उद्धव ठाकरे सरकार ने कांग्रेस के दबाव में वापस लिया कृषि कानून लागू करने का फैसला!

 महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार पहले से ही हाल ही में लागू हुए कृषि सुधारों के क्रियान्वयन को लेकर दुविधा में थी. (File Photo)
महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार पहले से ही हाल ही में लागू हुए कृषि सुधारों के क्रियान्वयन को लेकर दुविधा में थी. (File Photo)

Farm Laws: पिछले सप्ताह, राज्य के उप मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार (Ajit Pawar) ने घोषणा की थी कि महाराष्ट्र सरकार इन कृषि सुधार कानूनों को लागू नहीं करेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 11:30 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) की महा विकास अघाडी गठबंधन (Maha Vikas Agadhi) की सरकार ने बुधवार को नए कृषि कानूनों (Farm Laws) को लागू करने के पिछले माह के अपने फैसले को वापस ले लिया है. सूत्रों से जानकारी मिली है कि महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने यह फैसला कांग्रेस (Congress) की कैबिनेट मीटिंग (Cabinet Meeting) से बहिष्कार की धमकी के बाद लिया है. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के नेतृत्व वाली सरकार पहले से ही हाल ही में लागू हुए कृषि सुधारों (Agriculture Reforms) के क्रियान्वयन को लेकर दुविधा में थी. हाल ही में संसद से पास हुए इन कानूनों को कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party) "किसान विरोधी" बता रही है.

पिछले सप्ताह, राज्य के उप मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार (Ajit Pawar) ने घोषणा की थी कि महाराष्ट्र सरकार इन कृषि सुधार कानूनों को लागू नहीं करेगी. उन्होंने कहा, "किसानों को लगता है कि कानून उनके लिए लाभकारी नहीं हैं. उन्हें (उन्हें पारित करने की) कोई जल्दी नहीं थी." पवार ने कहा, "हम अध्ययन कर रहे हैं कि अगर मामला अदालत में जाता है तो क्या हो सकता है." उन्होंने कहा कि सरकार ने कानूनी विभाग से भी राय मांगी है.

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सोनिया गांधी ने मुख्यमंत्रियों को दी है ये सलाह
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी शासित प्रदेशों की सरकारों से सोमवार को कहा था कि वे केंद्र सरकार के ‘कृषि विरोधी’ विधानों को निष्प्रभावी करने के लिए अपने यहां कानून पारित करने की संभावना पर विचार करें. सोनिया ने कांग्रेस शासित प्रदेशों को सलाह दी थी कि वे संविधान के अनुच्छेद 254 (ए) के तहत कानून पारित करने के संदर्भ में गौर करें.

राज्य कांग्रेस प्रमुख ने लगाए ये आरोप
इससे पहले दिन में राज्य के कांग्रेस प्रमुख और राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने कहा कि वे "मिलकर काम करेंगे और नए कृषि विधेयकों को लागू नहीं करने का फैसला लेंगे." थोराट ने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि कृषि क्षेत्र से संबंधित दोनों विधेयक और श्रम सुधार विधेयकों को रद्द किया जाए.

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उन्होंने आरोप लगाया कि नए विधेयकों का मकसद कृषि उपज बाजार समितियों (एपीएमसी) को समाप्त करना है. उन्होंने कहा कि सरकार एपीएमसी प्रणाली को ध्वस्त करना चाहती है और विपणन प्रणाली व्यापारियों को सौंपना चाहती है. इस वजह से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा.



गौरतलब है कि राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने रविवार को तीन कृषि विधेयकों को मंजूरी दे दी थी, जिनके चलते इस समय एक राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ है और खासतौर से पंजाब और हरियाणा के किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
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