किसान ऋण माफी योजना का लाभ सभी किसानों को क्यों नहीं मिला: बॉम्बे हाईकोर्ट

 याचिका के अनुसार सरकार ने अभी तक केवल 15 लाख किसानों को ही ऋण माफी योजना का लाभ दिया है. (File Photo)
याचिका के अनुसार सरकार ने अभी तक केवल 15 लाख किसानों को ही ऋण माफी योजना का लाभ दिया है. (File Photo)

Farmer Loan Waiver Scheme: शिवसेना (Shivsena) नीत महा विकास आघाडी सरकार (Maha Vikas Agadhi) द्वारा शुरू की गई योजना के अनुसार एक अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2019 के बीच बैंक से दो लाख रुपये तक के ऋण लेकर 30 सितंबर 2019 तक लौटाने में असमर्थ रहे किसानों का पूरा कर्ज माफ कर दिया जाएगा.

  • भाषा
  • Last Updated: September 18, 2020, 8:50 PM IST
  • Share this:
मुंबई. बंबई उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) से कहा कि 2019 में शुरू की गई महात्मा ज्योतिराव फुले किसान ऋण माफी योजना (Mahatma Jyotirao Phule Farmers Loan Waiver Scheme) से अब तक जिन किसानों को लाभ मिला है उनका विवरण पेश किया जाए. न्यायमूर्ति के के तातेड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि सभी 35 लाख किसानों को इस योजना के दायरे में क्यों नहीं लाया गया. विधायक आशीष शेलार द्वारा दायर की गई जनहित याचिका (Public Interest Litigation) में भी सरकार पर यही आरोप लगाया गया है.

याचिका में शेलार ने दावा किया है कि दो लाख रुपये तक का ऋण लेने वाले लगभग 35 लाख किसान इस योजना का लाभ लेने की अर्हता रखते हैं. याचिका के अनुसार सरकार ने अभी तक केवल 15 लाख किसानों को ही ऋण माफी योजना का लाभ दिया है. शिवसेना (Shivsena) नीत महा विकास आघाडी सरकार (Maha Vikas Agadhi) द्वारा शुरू की गई योजना के अनुसार एक अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2019 के बीच बैंक से दो लाख रुपये तक के ऋण लेकर 30 सितंबर 2019 तक लौटाने में असमर्थ रहे किसानों का पूरा कर्ज माफ कर दिया जाएगा.

ये भी पढ़ें- लोकसभा में पास हुए तीनों कृषि विधेयक, जानिए इसकी 5 खास बातें




याचिका में शेलार ने पूछा ये सवाल
याचिका में शेलार ने पूछा है कि कर्ज माफी का लाभ लेने की पात्रता रखने वाले सभी किसानों को इस योजना का लाभ क्यों नहीं दिया गया. शेलार ने यह मुद्दा कई बार विधानसभा में भी उठाया है. शेलार के वकील राजेंद्र पई ने शुक्रवार को अदालत को बताया कि संतोषजनक उत्तर न मिलने के कारण विधायक को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा.

राज्य सरकार की वकील गीता शास्त्री ने जवाब देते हुए कहा कि शेलार इसके लिए सूचना के अधिकार के तहत एक आवेदन दे सकते थे. शास्त्री ने कहा कि याचिका मीडिया की खबरों पर आधारित है. पीठ ने पई से कहा कि उन्हें “खुद भी कुछ शोध करना चाहिए था.”

ये भी पढ़ें- कृषि बिल पर संजय झा का कांग्रेस पर निशाना,कहा-चुनाव में हमारा भी यही वादा था

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को वांछित जानकारी देनी ही चाहिए. पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को अदालत को बताना होगा कि “क्यों केवल कुछ किसानों” को ही योजना का लाभ मिला. अदालत ने राज्य को तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज