मराठा आंदोलन के नाम पर हो रही है हिंसा, गाड़ियों-दफ्तरों में तोड़फोड़

इस तोड़फोड़ के बाद अब वालुंज औद्योगिक एरिया के उद्योगपति नाराज़ हैं. उनका ये कहना है कि अगर ऐसा ही माहौल रहा तो महाराष्ट्र में काम करना मुश्किल हो जायेगा

संदीप सोनवलकर | News18Hindi
Updated: August 11, 2018, 2:55 PM IST
मराठा आंदोलन के नाम पर हो रही है हिंसा, गाड़ियों-दफ्तरों में तोड़फोड़
प्रतीकात्मक फोटो
संदीप सोनवलकर | News18Hindi
Updated: August 11, 2018, 2:55 PM IST
गुरुवार को मराठा बंद मुंबई में तो शांत रहा लेकिन शुक्रवार की तस्वीरों से साफ है कि मराठा बंद के नाम पर हिंसा और गुंडागर्दी लगातार जारी है. मराठा बंद के नाम पर गुंडागर्दी करने वालों ने गुरुवार को औरंगाबाद शहर के बाहरी इलाके में बने वालुंज औद्योगिक एरिया में घुसकर तीन घंटे तक जमकर तोड़फोड़ की.

ये भी पढ़ेंः मराठा मोर्चा का आंदोलन खत्म, CM फडणवीस ने छात्रों के लिए स्कॉलरशिप का किया ऐलान

इस औद्योगिक इलाके में मर्सडीज, फिएट, वेस्पा और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियों की असेंबली यूनिट है. मराठा बंद के नाम पर तोड़फोड़ करने वालों ने करीब 60 औद्योगिक इकाइयों के अफसरों और सीएमडी तक के दफ्तरों में जमकर तोड़फोड़ की और बीस से ज्यादा महंगी गाड़ियों को जमकर तोड़ा. लगातार उत्पात मचा रहे लोगों ने सौ करोड़ से ज्यादा की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया.

ये भी पढ़ेंः मराठा मोर्चा के मंच पर नहीं होता कोई नेता, लड़कियां करती हैं संचालन

सीसीटीवी फुटेज और शुक्रवार को मिले विजुअल में साफ दिख रहा है कि कई लोग हाथों मे लोहे की रॉड्स और डंडे लिए हुए घुसे और एक-एक करके दफ्तरों को तोड़ते रहे और गाड़ियों को नुकसान पहुंचाते रहे. शहर से दूर होने के कारण पुलिस वहां नहीं पहुंच सकी. बंद के चलते एहतियातन तमाम औद्योगिक इकाइयों में पहले ही छुट्टी कर दी गई थी, उसका भी फायदा इन गुंडों को मिला.

इस तोड़फोड़ के बाद अब वालुंज औद्योगिक एरिया के उद्योगपति नाराज़ हैं. उनका ये कहना है कि अगर ऐसा ही माहौल रहा तो महाराष्ट्र में काम करना मुश्किल हो जायेगा. गुरुवार को मुंबई के बाहर अधिकतर कल कारखानों को सुरक्षा की दृष्टि से बंद कर दिया गया था. इसके पहले मराठा आंदोलन के नाम पर ही नवी मुंबई के व्यावसायिक ठिकानों और पिंपरी चिंचवड के कारखानों को निशाना बनाया गया.

ये भी पढ़ेंः चुनाव आयोग में गलत सूचना देने के मामले में अरविंद केजरीवाल बरी

अब सवाल ये उठने लगा है कि जब पुलिस को पहले से ही बंद की सूचना थी और कारखानों को बंद कराया गया था तो इन इलाकों में सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए. एक सवाल ये भी उठ रहा है कि मराठा बंद के नाम पर ये हिंसा क्यों हो रही है और जानबूझकर क्या औद्योगिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. मराठा नेता कह रहे हैं कि वो हिंसा और तोड़फोड़ को समर्थन नहीं करते लेकिन अगर ऐसा होता रहा तो आंदोलन को भी नुकसान पहुंचेगा.
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर