SSR Death Case: SC ने सही माना महाराष्ट्र पुलिस का अधिकार क्षेत्र, आर्टिकल 142 के तहत CBI को सौंपा सुशांत केस
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SSR Death Case: SC ने सही माना महाराष्ट्र पुलिस का अधिकार क्षेत्र, आर्टिकल 142 के तहत CBI को सौंपा सुशांत केस
सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच अब सीबीआई करेगी.

Sushant Singh Rajput Death Case: आर्टिकल 142 संविधान द्वारा सुप्रीम कोर्ट को दिया गया विशेष अधिकार है. इसका इस्तेमाल कर सुप्रीम कोर्ट विशेष परिस्थिति में अपना फैसला सुना सकती है. इस आर्टिकल को न्यायिक संयम भी कहा जाता है. यानी जब किसी मामले में कोई फैसला नहीं होता है तो, कोर्ट अपने अधिकार का प्रयोग कर इसे लागू करा सकती है.

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  • Last Updated: August 19, 2020, 3:29 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput Death Case) की मौत के मामले में बिहार पुलिस की एफआईआर को सही माना और इस केस की सीबीआई जांच की मंजूरी दे दी है. शीर्ष अदालत (Supreme Court) ने संविधान के आर्टिकल 142 (Article 142) का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला सुनाया है. जस्टिस ऋषिकेश रॉय ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि बेशक ये केस मुंबई पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन इस मामले में सभी लोग सच जानना चाहते हैं. इसलिए कोर्ट ने विशेष शक्ति का प्रयोग करते हुए केस को सीबीआई के हाथों में सौंपने का फैसला किया है.

यह न्यायिक इतिहास पहला मामला है जब किसी सिंगल जज की बेंच ने संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग किया हो. आर्टिकल 142 संविधान द्वारा सुप्रीम कोर्ट को दिया गया विशेष अधिकार है. इसका इस्तेमाल कर सुप्रीम कोर्ट विशेष परिस्थिति में अपना फैसला सुना सकती है. इस आर्टिकल को न्यायिक संयम भी कहा जाता है. यानी जब किसी मामले में कोई फैसला नहीं होता है तो, कोर्ट अपने अधिकार का प्रयोग कर इसे लागू करा सकती है.

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जज ने इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की आपत्ति को खारिज कर दिया. सिंघवी ने कहा था कि सिंगल जज वाली बेंच आर्टिकल 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकती है. ऐसा करने के लिए बेंच में कम से कम दो जजों का होना जरूरी है.
सिंगल बेंच के जस्टिस ऋषिकेश रॉय (Justice Hrishikesh Roy) ने फैसला सुनाते हुए कहा, 'जांच में जनता का विश्वास सुनिश्चित करने और मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए यह न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 142 द्वारा प्रदत्त विशेष शक्तियों को लागू करना उचित समझती है.'

जस्टिस ऋषिकेश रॉय ने कहा- 'मुंबई पुलिस को इस मामले में जांच करने का अधिकार था. लेकिन, किसी भी तरह की असमंजस की स्थिति से बचने के लिए सीबीआई को केस सौंपा गया है.'


कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राजपूत की आत्महत्या के पीछे के रहस्य की जांच का CBI को एकमात्र अधिकार होने के बारे में कोई भ्रम ना हो और कोई भी अन्य राज्य पुलिस इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती. CBI न केवल पटना में दर्ज एफआईआर बल्कि राजपूत की मौत के मामले से जुड़ी किसी अन्य एफआईआर की जांच करने में सक्षम होगी.

बता दें कि हाल ही में राम मंदिर निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 142 का प्रयोग कर फैसला सुनाया था. इसके अलावा हाइवे पर बिकने वाली शराब पर पाबंदी लगाने के लिए भी कोर्ट ने इसका उपयोग किया था. वहीं, भोपाल गैस त्रासदी मामले में भी कोर्ट ने आर्टिकल 142 का इस्तेमाल किया.

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने आपात बैठक बुलाई है. बैठक में आगे का निर्णय लिया जाएगा. बैठक से पहले राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि ऑर्डर की कॉपी पढ़ने के बाद ही वह इस पर टिप्पणी करेंगे. वहीं, आर्टिकल 142 के उपयोग के कारण महाराष्ट्र सरकार बिहार सरकार द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश को भी चुनौती नहीं दे सकती है.
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