लॉकडाउन में स्कूल छोड़ने को मजबूर इस लड़के की मदद के लिए आगे आए हजारों हाथ

ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे ने अपने पेज पर मुंबई के 14 साल के लड़के की कहानी शेयर की है. फोटो सौजन्य- इंस्टाग्राम officialhumansofbombay
ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे ने अपने पेज पर मुंबई के 14 साल के लड़के की कहानी शेयर की है. फोटो सौजन्य- इंस्टाग्राम officialhumansofbombay

स्कूल बॉय की जिंदगी की सच्चाई को सोशल मीडिया पेज 'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' पर शेयर किया गया था. ​जिस किसी ने 14 साल के इस बच्चे की कहानी सुनी वह उसकी मदद को आगे आने लगा.

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  • Last Updated: November 14, 2020, 1:23 PM IST
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मुंबई. कोरोना वायरस (Coronavirus Pandemic) महामारी के बीच स्कूल छोड़ने को मजबूर हुए मुंबई के एक लड़के की मदद के लिए अब हजारों हाथ आगे आ गए हैं. स्कूल बॉय की जिंदगी की सच्चाई को सोशल मीडिया पेज 'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' पर शेयर किया गया था, ​जिस किसी ने 14 साल के इस बच्चे की कहानी सुनी वह उसकी मदद को आगे आने लगा.

'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' को दिए अपने इंटरव्यू में 14 साल लड़के ने बताया था कि किस तरह उनके पिता का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया और उसकी मां के ऊपर पूरे परिवार को संभालने की जिम्मेदारी आ गई. लड़के ने बताया कि उसके घर पर उसकी मां ही अकेले कमाने वाली हैं और ​वो जितना भी पैसा कमाती हैं वह उसके और उसकी बहनों पर खर्च कर देती हैं. लड़के ने बताया कि उसकी मां हर दिन काम करती है और कभी भी छुट्टी नहीं लेती है. वह हमारे सारे सपने पूरा करना चाहती है. लड़के ने कहा कि मेरी मां ने कभी भी हमें पिता की कमी महसूस नहीं होनी दी.

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लड़के ने बताया कि उसकी मां हम लोगों की पढ़ाई को लेकर काफी सख्त है. एक बार जब उसे भूगोल में कम अंक मिले तब उसकी मां ने उससे कहा कि पढ़ाई ही उसे एक अच्छा भविष्य दे सकती है. मां मुझे फाइटर पायलट के रूप में एयरफोर्स में शामिल होते देखना चाहती है. लड़के ने बताया कि उसने अपनी मां की आंखों में उस वक्त वो उल्लास देखा जिसे वो कभी भूल नहीं सकता है. इसके बाद मैंने अपनी मां के सपने को अपना सपना बना लिया कड़ी मेहनत से पढ़ाई करने लगा. स्कूल में मेरा ग्रेड अच्छा होने लगा.
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दुर्भागय से कोरोना महामारी ने जिस तरह से हजारों व्यवसायों को नुकसान पहुंचाया उसी तरह से हमारे परिवार को भी नुकसान पहुंचाया. लड़के ने बताया कि लॉकडाउन में मेरी मां की नौकरी चली गई. लॉकडाउन में एक महीने में ही हमारे पैसे खत्म हो गए और मेरी गुल्लक भी खाली हो गई. इसके बाद लड़के ने एक किराने की दुकान पर काम करना शुरू किया. यहां पर उसे रोजाना 100 रुपये मिलते हैं. उसने कहा कि ये ज्यादा तो नहीं हैं लेकिन उसके परिवार को अब भूखे पेट सोना नहीं पड़ता है.
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