाल की चिंता

संजय राउत ने आगे कहा, 'मैं सीएम उद्धव ठाकरे और उपमुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि वो एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बेलगाम जाएं.'   (File pic)

संजय राउत ने आगे कहा, 'मैं सीएम उद्धव ठाकरे और उपमुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि वो एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बेलगाम जाएं.' (File pic)

Maharashtra Latest news in Hindi: संजय राउत ने शनिवार को कहा, 'बीजेपी और केंद्र पश्चिम बंगाल में हिंसा की तो खूब बातें करते हैं कि वहां उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है लेकिन बेलगाम किसी को नहीं दिख रहा है.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 13, 2021, 4:50 PM IST
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मुंबई. विधानसभा चुनावों को लेकर इन दिनों पश्चिम बंगाल (West Bengal Assembly Elections) में राजनीति गरमाई हुई है. बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हुए हमले के लिए अमित शाह, जेपी नड्डा बार-बार ममता सरकार को निशाना बना रहे हैं. इसी मुद्दे को उठाते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत (Shiv Sena MP Sanjay Raut) ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा है. राउत ने शनिवार को कहा, 'बीजेपी और केंद्र पश्चिम बंगाल में हिंसा की तो खूब बातें करते हैं कि वहां उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है लेकिन बेलगाम किसी को नहीं दिख रहा है. बेलगाम में बीते आठ दिनों से लगातार मराठी बोलने वाले लोगों पर हमले किए जा रहे हैं. कोई भी उनकी बात नहीं कर रहा है.'

संजय राउत ने आगे कहा, 'मैं सीएम उद्धव ठाकरे और उपमुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि वो एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बेलगाम जाएं और हमारे लोगों पर हो रहे इस हमले के मुद्दे को उठाएं.'





12 मार्च को बेलगाम में हुई थी हिंसा...
दरअसल, कथित तौर पर 12 मार्च को कर्नाटक रक्षा वेदिक कार्यकर्ताओं ने बेलगाम में मराठी भाषा में लिखे बोर्ड और होर्डिंग्स को उखाड़ दिया था. साथ ही कुछ मराठी होर्डिंग्स को काला कर दिया. इसको लेकर बेलगाम में कुछ हिंसा की भी खबरें आई हैं. बेलगाम में इस तरह का मामला सामने आने के बाद शिवसेना ने इस पर आपत्ति जताई है.

70 साल से जारी है बेलगाम मामले पर विवाद
बेलगाम के मुद्दे पर महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच बीते 70 साल से अधिक समय से यह विवाद कायम है. बेलगाम और इससे सटे अन्य क्षेत्र मराठी बाहुल्य है. जो पूर्व में बांबे प्रेसिडेंसी का हिस्सा भी रहा है. लेकिन आजादी के बाद साल 1956 में नए राज्य के पुनर्गठन में यह क्षेत्र कर्नाटक में चला गया.



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तब से लेकर यहां के लोग महाराष्ट्र एकीकरण समिति के माध्यम से इस इलाके को महाराष्ट्र में शामिल करने की मांग कर रहे हैं. यह मामला वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है.
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