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महाराष्ट्र में है अनोखी जेल, जहां कैदी रहते हैं परिवार के साथ, बेचने जाते हैं सब्जियां
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Updated: February 25, 2020, 1:43 PM IST
महाराष्ट्र में है अनोखी जेल, जहां कैदी रहते हैं परिवार के साथ, बेचने जाते हैं सब्जियां
स्वतंत्रपुर ओपन कॉलोनी जेल (फोटो-प्रतीकात्मक)

महाराष्ट्र (Maharashtra) की एक अनोखी जेल, जिसमें ना तो कमरे छोटे हैं और ना ही खाने की दिक्कत. इस जेल से कैदी भागने के बजाए काटना चाहते हैं वहीं अपना पूरा जीवन.

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  • Last Updated: February 25, 2020, 1:43 PM IST
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सांगली. जेल का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में एक छवि बनने लगती है. जेल यानी ऐसी जगह जिसमें छोटे-छोटे कमरे होते हैं, सोने-खाने की कोई उचित व्यवस्था नहीं होती. लेकिन इस भ्रम को दूर करती है महाराष्ट्र की एक अनोखी जेल, जिसमें ना तो कमरे छोटे हैं और ना ही खाने की कोई दिक्कत. बल्कि यहां तो रूम में किचन भी दिया गया है और फर्श टाइल्स से बने हैं. हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के स्वतंत्रपुर ओपन कॉलोनी की, जो एक ऐसी जेल है जहां कैदी अपने परिवार के साथ रहते हैं. वे वहां की जमीन पर खेती करते हैं, सब्जियां लगाते हैं और उसे बेचने बाजार भी जाते हैं.

यह परिसर 61 एकड़ में फैला हुआ है जिसमें सैकड़ों कैदी रहते हैं. इस घर जैसी जेल में 1957 में आई शांताराम की फिल्म 'दो आंखें बारह हाथ' के कई सीन की शूटिंग भी हुई थी.

नहीं है कैदियों के भागने का डर
यह जेल महाराष्ट्र के सांगली जिले के अंतर्गत आने वाले अटपड़ी में है जहां से कैदी भागना नहीं चाहते वहीं रहकर अपना जीवन काटना चाहते हैं. इस जेल के ना तो दरवाजे हैं और ना ही सुरक्षाबलों की चौकियां. अगर सुरक्षा के लिहाज से देखा जाए तो इसके आसपास कोई ऊंची दीवार भी नहीं बनाई गई हैं और ना ही कटीले तारों को लगाया गया है.



ये सुविधाएं हैं इस जेल में
इस जेल में कैदियों के लिए कमरे बनाए गए हैं जिसमें किचन की भी व्यवस्था है. कमरे के अंदर टाइल्स लगी हुई हैं. पिछले साल बारिश के कारण इन मकानों की हालत खराब हो गई थी जिसके बाद स्वतंत्रपुर की इन कॉलोनियों की फिर से मरम्मत की गई है. यहां पर कैदी कहीं भी जा सकता है बस उसे शाम 7 बजे रोल कॉल के वक्त वह परिसर में मौजूद होना जरूरी होता है. इतना ही नहीं, वर्ष 2019 में यहां एक नई विंग भी बनाई गई.

अपराध की भावना को बदलने के लिए किया गया निर्माण
1937 में बनाई गई ये जेल अपराध की भावना को बदलने की दिशा में सबसे पहला प्रयोग था. कैदी बताते हैं कि किस तरह से दया भाव के साथ जेल सुधार के मूल सिद्धांतों ने दोषियों को शांति और उद्देश्य तलाशने में मदद की है.

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First published: February 25, 2020, 1:21 PM IST
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