'एक भगत सिंह ने देश को आजादी दिलवाई, दूसरे ने रात के अंधेरे में लोकतंत्र को वध स्तंभ पर चढ़ाया'

'सामना' में प्रकाशित संपादकीय के अनुसार राज्यपाल ने किस आधार पर देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई. (प्रतीकात्मक फोटो)
'सामना' में प्रकाशित संपादकीय के अनुसार राज्यपाल ने किस आधार पर देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई. (प्रतीकात्मक फोटो)

शिवसेना (Shiv Sena) ने 'सामना' के जरिए किया हमला, कहा- राज्यपाल ने किस बहुमत के आधार पर देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadanvis) को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई.

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  • Last Updated: November 26, 2019, 8:46 AM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में चल रहे सियासी उथल-पुथल के बीच राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर लगातार आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं. ऐसे में शिवसेना ने अब अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिए बीजेपी (BJP) और सूबे के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर हमला किया है. सामना ने अपने संपादकीय में राज्यपाल की तुलना स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह से करते हुए उन्‍हें आड़े हाथों लिया है. संपादकीय में लिखा गया कि एक भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए फांसी के फंदे को चूम लिया था, वहीं दूसरे भगत सिंह (कोश्‍यारी) ने हस्ताक्षर से रात के अंधेरे में लोकतंत्र और आजादी को वध स्तंभ (सूली) पर चढ़ा दिया.

'किस आधार पर दिलवाई शपथ'
संपादकीय के अनुसार, राज्यपाल ने किस आधार पर देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई? इन सभी ने जाली कागज पेश किए और संविधान के रक्षक भगत सिंह नाम के राज्यपाल ने आंख बंद करके उन पर विश्वास किया, फिर तीनों पार्टियों (कांग्रेस-एनसीपी व शिवसेना) के विधायकों ने अपने हस्ताक्षर वाला पत्र सौंपा. इस संबंध में माननीय भगत सिंह राज्यपाल महोदय का क्या कहना है.

नितिन गडकरी पर भी कसा तंज
सामना के जरिए शिवसेना ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर भी तंज कसा. लिखा गया कि गडकरी एक अच्छे राजनीतिज्ञ हैं...अब तक यही समझा जाता था, लेकिन यह भी गलत साबित हुआ. इस पूरे मामले को उन्होंने क्रिकेट का खेल बताया. हम उनसे कहते हैं कि अपनी सेहत का ध्यान रखें. चाहे जितनी भी फिक्सिंग हो जाए सत्यमेव जयते को जुआरी नहीं हरा सकते हैं.



'ऑपरेशन लोटस की जरूरत क्यों?'
संपादकीय में लिखा गया कि मुख्यमंत्री फडणवीस के पास बहुमत था, फिर बहुमत के लिए नई चांडाल चौकड़ी वाले ऑपरेशन लोटस की क्या जरूरत थी? इस चौकड़ी का एक सदस्य तो सीधे तौर पर कहता है कि बाजार में विधायक खुद को बेचने को तैयार हैं. ये थैलीशाही की राजनीति है. ये चौकड़ी पैसों का बैग लिए घूम रही है.

 

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