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'स्त्रियां भी लज्जा भंग करने की दोषी हो सकती हैं', कोर्ट ने महिला को सुनाई 3 वर्ष जेल की सजा

मझगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एक आदेश में कहा कि महिला भी महिला की लज्जा भंग कर सकती है, सिर्फ पुरुष ही नहीं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मझगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एक आदेश में कहा कि महिला भी महिला की लज्जा भंग कर सकती है, सिर्फ पुरुष ही नहीं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मजिस्ट्रेट ने यह भी कहा कि आईपीसी की धारा 354 के तहत अपराध किसी भी पुरुष या महिला द्वारा आवश्यक इरादे या ज्ञान के साथ क ...अधिक पढ़ें

मुंबई: एक दुर्लभ उदाहरण में, पिछले हफ्ते मझगांव मजिस्ट्रेट की अदालत ने 38 वर्षीय महिला को दूसरी महिला की लज्जा भंग करने के आरोप में दोषी पाते हुए, 3 साल कारावास या 1 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई. दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था. वर्ष 2020 में झगड़े के दौरान आरोपी महिला ने अपनी पड़ोसी महिला के कपड़े फाड़ दिए और पति से उसका दुष्कर्म करने के लिए कहा. अदालत ने कहा, ‘सभी गवाहों के साक्ष्य स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं कि आरोपी द्वारा पीड़ित पर आपराधिक बल का इस्तेमाल इस इरादे के साथ किया गया था कि ऐसा कृत्य करने से निश्चित रूप से उसकी लज्जा भंग होगी. पीड़ित को पीटकर और उसकी नाइटी फाड़कर आरोपी महिला ने उसके निजता के अधिकार का उल्लंघन किया है.’

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द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मनोज वसंतराव चव्हाण ने कहा, ‘सभी चश्मदीदों के साक्ष्य में यह बात सामने आई है कि जब घटना हुई थी, तो उसी इमारत के पुरुष भी वहां खड़े थे.’ मजिस्ट्रेट ने यह भी कहा कि आईपीसी की धारा 354 के तहत अपराध किसी भी पुरुष या महिला द्वारा आवश्यक इरादे या ज्ञान के साथ किया जा सकता है. उन्होंने कहा, ‘एक महिला किसी भी पुरुष के समान ही और प्रभावी रूप से किसी भी अन्य महिला पर हमला कर सकती है या आपराधिक बल का उपयोग कर सकती है; और इस इरादे या ज्ञान के साथ कि जिस महिला पर हमला किया गया है या जिसके खिलाफ आपराधिक बल का इस्तेमाल किया गया है, उसकी लज्जा भंग हो जाएगी. ऐसा नहीं है कि महिला, महिला की लज्जा भंग नहीं कर सकती या ऐसे अपराध सिर्फ पुरुष ही कर सकते हैं.’

मजिस्ट्रेट ने फैसला सुनाया कि आईपीसी की धारा 354 के तहत, एक पुरुष के साथ-साथ एक महिला को भी इस तरह के अपराध का दोषी ठहराया जा सकता है. मजिस्ट्रेट ने कहा, ‘आईपीसी की धारा 354, सभी व्यक्तियों पर समानता का संचालन करती है, चाहे वह पुरुष हो या महिला और यह नहीं रखा जा सकता है कि महिला को इस धारा के तहत किसी भी सजा से छूट दी जा सकती है.’ अदालत ने आरोपी महिला पर 6000 रुपये का जुर्माना भी लगाया. उसे जिस अपराध में दोषी पाया गया, उसमें अधिकतम सजा 5 साल जेल की थी. लेकिन अदालत ने न्यूनतम 1 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई. पीड़िता ने अदालत को बताया कि उसके आरोपी महिला की मां के साथ बहुत ही सौहार्दपूर्ण संबंध थे, जो आरोपी और उसके बीच विवाद का कारण था. पीड़िता ने कहा कि आरोपी ने उस पर चप्पल फेंकी और दूसरी चप्पल से उसके सिर पर भी वार किया. एक चश्मदीद पड़ोसी ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने कथित तौर पर पीड़ित महिला की गर्दन पकड़ ली और गाली देना शुरू कर दिया और उसकी नाइटी भी फाड़ दी.

Tags: Court, Law, Mumbai News

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