कोरोना की चेन तोड़ने वाला अमरावती मॉडल का लॉकडाउन अपनाएगा महाराष्ट्र?

मुंबई में तेजी से बढ़ रहा है कोरोना संक्रमण. (File pic)

मुंबई में तेजी से बढ़ रहा है कोरोना संक्रमण. (File pic)

Maharashtra Coronavirus: अमरावती महाराष्‍ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित है. वहां फरवरी में कोरोना संक्रमण की तेज रफ्तार देखी गई थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 13, 2021, 5:21 PM IST
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मुंबई. महाराष्‍ट्र (Maharashtra) में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) बेकाबू है. ऐसे में राज्‍य की उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) सरकार इस पर नियंत्रण के लिए हर कोशिश कर रही है. इसमें लॉकडाउन (Lockdown) से लेकर नाइट कर्फ्यू तक शामिल है. इस बीच कोरोना वायरस की स्थिति पर रणनीति के लिए हुई मीटिंग में महाराष्‍ट्र में 15 दिन के कड़े लॉकडाउन लगाने संबंधी चर्चा भी हुई. इस बैठक की अध्‍यक्षता मुख्‍यमंत्री उद्धव ठाकरे कर रहे थे. इस बैठक में कोरोना वायरस संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए अपनाए गए अमरावती लॉकडाउन मॉडल के बारे में भी चर्चा हुई.

महाराष्‍ट्र सरकार में मंत्री यशोमति ठाकुर ने इस संबंध में कहा कि अगर पूरे राज्‍य में अमरावती मॉडल अपना लिया जाए तो महाराष्‍ट्र में तेजी से बढ़ रहे कोविड 19 मामलों को रोका जा सकता है. अमरावती राज्‍य के विदर्भ क्षेत्र में स्थित है. वहां फरवरी में कोरोना संक्रमण की तेज रफ्तार देखी गई थी. शहर में जनवरी में सक्रिय कोरोना केस की संख्‍या 300 से 500 के बीच थी. लेकिन 3 फरवरी को जब एक्टिव केस लोड 506 था तब जिले में तेजी से मामले बढ़ रहे थे.

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इसके बाद 3 फरवरी से 26 फरवरी तक शहर में कोरोना वायरस संक्रमण के सक्रिय मामलों में 12 गुना अधिक वृद्धि देखी गई. तब यह मामले बढ़कर 6740 हो गए थे. महाराष्‍ट्र सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए सबसे पहले 18 फरवरी को वीकेंड लॉकडाउन लगाया. लेकिन यह प्रयास विफल रहा. 17 फरवरी से 24 फरवरी के बीच में एक्टिव केस 78 फीसदी बढ़ गए. या कहें तो 2710 नए एक्टिव केस और सामने आ गए. वीकेंड लॉकडाउन में बाजार और सार्वजनिक स्‍थान बंद रखे गए. इस दौरान जरूरी सेवाएं जारी रहीं और धार्मिक कार्य के लिए पांच लोगों की संख्‍या सीमित की गई है.


22 फरवरी से 1 मार्च तक कड़ा लॉकडाउन लगाया गया. इसके बाद इसे 8 मार्च तक के लिए बढ़ा दिया गया. इस दौरान मुख्‍य मकसद लोगों की भीड़ को जुटने से रोकना था. इस दौरान सिर्फ जरूरी सामान बेचने वाली दुकानों को सुबह 9 से शाम 5 बजे तक खोलने की इजाजत दी गई. स्‍कूल, कोचिंग और अन्‍य सार्वजनिक स्‍थान बंद रहे. सभी सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्‍कृतिक कार्यक्रम प्रतिबंधित कर दिए गए.

जिलों में सरकारी ऑफिस और बैंक को 15 फीसदी लोगों की मौजूदगी के साथ खोलने का निर्देश दिया गया. ट्रांसपोर्ट को लॉकडाउन से बाहर रखा गया. होटल और रेस्‍तरां को इस दौरान सिर्फ पैक्ड खाना बेचने की अनुमति दी गई. लॉकडाउन ने सफलतापूर्वक कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ा.



जिले में 24 फरवरी से 3 मार्च के बीच सक्रिय कोरोना मामलों की संख्‍या में 4.56 फीसदी की कमी देखी गई. इसके बाद के कुछ हफ्तों तक कोरोना के रोजाना आने वाले नए मामलों में भी कमी देखने को मिली. 3 मार्च से 31 मार्च तक सक्रिय केस में 10.8 फीसदी की कमी देखने को मिली. इसके बाद के हफ्तों में यह कमी 29.7 फीसदी की रही.



3 फरवरी को जिले में 96% का रिकवरी रेट था और मृत्‍यु दर 1.8% थी. 26 फरवरी को रिकवरी रेट 79.1% थी. इसके बाद जब लॉकडाउन लगाया गया उसके बाद ये बढ़ना शुरू हो गई. मौजूदा समय में यह 92 फीसदी के स्‍तर पर फिर पहुंच गया है. जिले में 8 मार्च को लॉकडाउन खत्‍म हो गया था. सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण के मामले कम होने के कारण इसे हटाने का फैसला लिया था.
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