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महाराष्ट्र की सियासी फिल्मः प्यार, नफ़रत, लालच, रहस्य और रोमांच से भरपूर

News18Hindi
Updated: November 7, 2019, 1:13 PM IST
महाराष्ट्र की सियासी फिल्मः प्यार, नफ़रत, लालच, रहस्य और रोमांच से भरपूर
चुनाव में बहुमत बीजेपी शिवसेना 'युति' (अलायन्स) को मिला और कांग्रेस एनसीपी को फिर विपक्ष की भूमिका निभाने की ज़िम्मेदारी. चुनाव परिणाम के बाद से ही कालचक्र ऐसा बदला की 'युति' अब 'प्रतियुति' में बदली दिखाई दे रही है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में पहली बार इतना रोमांचक मोड़ आया है. शिवसेना (Shiv Sena) ने दबाव बनाने के लिए गठबंधन तोड़कर विरोधियों के साथ जाने की चेतावनी तक दे दी है.

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  • Last Updated: November 7, 2019, 1:13 PM IST
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मुंबई. 'महाराष्ट्र (Maharashtra) की सियासी फिल्म (Film)'...क्लाइमेक्स नज़दीक है और अब कोई भी दर्शक पीठ टिकाकर कुर्सी पर नहीं बैठा है. उत्सुकता में हर कोई जल्द से जल्द इस कहानी का अंजाम देखना चाहता है. महाराष्ट्र की सत्ता की सियासत का भी ऐसा ही आख़िरी सीन चल रहा है. किस की आस टूटेगी और किसका साथ मिलेगा, बहुत ही जल्द इसका पटाक्षेप होने वाला है.'राज' छूटती ट्रेन के दरवाज़े पर हाथ बाहर निकाले खड़ा हुआ है.. धुआं छोड़ते इंजन से छुक-छुक की आवाज़ धड़कनें बढ़ा रही है...ट्रेन आगे बढ़ रही है और 'सिमरन' प्लेटफ़ॉर्म पर दौड़ रही है...दर्शकों की भी सिहरन बढ़़ रही है.. क्या 'सिमरन' 'राज' का हाथ थाम पाएगी या ट्रेन छूट जाएगी... कुछ ऐसा ही रोमांच बढ़ा रहा है महाराष्ट्र की सियासी फ़िल्म का आख़िरी सीन…

कभी नहीं आया इतना रोमांचक मोड़
सालों से महाराष्ट्र की सियासत को नज़दीक से देखते हुए शायद ही कभी इस सियासी कहानी में इतना रोमांचक मोड़ आया होगा. सत्तासीन बीजेपी शिवसेना ने सहयोगी दलों के साथ फिर गठबंधन बनाया तो दूसरी तरफ़ कांग्रेस एनसीपी कुछ सहयोगी दलों के साथ मिलकर मैदान में उतरे. चुनाव में बहुमत बीजेपी शिवसेना 'युति' (अलायन्स) को मिला और कांग्रेस एनसीपी को फिर विपक्ष की भूमिका निभाने की ज़िम्मेदारी. चुनाव परिणाम के बाद से ही कालचक्र ऐसा बदला की 'युति' अब 'प्रतियुति' में बदली दिखाई दे रही है. खगोल विज्ञान में जब दो ग्रह एक ही राशि में हों तो इसे ग्रहों की युति कहा जाता है. जब दो ग्रह एक-दूसरे से सातवें स्थान पर हों यानी 180 डिग्री पर हों, तो यह प्रतियुति कहलाती है. अशुभ ग्रह या अशुभ स्थानों के स्वामियों की युति-प्रतियुति अशुभ फलदायक मानी जाती है, जबकि शुभ ग्रहों की युति शुभ फलदायी मानी जाती है. हमेशा ही कालचक्र एक सा नहीं होता क्योंकि ग्रहों की प्रकृति ही घूमते रहने की यानी चलायमान होती है. महाराष्ट्र की सियासत में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है.

