मुंबई हादसाः 18 घंटे तक बेटों की लाश के साथ मलबे में दबी रोती रही हलीमा

डोंगरी इलाके में गिरी केसरीबाई इमारत के मलबे से महिला को जीवित निकाला गया, लेकिन उसके दोनों बेटों की मौत हो गई. उसके रोने की आवाज सुन ही बचाव दल के सदस्यों को उसकी सही स्थिति की जानकारी हो सकी.

News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 12:43 PM IST
मुंबई हादसाः 18 घंटे तक बेटों की लाश के साथ मलबे में दबी रोती रही हलीमा
बचाव दल ने बताया कि हलीमा को इस बात की जानकारी हो गई थी कि उसके पास ही दबे पड़े उसके दोनों बेटों की मौत हो गई है.
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Updated: July 18, 2019, 12:43 PM IST
मुंबई के डोंगरी इलाके में ढही केसरीबाई इमारत के मलबे में 18 घंटे तक दबी रही हलीमा को बचाए जाने के पहले ही यह अहसास हो गया था कि उसके पास ही दबे पड़े दोनों बेटों की मौत हो चुकी है. मलबे में से ही उसके विलाप करने की आवाज आ रही थी. यही आवाज सुन कर बचाव दल के सदस्यों को भी उसकी सही स्थिति का पता चला और उसे बाहर निकाला गया. हीलीमा इदरिस मौत से तो जंग जीत गई लेकिन अपने बेटे अरबाज (7) और शहजाद (8) को उसने खो दिया. अब हलीमा को जे जे हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है जहां उसकी हाल गंभीर बताई जा रही है. उसके सिर, पैर और पेट में गहरी चोट आई है. गौरतलब है कि अब तक इस हादसे में मरने वालों की संख्या 16 हो गई है.

हलीमा के विलाप ने ही बचाई उसकी जान
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की टीम ने जब मंगलवार को जीनत सलमानी को मलबे से बाहर निकाला तो पता चला कि वह दूसरी मंजिल पर रहती थी. उसके नीचे पहली मंजिल पर हलीमा रहती थी, इससे बचाव दल को यह जानकारी मिली कि कुछ फीट नीचे मलबे में और लोग दबे हो सकते हैं. इसके बाद जब थोड़ा मलबा और हटाया गया तो हलीमा के विलाप करने की आवाज सुनाई दी. बचाव दल ने बताया कि उसको इस बात की जानकारी हो गई थी कि उसके पास ही दबे पड़े उसके दोनों बेटों की मौत हो गई है. टीम ने इसके बाद बुधवार सुबह सावधानी से उसे बाहर निकाला.

उसे बताया गया जिंदा हैं उसके बच्चे

हलीमा की हालत और न बिगड़े इसके लिए उसे यह बताया गया कि उसके दोनों बच्चे जिंदा हैं और उनका इलाज चल रहा है. हालांकि उसे यह बात पता थी कि उनकी मौत हो चुकी है. हलीमा के एक रिश्तेदार ने बताया कि उसे इस बात की जानकारी है कि अरबाज और शहजाद की मौत हो चुकी है. उसने खुद इस बारे में हमें बताया है.

कुछ दिनों पहले ही गांव से लौटे थे
हलीमा का पति राशिद मुंबई में कपड़ेां का व्यवसाय करता है. हलीमा अपने बच्चों के साथ लखनऊ के पास स्थित गांव में अपने ससुराल में रहती है. बच्चों के स्कूल की छुट्टियां होने पर वह कुछ दिनों के लिए पति के पास रहने आई थी. इस इमारत में घर भी उन्होंने कुछ ही दिनों के लिए किराए पर लिया था. जिस समय यह हादसा हुआ राशिद काम पर गया हुआ था और वह घर पर बच्चों के साथ अकेली थी.
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बच्चों का अंतिम संस्कार करने गांव गया राशिद
हलीमा के रिश्तेदारों ने बताया कि बुधवार शाम को ही राशिद दोनों बेटों के शवों को लेकर गांव के लिए रवाना हो गया है. पूरा परिवार वहां होने के कारण दोनों को वहीं दफनाया जाएगा.

होंगे कई ऑपरेशन
डॉक्टरों ने बताया कि हलीमा को मलबे के गिरने के कारण गंभीर चोट लगी हैं. उसको लाइफ सेविंग मेडिसिन पर रखा गया है. उसकी हालत में सुधार करने के लिए कई सर्जरी करनी पड़ेंगी. इस दौरान उसे लगातार अस्पताल में ही रखा जाएगा. उसकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और वह अपने बच्चों की मौत को लेकर सदमे में है.

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First published: July 18, 2019, 12:26 PM IST
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