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क्या आरे कॉलोनी के जंगलों में पेड़ काटना BJP-शिवसेना में ताबूत की आखिरी कील थी? हाईकोर्ट में फिर से पहुंचा मामला

उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस (फ़ाइनल फोटो)
उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस (फ़ाइनल फोटो)

उद्धव ठाकरे ( Uddhav Thackeray) सरकार को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने बुधवार को मुंबई उपनगर के जिला कलेक्टर द्वारा पारित आदेश पर रोक लगा दी जिसमें इंटीग्रेटेड मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिए मुंबई के कंजुरमार्ग क्षेत्र में 102 एकड़ सॉल्ट पैन लैंड अलॉट किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 17, 2020, 11:53 AM IST
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(धवल कुलकर्णी)

बॉम्बे हाईकोर्ट से उद्धव ठाकरे ( Uddhav Thackeray) की सरकार को करारा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि कांजुरमार्ग में बनाए जा रहे हैं मेट्रो कार शेड के काम को तत्काल रोका जाए. बता दें कि पहले इस मेट्रो कारशेड को बीजेपी सरकार के दौरान आरे कॉलोनी के जंगलों में बनाया जा रहा था. लेकिन राज्य सरकार ने इसे वहां से शिफ्ट कर कांजुरमार्ग में बनाना शुरू किया था. पिछले साल सरकार बदलने के साथ ही कारशेड की जगह को भी बदल दिया गया और उद्धव सरकार ने उस इलाके को वन संरक्षित इलाका घोषित कर दिया. इसी झगड़े का बाद से ही पिछले साल शिवसेना और बीजेपी के बीच रिश्तों में खटास आ गई थी.

बता दें कि पिछले पिछले साल शिव सेना ने आरे कॉलोनी में इस निर्माण कार्य का जम कर विरोध किया था. इसकी अगुवाई युवा सेना के चीफ आदित्य ठाकरे ने की थी. आदित्य के छोटे भाई तेजस एक प्रकृतिवादी हैं और उन्होंने पश्चिमी घाट में मीठे पानी के केकड़ों की पांच नई प्रजातियों और मछली की एक नई प्रजाति की खोज की है. तेजस शोधकर्ताओं के लगातार संपर्क में थे. बता दें कि तेजस ने ही आरे कॉलोनी में अपने कैमरे में एक तेंदुओं को कैद किया था. इसलिए, आदित्य को जोर देकर कहा गया था कि इस क्षेत्र की जटिल जैव विविधता, जिसमें मनुष्यों के साथ निकटता में रहने वाले तेंदुए शामिल हैं. ऐसे में इन्हें संरक्षित करने की आवश्यकता है.



कॉन्वेंट-एजुकेटेड आदित्य, जो अब अपने पिता की कैबिनेट में पर्यावरण मंत्री हैं, अपने पारंपरिक मराठी निचले-मध्य और कामकाजी वर्ग के बाहर शिवसेना के सामाजिक आधार का विस्तार करने के लिए उत्सुक थे. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में गहरी रुचि रखने वाले और आदित्य कई बार ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर कई बार उनकी सोच और राजनीति की भी चर्चा करते हैं. आदित्य, शिक्षित और महानगरीय वर्गों तक पहुंचने के लिए उत्सुक थे. दरअसल सिवसेना की पहचना ज्यादातर स्थानीय स्तर की है.
शिवसेना को एक पार्टी की विचारधारा के रूप में देखा जाता था. एक ऐसी पार्टी जो पर्यावरण, लिंग न्याय और आर्थिक नीति जैसे मुद्दों पर अपनी राय नहीं रखती है. ऐसे में पार्टी के लिए आरे कॉलोनी विवाद ने इस धारणा को बदलने के लिए एक अच्छा प्लैटफॉर्म था. कहा जाता है कि तेजस के कहने पर ही आदित्य 'सेव आरे’ मोर्चे पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं, शोधकर्ताओं और पत्रकारों तक पहुंचे.

पिछले साल शिवसेना के मुखपत्र सामना के एक साक्षात्कार में उद्धव ने कहा था कि कार के शेड का विरोध मुंबई वालों की भावनाओं से जुड़ा है और इसलिए वो इसका विरोध कर रहे हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी मेट्रो रेलवे परियोजना के विरोध में नहीं थी, लेकिन आरे में इसके स्थान के लिए. शिवसेना ने आरे मिल्क कॉलोनी को ग्रीन जोन के रूप में बनाए रखने का भी वादा किया. हालांकि फडणवीस ने कहा था कि डिपो को कहीं और शिफ्ट करने की वैकल्पिक योजना से अधिक खर्च होगा. उन्होंने कहा था कि मेट्रो रेलवे पर्यावरण के अनुकूल होगा क्योंकि यह निजी वाहनों को सड़कों से हटाएगा और कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगा.

अक्टूबर 2019 में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कार शेड के निर्माण के खिलाफ याचिकाएं खारिज कर दीं. आरे में 2,000 से अधिक पेड़ गिर गए. इससे वहां के स्थानीय लोगों और शिवसेना में नाराजगी फैल गई. कई कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन के बाद गिरफ्तारी भी दी. सामना में भी इसके विरोध में लेख लिखा गया था. विधानसभा चुनावों से पहले इस कार्रवाई को एक राजनीतिक कदम और फड़नवीस की अगुवाई वाली सरकार द्वारा शिवसेना के कद को कम करने के तौर पर देखा गया. इसे आदित्य के निजी रिश्ते के रूप में भी देखा गया था. कहा जाता है कि आदित्य ने इसके बाद दो ब्यूरोक्रैट्स से मिलने से इनकार कर दिया था. ये दोनों इस प्रोजेक्ट से जुड़े थे.

शिवसेना और बीजेपी सरकार में सहयोगी थे, लेकिन शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे के दिनों से सत्ता समीकरण बदल गए थे. भाजपा ने 2014 के विधानसभा चुनावों से पहले शिवसेना के साथ संबंधों को तोड़ दिया, और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी. बाद में शिवसेना को सरकार में शामिल होने के लिए मजबूर होना पड़ा. पिछले साल शिवसेना ने जैसे ही NCP और कांग्रेस के साथ सरकार बनाई. ठाकरे ने कारशेड की जगह को भी बदल दिया. उद्धव सरकार ने उस इलाके को वन संरक्षित इलाका घोषित कर दिया. ठाकरे सरकार के इस फैसले का भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कड़ा विरोध भी किया था.

अब उद्धव ठाकरे सरकार को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने बुधवार को मुंबई उपनगर के जिला कलेक्टर द्वारा पारित आदेश पर रोक लगा दी जिसमें इंटीग्रेटेड मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिए मुंबई के कंजुरमार्ग क्षेत्र में 102 एकड़ सॉल्ट पैन लैंड अलॉट किया गया है. चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की खंडपीठ ने भी अधिकारियों को आदेश दिया है कि उस जमीन पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा. (ये लेखक की निजी राय है)
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