किसान मोर्चे के सहारे बीजेपी ने साधा कांग्रेस-एनसीपी के वोटबैंक पर निशाना

पिछली बार किसानों के मुद्दे पर चंद्रकांत पाटिल को भेजने वाले फडणवीस ने इस बार किसानों से बात करने के लिए एक नए चेहरे यानि बीजेपी सरकार में सीनियर कैबिनेट मंत्री गिरीष महाजन को किसानों के बीच भेजा.

Abhishek Pandey | News18Hindi
Updated: March 13, 2018, 10:52 PM IST
किसान मोर्चे के सहारे बीजेपी ने साधा कांग्रेस-एनसीपी के वोटबैंक पर निशाना
आजाद मैदान में प्रदर्शन कर रहे किसान
Abhishek Pandey | News18Hindi
Updated: March 13, 2018, 10:52 PM IST
6 मार्च से शुरू हुए किसान आंदोलन को 9 मार्च तक पहुंचते-पहुंचते राजनीतिक पार्टियों ने हाई जैक कर लिया. विपक्षी दल इस पूरे मोर्चे को बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल करने की जुगत में लग गए.

ठाणे पहुंचते ही इस मोर्चे को पहले शिवसेना के मंत्री एकनाथ शिंदे और फिर मुंबई में खुद आदित्य ठाकरे ने ना केवल समर्थन दिया बल्कि किसानों के बहाने बीजेपी सरकार को जमकर कोसा. आजाद मैदान में किसानों से मिलने पहुंचे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौहान सहित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटर मोहन प्रकाश और मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम पहुंचे.

कांग्रेस को मोर्चे में शामिल हुआ देख राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और विरोधी पक्ष नेता धनंजय मुंडे भी किसानो का दुख-दर्द बांटने के बहाने बीजेपी को घेरने किसानों के मंच पर पहुंच गए. साथ ही समाजवादी पार्टी नेता अबू आजमी सहित तमाम छोटे दलों के नेता भी सरकार के खिलाफ किसानों का हमदर्द बनने पहुंचे.

लेकिन इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद इस मामले में गम्भीरता से अपनी चाल चलते रहे. पिछली बार किसानों के मुद्दे पर चंद्रकांत पाटिल को भेजने वाले फडणवीस ने इस बार किसानों से बात करने के लिए एक नए चेहरे यानि बीजेपी सरकार में सीनियर कैबिनेट मंत्री गिरीष महाजन को किसानों के बीच भेजा और उनकी मांगों की लिस्ट मांगने के बहाने उनका टेंपर जानने की कोशिश की.

गिरीष महाजन किसानों की मांगो के बहाने किसानों के साथ कदमताल कर उस मोर्चे में चलकर सरकार के प्रति पैदा हुए आक्रोश को जानने की कोशिश की, जिसके बाद सरकार ने चंद्रकांत पाटिल के नेतृत्व में 6 कैबिनेट मंत्रियों की टीम गठित कर किसान मोर्चा की अगुवाई कर रहे जेपी गावित, अशोक धवले और अजीत नवले से लगातार बात करते रहे.

लेकिन मुख्यमंत्री ने इस मामले में सीधे किसानों से बात कर आखिरकार किसानों की मांगों पर आखिरी मुहर लगाकर एनसीपी और कांग्रेस के ना केवल उम्मीदों पर पानी फेरा बल्कि उनके आदिवासी वोटबैंक में बीजेपी ने सेंधमारी भी कर ली. सीएम को पता था कि कर्जमाफी के दौरान हुई तमाम खामियों से नाराज किसानों को मनाने के लिए इस बार चंद्रकांत पाटिल के बजाय किसी दूसरे चेहरे को भेजना ज्यादा बेहतर होगा. उन्होंने अपने करीबी कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन को इस मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी दी.

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