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जीका वायरस के हालात पर नजर रखने के लिए केंद्र ने महाराष्ट्र भेजी हाईलेवल टीम

महाराष्ट्र में जीका वायरस संक्रमण का पहला मामला पुणे जिले में सामने आया था. (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र में जीका वायरस संक्रमण का पहला मामला पुणे जिले में सामने आया था. (फाइल फोटो)

Maharashtra Zika Virus: महाराष्ट्र में जीका वायरस संक्रमण का पहला मामला बीते 31 जुलाई को पुणे जिले में सामने आया था.

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    मुंबई. महाराष्ट्र में जीका वायरस का पहला केस सामने आने के साथ ही केंद्र सरकार ने सोमवार को इसके हालात पर नजर रखने के लिए एक उच्च स्तरीय दल भेजा है, ताकि बीमारी को और फैलने से रोकने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने में अधिकारियों की मदद की जा सके. तीन सदस्यीय केंद्रीय टीम में क्षेत्रीय निदेशक, पुणे के कार्यालय से एक जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली से एक स्त्री रोग विशेषज्ञ और राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (एनआईएमआर), आईसीएमआर, नई दिल्ली से एक कीट विज्ञानी (एंटोमोलॉजिस्ट) शामिल हैं.

    बयान के अनुसार टीम राज्य के स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर काम करेगी, जमीनी हालात का जायजा लेगी और आकलन करेगी कि क्या जीका प्रबंधन के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की कार्य योजना लागू की जा रही है. बयान में कहा गया है कि यह राज्य में जीका वायरस के मामलों के प्रबंधन के लिए आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की भी सिफारिश करेगी.

    राज्य में जीका वायरस संक्रमण का पहला मामला बीते 31 जुलाई को पुणे जिले में सामने आया था. हालांकि, राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि संक्रमित पायी गई महिला मरीज पूरी तरह से ठीक हो गई है. विभाग ने एक बयान में कहा था, ‘उसे और उसके परिवार के सदस्यों में कोई लक्षण नहीं हैं.’

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    बयान के अनुसार पुरंदर तहसील के बेलसर गांव निवासी 50 वर्षीय महिला की 30 जुलाई को जांच रिपोर्ट मिली थी. रिपोर्ट में कहा गया कि जीका संक्रमण के अलावा वह चिकनगुनिया से भी पीड़ित थी. स्वास्थ्य विभाग के बयान में कहा गया कि एक सरकारी चिकित्सा दल ने 31 जुलाई को गांव का दौरा किया और सरपंच और ग्राम पंचायत सदस्यों से मुलाकात करके उन्हें रोकथाम उपायों के बारे में निर्देश दिया. महाराष्ट्र से पहले यह सिर्फ केरल तक ही सीमित था.

    जीका वायरस के लक्षण क्या हैं?
    डेंगू और मलेरिया की तरह, जीका एक तरह का वायरस है जो मच्छर के काटने से फैलता है. यह मुख्य रूप से एडीज मच्छरों द्वारा प्रसारित एक वायरस की वजह से होता है, जो दिन में ही काटता है. यही मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने के लिए भी जिम्मेदार है.

    जीका का पहला दिखाई देने वाला लक्षण बुखार है, जो कि काफी हद तक डेंगू जैसा ही होता है. हालांकि, पहली बार में इसकी पहचान करना बहुत मुश्किल है. कई रोगी फ्लू के लक्षणों से भ्रम में पड़ जाते हैं और इसलिए उन्हें यह नहीं पता होता है कि उन्हें जीका हुआ है या नहीं. जीका वायरस से संक्रमित मरीजों के सामान्य लक्षणों में बुखार, चकत्ते और जोड़ों में दर्द शामिल हैं. इस वायरस से मरीजों के संक्रमित होने या फिर इसके लक्षण सामने आने में तीन से 14 दिनों का समय लगता है.

    भारत में कब आया जीका वायरस का पहला केस
    भारत के लिए जीका वायरस नया नहीं है. भारत में इस वायरस के पहले मामले की पुष्टि 2017 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने की थी. फरवरी 2016 में, डब्ल्यूएचओ ने जीका को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल (Global Health Emergency) घोषित किया था. गुजरात भारत का पहला राज्य था जहां जीका वायरस के मामले सामने आए थे, उसके बाद इस वायरस का शिकार होने वाला तमिलनाडु दूसरा राज्य बना.

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