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महाराष्ट्र में सियासी खींचतानः आखिर सीएम की कुर्सी के लिए ही क्यों अड़ी है शिवसेना?

Anil Rai | News18Hindi
Updated: November 7, 2019, 1:51 PM IST
महाराष्ट्र में सियासी खींचतानः आखिर सीएम की कुर्सी के लिए ही क्यों अड़ी है शिवसेना?
शिवसेना से जुड़े सूत्रों का दावा है कि मंत्रीमंडल में सिर्फ 13 सीटें देने वाली बीजेपी अब उप मुख्यमंत्री पद और बरारबर मंत्री देने को तैयार हो गई है, देर सबरे वो ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर भी तैयार हो जाएगी.

विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election) के बाद पहली बार ऐसी राजनीतिक तस्वीर उभरी है जिसमें शिवसेना (Shiv Sena) बीजेपी (BJP) से मोलभाव करने की स्थिति में है और वे इस मौके का फायदा उठा लेना चाहती है.

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  • Last Updated: November 7, 2019, 1:51 PM IST
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नई दिल्ली. महाराष्ट्र (Maharashtra) में चुनाव नतीजों का ऐलान हुए 13 दिन हो चुके हैं लेकिन सरकार किसकी बनेगी अब तक ये साफ नहीं हो पाया है. ये हालात तब है जब महाराष्ट्र की जनता ने बीजेपी (BJP) शिवसेना (Shiv Sena) गठबंधन को स्पष्ट जनादेश दिया था. चुनाव के पहले शिवसेना ने कई बार ये दावा किया कि समझौता बराबरी पर हुआ है और दोनों दलों के नेता ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री (Chief Minister) होगें लेकिन बीजेपी ने कभी इस दावे का समर्थन नहीं किया. लेकिन चुनाव परिणाम के बाद शिवसेना का यही दावा सरकार बनाने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो रहा है. पिछले 13 दिनों से लगातार चल रही बैठकों के बाद भी शिवसेना मुख्यमंत्री पद छोड़ने को तैयार नहीं है, चाहे राज्य में राष्ट्रपति शासन क्यों न लग जाए. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि केन्द्र में सिर्फ एक मंत्री की कुर्सी पर मान जाने वाली शिवसेना मुख्यमंत्री से कम कुछ मानने के तैयार क्यों नहीं है?

शिवसेना के अड़े रहने का ये है राज
बाला साहब ठाकरे के निधन के बाद शिवसेना लगातार बीजेपी के मुकाबले कमजोर होती जा रही है. जिसका फायदा बीजेपी को मिल रहा है, 2014 के लोकसभा, 2014 के विधानसभा और फिर 2019 में विधानसभा और लोकसभा का गणित कुछ ऐसा बैठा की बीजेपी के सामने शिवसेना की हैसियत खत्म होती गई, बीजेपी ने अपनी शर्तों पर शिवसेना को अपने साथ रखा. ऐसे में इस विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार ऐसी राजनीतिक तस्वीर उभरी है जिसमें शिवसेना बीजेपी से मोलभाव करने की स्थिति में है और शिवसेना इस मौके का फायदा उठा लेना चाहती है. शिवसेना से जुड़े सूत्रों का दावा है कि मंत्रीमंडल में सिर्फ 13 सीटें देने वाली बीजेपी अब उप मुख्यमंत्री पद और बरारबर मंत्री देने को तैयार हो गई है, देर सबरे वो ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर भी तैयार हो जाएगी.

गठबधंन में नंबर 1 होने के लिए शिवसेना ने चलाया सबसे बड़ा अस्त्र

दरअसल सरकार में बिना मुख्यमंत्री की कुर्सी के कोई भी राजनीतिक दल अपनी योजनाएं लागू नहीं कर पाता. साथ ही कानून-व्यवस्था से जुड़े अहम फैसले भी नहीं ले पाता. जिससे आम जनता और पार्टी के कार्यकर्ताओं तक सरकार में होने का संदेश नहीं जाता. शिवसेना की पहचान आमतौर पर आक्रामक राजनीति करने वाली रही है, ऐसे में पार्टी कभी भी नहीं चाहेगी की सरकार में वो रहे और कानून-व्यस्था जैसे मुद्दे पर उसकी न सुनी जाए. क्योंकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को लगता है कि यही वो ट्रिगर पॉइंट है जहां से पार्टी मुख्यमंत्री पद लेकर गठबंधन में एक बार फिर बड़े भाई की भूमिका में आ सकती है, हालांकि इस दांव का एक खतरा ये भी है कि देश के सबसे पुराने राजनीतिक गठबंधनों में से एक शिवसेना-बीजेपी गठबंधन टूट जाए.

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First published: November 7, 2019, 1:51 PM IST
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