युति को मिला बहुमत

अंकों के आधार पर महाराष्ट्र की सियासी स्थिति को समझें तो बीजेपी को 105 सीटें मिली, शिवसेना को 56 यानी इस 'युति' को पूर्ण बहुमत. दूसरी तरफ एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें यानी फिर एक बार विपक्ष की भूमिका. पर अचानक शिवसेना के मुख्यमंत्री पद पर दावे ने सियासी असमंजस पैदा कर दी. शिवसेना की ओर से कहा जा रहा है लोकसभा चुनाव के वक़्त बीजेपी का वादा था कि महाराष्ट्र में अगली बार ढाई-ढाई साल का मुख्यमंत्री पद बीजेपी और शिवसेना का होगा. बीजेपी ऐसे किसी भी वादे से साफ़ इंकार करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस को ही बनाना चाहती है. इसके लिए शिवसेना की बाक़ी इच्छा पूरी करने को भी बीजेपी लगभग तैयार है. पर फ़िलहाल शिवसेना का 'दिल है कि मानता नहीं'! शिवसेना ने दबाव बनाने के लिए गठबंधन तोड़कर विरोधियों के साथ जाने की भी चेतावनी तक दे दी. आज भी महाराष्ट्र की सियासत के सबसे खाटू और धुरंधर माने जाने वाले राजनेता शरद पवार ने साफ़ कर दिया कि एनसीपी कांग्रेस को विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है और बीजेपी शिवसेना को बहुमत, इसीलिए वही सरकार बनाएं. शरद पवार जानते हैं कि फ़िलहाल कोई और सियासी समीकरण महाराष्ट्र में बनाना नुक़सानदायक हो सकता है.

कुछ ऐसी है सियासी संभावना

1. सबसे बड़े दल के तौर पर बीजेपी सरकार बनाएं और बहुमत साबित करने तक शिवसेना को साथ लाने का कोई हल निकाल ले.
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2. दूसरी सम्भावना यह कि बीजेपी जो निर्दलीयों के साथ 120 संख्या बल का दावा कर रही है वो सरकार बनाएं और शक्ति परीक्षण में एनसीपी दूर रहें.
3. तीसरी सम्भावना यह की शिवसेना एनसीपी के साथ सरकार बनाएं और कांग्रेस बाहर से समर्थन करें पर कांग्रेस और शिवसेना दोनों के भविष्य के लिए यह सुखद नहीं.
4. चौथी संभावना यह कि बीजेपी एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाएं पर इसके अब तक कोई संकेत नहीं.
5. वरना कुछ समय राष्ट्रपति शासन के साथ इंतज़ार इस बात का कि सद्बुद्धि और समन्वय से महाराष्ट्र में सरकार बने.

हर किसी को है कहानी के क्लाइमैक्स का अंदाजा
वर्तमान सियासी परिदृश्य में महाराष्ट्र में सबसे ज़्यादा मुखर शिवसेना है और केन्द्रीय भूमिका में भी. नफा-नुकसान के इरादे से सियासी बयानबाज़ी करने वालों को अगर छोड़ दें तो हर खास-ओ-आम को इस कहानी के क्लाइमैक्स का अंदाजा है. अंदाजा इस बात का भी कि, हमेशा से शिवसेना की सियासी प्रकृति ही इसी तरह की आक्रामक रही है. आखिरी मौके पर पूरी ताक़त से अपनी पार्टी को और मज़बूती दिलाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती. फ़िलहाल शिवसेना के लिए बीजेपी के साथ जाने से ज़्यादा सहज और अनुकूल परिस्थिति कोई और बनती दिखाई नहीं देती. सियासत में अक्सर सबसे ज्यादा महत्वाकांक्षा वाले को ही समझौता भी करना पड़ता है. सबसे धीर गंभीर मुद्रा में संयम के साथ बीजेपी दिखाई दे रही है और ये उसकी मजबूरी भी है. बीजेपी जानती है कि आख़िर में सही सहज समीकरण जो बनेगा वह बीजेपी शिवसेना सरकार का ही होगा चाहे कुछ त्याग उसे भी क्यों ना करना पड़े. और अन्त में पर्दे पर 'The End' लिखने से पहले ऑल इज़ वेल' ही होगा. जैसी भारतीय कथा परंपरा भी रही है 'सुखांत'. 288 सीट वाले हॉल में चल रही फ़िल्म को देखने के लिए टिकट रेट है 145 जो टैक्स फ्री होने पर और कम हो सकता है. पर टैक्स फ्री होगी 'सरकार' की मर्ज़ी से.

रिपोर्टः प्रशान्त चुरहे

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First published: November 7, 2019, 1:13 PM IST
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