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जिन्हें राम जन्मभूमि संघर्ष में एक खरोंच तक नहीं आई, वे सबसे आगे बढ़कर ले रहे फैसला: संजय राउत

शिवसेना नेता संजय राउत की फाइल फोटो
शिवसेना नेता संजय राउत की फाइल फोटो

शिवसेना (Shiv Sena) ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक दिन और एक स्वर्णिम पल (historic day and a golden moment) है क्योंकि हिंदुओं का सपना और आकांक्षाएं (dreams and aspirations) पूरी हो रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 5, 2020, 5:42 PM IST
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(विनया देशपांडे)

मुंबई. अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर भूमि पूजन (Ram Temple Bhumi Pujan) में आमंत्रित न किये जाने पर नाखुशी जाहिर करते हुए शिवसेना सांसद और वरिष्ठ नेता संजय राउत (Shiv Sena MP and veteran leader Sanjay Raut) ने बुधवार को कहा कि यह बहुत दुख देने वाली बात है कि जिन्हें राम जन्मभूमि संघर्ष (Ram Janma Bhoomi struggle) में एक खरोंच तक नहीं आई थी, वे इस मुद्दे पर सबसे आगे आकर निर्णय ले रहे (at the forefront taking decisions) हैं.

राउत ने न्यूज18 को बताया, "वहां भगवान राम (Lord Ram) के नाम पर राजनीति (Politics) हो रही है. क्या किया जा सकता है? अगर इस पर राजनीति नहीं हुई होती, लोगों ने प्रभु राम के नाम पर वोट नहीं मांगे होते, लेकिन वे मांगते हैं." शिवसेना (Shiv Sena) ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक दिन और एक स्वर्णिम पल (historic day and a golden moment) है क्योंकि हिंदुओं का सपना और आकांक्षा पूरी हो रही है.



राममंदिर संघर्ष में प्रमुख भूमिका रखने वाला कोई भी अतिथियों की लिस्ट में शामिल नहीं
यह पूछे जाने पर कि पार्टी प्रमुख को न्योता क्यों नहीं दिया गया, राउत ने कहा कि जिन्होंने संघर्ष में प्रमुख भूमिका अदा की थी, किसी को भी अतिथियों की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया था. राउत ने यह भी कहा, "कल्याण सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी जी, सभी ने संघर्ष में जबरदस्त योगदान दिया था. आयोजनकर्ताओं ने कहा कि अतिथियों की सूची को कोरोना वायरस के खतरे के चलते बहुत छोटा रखा गया है."

'सामना' के संपादकीय में राम मंदिर मुद्दे का श्रेय बालासाहेब ठाकरे को दिया गया
अपने मुखपत्र 'सामना' में पार्टी ने यह सुनिश्चित करने के प्रयासों के बारे में कहा कि भगवा पार्टी को राम मंदिर मुद्दे का श्रेय नहीं मिलता है.

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संपादकीय में कहा गया है, “बाबरी मस्जिद को गिराने वाले शिवसैनिकों की बात स्वीकार करने के बाद बालासाहेब ठाकरे हिंदूह्रदयसम्राट बन गए थे. उन्होंने कहा था, मुझे उन सैनिकों पर गर्व है जिन्होंने ऐसा किया. लेकिन आज, विध्वंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली शिवसेना को आमंत्रित नहीं किया गया है. यहां तक ​​कि रंजन गोगोई को भी आमंत्रित नहीं किया गया है. यह एक ऐतिहासिक स्वर्णिम क्षण है और कारसेवकों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता है.”
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