फ्लैट देने में देरी करने वाले बिल्डर को घर खरीदार को देने होंगे एक लाख रुपए, उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला

बिल्डर ने 2013 में किया था घर सौंपने का वादा. (सांकेतिक तस्वीर)
बिल्डर ने 2013 में किया था घर सौंपने का वादा. (सांकेतिक तस्वीर)

शिकायत के अनुसार, घाटकोपर के बिल्डर ने टिटवाला में विनायक क्रुप्रा नाम से एक प्रोजेक्ट शुरू किया था, जिसमें शिकायतकर्ताओं ने मई 2011 में एक फ्लैट बुक कराया था. बिल्डर ने दिसंबर, 2013 में फ्लैट सौंपने का वादा किया था.

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ठाणे. महाराष्ट्र (Maharashtra) में फ्लैट मिलने में देरी से जुड़े मामले में उपभोक्ता आयोग (Consumer Commission) ने फरियादी की पक्ष में फैसला सुनाया है. आयोग ने ठाणे जिले में एक बिल्डर को फ्लैट का कब्जा देने में देरी के लिए घर खरीदने वाले एक दंपति को एक लाख रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है. आयोग ने एक दंपति की शिकायत पर हाल में यह आदेश दिया है.

शिकायत के अनुसार, घाटकोपर के बिल्डर ने टिटवाला में विनायक क्रुप्रा नाम से एक परियोजना शुरु की थी, जिसमें शिकायतकर्ताओं ने मई 2011 में एक फ्लैट बुक कराया था. आयोग को बताया गया कि शिकायतकर्ताओं ने पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर फ्लैट (Flat) के लिए बैंक लोन ले लिया था. बिल्डर ने दिसंबर, 2013 में फ्लैट सौंपने का वादा किया था. हालांकि, फ्लैट के लिए पूरा भुगतान करने के बावजूद शिकायतकर्ताओं को वादा की गई तारीख तक फ्लैट नहीं मिला और इसे जनवरी, 2015 तक नहीं दिया गया.

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि बिल्डर ने देरी के लिए हर्जाना नहीं दिया और समझौते में बताई गई सुविधाएं भी प्रदान नहीं की. आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बिल्डर की सेवा में कमी थी और उसने अनुचित व्यापार तरीके को अपनाया. आयोग के अधिकारी एस जेड पवार और सदस्य पूनम वी महर्षि ने हाल में यह फैसला दिया है. 2011 में शिकायतकर्ताओं ने 13 लाख रुपए में फ्लैट बुक कराया था और अन्य दूसरी चीजों में 45261 रुपए खर्च किए थे.



इसके अलावा, आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि बिल्डर 5,000 रुपए ब्याज के साथ वापस करे, जो उसने शिकायतकर्ता से एक जनवरी, 2015 को लिया था और मुकदमेबाजी के खर्चों के लिए अतिरिक्त 10,000 रुपए का भुगतान करने को कहा गया.
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